जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्मार्ट रोड के स्मार्ट फुटपाथ भी अतिक्रमण की चपेट में आ गए है। शहर के व्यस्तम मार्गों में शुमार रांझी-घमापुर सड़क को तकरीबन 25 करोड़ रुपये खर्च कर स्मार्ट रोड बनाया गया है। लेकिन आधी से ज्यादा बन चुकी स्मार्ट रोड को देखकर लगता नही कि ये स्मार्ट रोड है। अन्य सड़कों की तरह स्मार्ट रोड के फुटपाथ पर भी कब्जे हो गए हैं। अतिक्रमणकारियों ने फुटपाथ को अपनी जागिर समझ कर कब्जा कर रखा है। रांझी से लेकर बाई के बगीचा तक व्यापारियों ने फुटपाथ से लेकर सड़क तक अपनी दुकानें सजा ली है। पैदल चलने के लिए फुटपाथ नजर ही नहीं आ रहे हैं। इसी तरह राइट टाउन , नेपियर टाउन सहित अन्य स्मार्ट रोड में भी कब्जे हो गए है। इन्हें इस उद्देश्य से बनाया गया था कि वाहन चालकों को जहां आवागमन में परेशानी न हो वहीं पैदल पथिक भी बिना वाहनों के भय से फुटपाथ पर चल सके। लेकिन ये उद्देश्य पूरा होता नहीं दिख रहा है।

आधी सड़क तक घेर ली: स्मार्ट रोड के हाल ये है कि चाय-पान, नाश्ते के ठेले-टपरे, पंचर की दुकान, मैकेनिक, सब्जी, फल के ठेले-टपरे जहां फुटपाथ पर आबाद हो गए हैं। वहीं फुटपाथ से लेकर आधी सड़क तक बर्तन, इलेक्र्टानिक, फर्नीचर व कपड़े वालों ने दुकानें बढ़ा ली है। सड़क के दोनों तरफ बेजा कब्जों के कारण करीब 80 फीट चौड़ी सड़क भी 40 फीट तक घट जाती है।

बना रहता है यातायात का दबाव: रांझी-घमापुर सड़क शहर की व्यस्तम सड़क मानी जाती है। वीकल, जीसीएफ, खमरिया फैक्ट्री के ज्यादातर कर्मचारी इसी मार्ग से आवागमन करते है। दो पहिया वाहनों के अलावा चार पहिया, तीन पहिया यहां तक की मेट्रो बसें चलने से सुबह से शाम तक इस मार्ग पर यातायात का दबाव बना रहता है। रोजाना 80 हजार से ज्यादा लोग आवागमन करते हैं। वाहन चालक तो ठीक है लेकिन फुटपाथ पर कब्जे होने से पैदल चलने वालों की जान जोखिम में बनी रहती है।

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स्मार्ट रोड नागरिकों के आवागमन की सहूलियत के लिए बनाई गई है। फुटपाथ व सड़क किए गए कब्जे हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

रवि राव, प्रशासनिक अधिकारी स्मार्ट सिटी

Posted By: Ravindra Suhane

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