Sarvapitru Moksh Amavasya 2020: जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। इस बार पितृ मोक्ष अमावस्या पर 38 साल बाद सूर्य संक्रांति का संयोग बन रहा है। इससे पहले ये संयोग 1982 में बना था और अब 19 साल बाद फिर बनेगा। 17 सितंबर को अमावस्या पर उन मृत लोगों के लिए पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण कर्म किया जाएगा जिनकी तिथि मालूम नहीं है। इसके अलावा इस बार यदि किसी मृत सदस्य का श्राद्ध करना भूल गए हैं तो उनका भी अमावस्या पर श्राद्ध कर्म किया जा सकता है।

पितृलोक लौट जाते हैं पितर

मान्यता है कि पितृ पक्ष में सभी पितर देवता धरती पर अपने-अपने कुल के घरों में आते हैं और धूप-ध्यान, तर्पण आदि ग्रहण करते हैं। अमावस्या पर सभी पितर अपने पितृलोक लौट जाते हैं। पितृ मोक्ष अमावस्या पर सभी पितरों के लिए श्राद्ध और दान किया जाता है। इससे पितृ पूरी तरह संतुष्ट हो जाते हैं। वायु रूप में धरती पर आए पितरों को इसी दिन विदाई दी जाती है और पितृ अपने लोक चले जाते हैं।

सूर्य का कन्या राशि में आना शुभ संयोग

ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे का कहना है कि पितृ मोक्ष अमावस्या पर ही सूर्य का कन्या राशि में आना शुभ संयोग है। उपनिषदों में कहा गया है कि जब सूर्य कन्या राशि में हो तब श्राद्ध करने से पितर पूरे साल तक संतुष्ट हो जाते हैं। अब 17 सितंबर 2039 को ऐसा होगा जब पितृ मोक्ष अमावस्या पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेगा। पंडित प्रवीण मोहन शर्मा का कहना है कि इस बार अमावस्या पर सूर्य और चंद्रमा दोनों ही उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रहेंगे। ये ग्रह स्थिति इस पर्व को और भी शुभ बना रही है, क्योंकि पुराणों के अनुसार इस नक्षत्र में पितरों के देवता अर्यमा रहते हैं। इसलिए इस बार ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग में श्राद्ध करने पर पितर तृप्त हो जाएंगे।

कोरोना संक्रमण का रखना होगा ध्यानः

श्राद्ध पक्ष श्रद्धा से जुड़ा है जिसमें पितरों का तर्पण किया जाता है। अमावस्या के दिन नर्मदा तटों पर पितरों को विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। इस दौरान बढ़ते कोरोना संक्रमण को भी ध्यान रखना होगा। ज्यादातर लोग सुबह के समय तर्पण करने के लिए पहुंचते हैं।

अमावस्या तिथि पर ये शुभ कर्म भी करें

-जरूरतमंद लोगों को धन और अनाज का दान करना चाहिए।

-किसी मंदिर में, किसी गोशाला में भी दान करना चाहिए।

-सूर्यास्त के बाद घर में मंदिर में और तुलसी के पास दीपक जलाएं।

-मुख्य द्वार पर और घर की छत पर भी दीपक जलाना चाहिए।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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