जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। रेलवे ने भविष्य की चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना शुरू कर दिया है। डीजल की बढ़ती कीमत से निपटने रेलवे ने विद्युत इंजन उतारा। अब महंगी बिजली का विकल्प भी रेलवे ने तैयार कर लिया है। पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल के कटनी विद्युत लोको यार्ड ने बैटरी से चलने वाला इंजन तैयार किया है। इसकी मदद से 400 टन वजनी पैसेंजर ट्रेन को आसानी से चलाया जा सकता है। इंजन इसमें लगी 22 एएच की 84 बैटरी से चलता है, जिसे चार्ज करने में 40 मिनट का वक्त लगता है। एक बार चार्ज होने पर यह इंजन 400 टन वजनी रैक को एक घंटे तक 30 किमी प्रति घंटे चला सकता है। विद्युत लोको यार्ड के इंजीनियर इंजन की बैटरी क्षमता बढ़ाने और चार्जिंग के समय को कम करने पर शोध कर रहे हैं। इसकी मदद से इंजन की ताकत को बढ़ा सके। इधर रेलवे ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए बैटरी-विद्युत इंजन से पैसेंजर ट्रेन चलाने लगातार शोध और अध्ययन कर रहा है। रेलवे को उम्मीद है कि वह इसमें सफलता होगा।

बैटरी और विद्युत, दोनों से चलता है नवदूत

जबलपुर रेल मंडल ने बैटरी से चलने वाले अभी तक तीन इंजन बनाए हैं, जिसे नवदूत नाम दिया गया है। यह इंजन बैटरी के साथ विद्युत इंजन से भी चलते हैं। इंजन के इंजीनियर की मंशा थी कि वे एक एक ऐसा इंजन बनाना चाहते थे, जो डीजल की बजाए विद्युत और बैटरी, दोनों से चले। उन्हें इस काम में सफलता मिल गई। यह इंजन बैटरी के साथ विद्युत से भी चलता है। ताकि ओएचई खराब होने पर ट्रेन को घंटों ट्रैक पर खड़ा कर ट्राफिक जाम करने की बजाए बैटरी वाले इंजन की मदद से ट्रेन को स्टेशन तक लाया जा सके। हालांकि अभी इसमें लगी बैटरी की क्षमता काम है, जिस वजह से इसका उपयोग सिर्फ स्टेशन और यार्ड में ट्रेन के कोच को मेन लाइन से लूप लाइन और लूप लाइन से मेन लाइन में लाने के लिए किया जा रहा है।

ऐसे करता है काम

2020 में इन इंजन को बनाने का काम पूरा हुआ। इससे मिले बेहतर परिणाम के बाद दो और बैटरी आपरेट इंजन बनाया गया। खास बात यह है कि इस शोध के लिए कटनी विद्युत लोको यार्ड को रेलवे बोर्ड ने बेस्ट इनोवेशन अवार्ड से सम्मानित किया। इस इंजन में लगी 84 बैटरी के पावर को 1100-1100 एएच की दो यूनिट में बांटा गया है, जो इंजन के पहिए में लगी मोर्टर को पावर देती है। बैटरी की कीमत लगभग आठ लाख रुपये है। इसमें जिसकी मदद से इंजन 15 से लेकर 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलता है।

यहां होता है काम

- जबलपुर, कटनी और रीवा यार्ड में इस इंजन को उपयोग किया जा रहा है

- 15 से 18 कोच की ट्रेन को शंटिंग करने के दौरान इसका उपयोग हो रहा है

- इस इंजन को चार्ज करने की व्यवस्था यार्ड में ही की गई है।

- कई बार ओएचई फेल हो जाने के दौरान इस इंजन की मदद से ट्रेन को मेन लाइन से हटाते हैं

- ओएचई बंद होने या टूटने के दौरान भी यह इंजन रेलवे के लिए उपयोगी साबित हुए

अब इस पर चल रहा शोध

- इंजन में लगी बैटरी के चार्ज के समय को काम कर, इसके पावर को बढ़ाने पर काम हो रहा है।

- इंजन के व्हील से ही बैटरी चार्ज हो, इस पर भी इंजीनियर विचार कर रहे हैं।

- डीजल इंजन की उपयोगिता को पूरी तरह से खत्म कर विद्युत-बैटरी इंजन को ही काम पर लिया जाए

संख्या बढ़ाई जा रही है

रेलवे भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए बैटरी विद्युत इंजन नवदूत को लगातार अपग्रेड कर रहा है। इसकी संख्या भी बढ़ाई जा रही है। वर्तमान में इस इंजन की मदद से स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेनों की शंटिंग की जा रही है। -राहुल जयपुरिया, सीपीआरओ, पमरे

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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