कमलेश मिश्रा, जबलपुर। कहते हैं कि जिसने लक्ष्य तय कर रखा हो तो दुनिया की कोई भी बाधा उसका रास्ता नहीं रोक सकती। इसी को चरितार्थ कर दिखाया है चौथा पुल नेपियर टाउन में रहने वाले शुभम बर्मन ने। शुभम ने बचपन से ही सेना में जाने की ठानी थी, वह लगातार प्रयास भी करता रहा, लेकिन उसका सपना पूरा होने से पहले ही उसके पिता योगेश बर्मन का कोरोना के कारण निधन हो गया। इस घटना ने शुभम को हिलाकर रख दिया, लेकिन शुभम ने अपने को बिखरने से बचाए रखा और वह लक्ष्य हासिल किया, जो उसने तय कर रखा था।

शुभम हाल ही में चेन्नई से कमीशन लेकर जबलपुर लौटा है। उसका चयन यूपीएससी के माध्यम से हुआ था।

उसकी ट्रेनिंग और कमीशनिंग भी पूर्ण हो चुकी है। शुभम ने बताया कि बचपन से ही उसने सेना में जाने का संकल्प लिया था। उसने बारहवीं के बाद से ही एनडीए की परीक्षा देना शुरू कर दिया था, लेकिन सफलता उसके हाथ से बार-बार छिटक रही थी। इसी दौरान उसने शासकीय विज्ञान महाविद्यालय से बीएससी की डिग्री ले ली। उसने अब यूपीएससी के माध्यम से सेना में जाने का रास्ता तलाशना शुरू किया और चौथे प्रयास में वह उस जगह पहुंच गया, जहां का वह सपना देख रहा था।

सीडीएस के तहत सिलेक्शन

शुभम ने बताया कि उसका सिलेक्शन सीडीएस (कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज) के तहत हुआ। यूपीएससी से सिलेक्शन के बाद सीडीएस के तहत उसका साक्षात्कार हुआ। इसके बाद मेडिकल राउंड कंपलीट करने के बाद वो आफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीए) चेन्नई पहुंच गया, यहां भी उसने जमकर पसीना बहाया और कमीशन हासिल किया। उसके साथ देश के 124 जांबाजों ने ट्रेनिंग ली, जिनमें जबलपुर से वह अकेला रहा। शुभम की पदस्थापना संभवत: जल्द ही उत्तर भारत में किसी स्थान पर होगी।

परिवार में पांच सदस्य

शुभम के परिवार में उसके दादा रेवालाल बर्मन, मां सविता बर्मन, बहिन मोनिका बर्मन और एक छोटा भाई अभिषेक बर्मन हैं। शुभम की सफलता ने परिवार के सभी सदस्यों को आल्हादित कर रखा है। मां सविता बर्मन का कहना है कि वह और उनका परिवार बहुत खुश है।

Posted By: tarunendra chauhan

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