जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। निजी स्कूलों की मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है। फीस नहीं भरने की वजह से बच्चों को परीक्षा से वंचित किया जा रहा है। शासन के निर्देश के बावजूद स्कूल मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जिसमें एक छात्रा की केवल एक माह की फीस बाकी रहने पर उसे परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। जब यह बात अभिभावक जन कल्याण संघ तक पहुंची तो मामले की शिकायत कलेक्टर और बाल संरक्षण आयोग से की गई।

सदर टीएफआरआई स्थित निजी स्कूल में एक अभिभावक की बेटी कक्षा एक में अध्ययनरत है। एक माह की शेष फीस जमा नहीं कर सके जिसे लेकर स्कूल प्रबंधन ने परीक्षा में शामिल नहीं होने दिए गया। अभिभावक ने सार्वजनिक रूप से स्कूल द्वारा अपमानित करने और छात्रो को परीक्षा से वंचित किए जाने को लेकर नाराजगी जताई है।

अभिभावक जन कल्याण संघ के अध्यक्ष हेमंत पटेल ने कहा कि स्कूल के अभिभावक संपर्क साधा। जब इस बात की जानकारी संगठन को लगी तो कलेक्टर सहित बाल आयोग से शिकायत की गई। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुशंसित किया हैं। कलेक्टर, शिक्षा अधिकारी से उचित कार्रवाई करने की मांग संगठन ने की है। यहां बता दे कि कोरोना संक्रमण के बाद से विभाग ने कई बार आदेश जारी कर निजी स्कूलों को विद्यार्थियों को फीस के लिए परेशान नहीं करने के निर्देश दिए है। इसके अलावा फीस के संदर्भ में खासतौर पर विद्यार्थी को प्रताड़ित नहीं करने को कहा है।

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किसी भी छात्र को क्लास अथवा परीक्षा से रोका नहीं जा सकता है। यदि स्कूल एेसा कर रहा है तो यह अनुचित है। शिकायत प्राप्त होने पर संज्ञान में लेकर स्कूल के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

-घनश्याम सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी

Posted By: Ravindra Suhane

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