जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर के जाने-माने गायक कलाकार और सारेगामापा विजेता इशिता विश्वकर्मा के पिता व मेंटोर अंजनि विश्वकर्मा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। जिनके तिलवारा में हुए अंतिम संस्कार के दौरान बेटी इशिता ने मुखाग्नि दी। गौरतलब है कि इशिता को संगीत अपने पिता अंजनि और मां तेजल से विरासत में मिला है। दोनों ने मिलकर बेटी को संगीत का प्रशिक्षण दिया और राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया।

माता-पिता का अशीर्वाद ही था जो इशिता ने सारेगामापा विजेता बनकर शहर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी। अंजनि विश्वकर्मा के साथी कलाकार सत्यम तिवारी ने बताया कि नगर निगम द्वारा तत्कालीन कमिश्नर वेदप्रकाश के निर्देशन में एक जिंगल तैयार था। उसे समय मेरे दिमाग में गाने के बोल आ गए थे। क्योंकि मैं और अंजनि कालेज के समय के साथी थे तो मैं अंजनि के पास गया। जहां अंजनि ने अपने स्टूडियोे में बैठकर तेजल और इशिता के साथ जिंगल रिकार्ड किया।

यहां तक कि की-बोर्ड पर संगीत अंजनि ने ही बजाया और जिंगल का पूरा संगीत भी दिया। इस तरह मेरे शब्दों को तेजल, इशिता ने अपनी आवाज दी और अंजनि ने रिकार्ड किया और जिंगल बना सुन लो भैया, सुन लो बाबू सुन लो अम्मा जी... कचरे वाली गाड़ी में ही कचरा डालो जी।

अंजनि विश्वकर्मा ने कालेज के समय से गायकी में खूब नाम बटोरा। गजल गायकी उनका पसंदीदा विषय था। उसमें भी जगजीत सिंह जी की गजलों को गाना पसंद करते थे। इसी गजल के चलते जगजीत सिंह ने मुलाकात में उनकी प्रतिभा को खूब सराहा था। यहां तक कि जीवन संगिनी के रूप में तेजल से मुलाकात भी संगीत के जरिए ही हुई। इशिता के अलावा अंजनि की एक छोटी बेटी भी है जिसका नाम अनुकृति है।

अंजनि ने अपने स्टूडियो में कई भजनों, देवी गीतों व अन्य गीतों की रिकार्डिंग की। जो बहुत प्रसिद्ध हुए। इसके साथ ही शहर के कलाकारों को पहली बार विदेश में प्रस्तुति देने का अवसर दिलाने का श्रेय भी अंजनि और तेजल विश्वकर्मा को ही जाता है।

Posted By: Ravindra Suhane

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