भैया प्रेम तो किसी से भी हो सकता है कुछ इंसान से करते हैं तो कुछ जानवर से। जानवर तक तो प्रेम ठीक है, पर यह इंसान से होने लगे तो उसके कई मायने होते हैं। इन दिनों जबलपुर मंडल के कर्मचारी या कहें टेंट वाले भैया के प्रति रेल नेताओं का प्रेम जगजाहिर हो रहा है । इन भैया ने नेताओं के प्रेम का फायदा उठाकर रेलवे क्वार्टर पर अपने टेंट की दुकान सजा ली। जब क्वार्टर्ड तोड़ने की बारी आई तो यह भैया अपने रेल नेताओं का हवाला देकर मकान खाली करने से मना कर दिया। अब मामला मंडल से लेकर जोन में बैठे अधिकारियों तक पहुंचा। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार भी लगाई। फिर क्या था अधिकारियों ने भी यूनियन की प्रेम को दरकिनार कर टेंट वाले भैया को 10 दिन का नोटिस दे दिया है। अब कह दिया है आप खाली कर दें या हम खाली करवा लेंगे।

स्टेशन में दुकान बड़ी, दर्शन छोटे--

यह कहावत तो शायद आप ने सुनी ही होगी कि नाम बड़े और दर्शन छोटे, पर यह मामला थोड़ा अलग है। इन दिनों रेलवे थोड़ा हटकर काम कर रहा है। मामला कुछ ऐसा है कि जबलपुर रेलवे स्टेशन पर दोनों ओर खाने की दुकान को लेकर काफी चर्चाएं हैं । दुकान तो बड़ी है, पर खाने और सुविधाओं के दर्शन थोड़ा छोटे हैं । यहां पर यात्रियों को आराम कराने के नाम पर छोटे- छोटे कमरे बना दिए गए और इन कमरों पर बिना बोर्ड लगाए लोगों को वह आराम दिया गया, जिसके बारे में रेलवे को दूर-दूर तक कुछ पता ही नहीं । हालांकि रेलवे ने तो काम इमानदारी का किया और आय भी बढ़ाई लेकिन इसे पसंद ना करने वाले इसे दूसरी शक्ल दे रहे हैं। सुनने में तो यह भी आया है कि यह रेस्टोरेंट रेल मंडल की दूर के एक स्टेशन की सीमा में आने बड़े नेता जी के आशीर्वाद से चल रहा है। इन निजी ठेकेदार ने अपने नेता जी के आशीर्वाद का भरपूर लाभ उठाया है इसमें कई अधिकारियों को भी फंसा दिया।

रिटायरमेंट से पहले नौकरी की तलाश

काम करने की कोई उम्र नहीं होती, वे जब चाहते हैं, काम करना शुरू कर देते हैं। वेटनरी कॉलेज के प्रोफेसर को ही ले लो। रिटायरमेंट की उम्र में भाई नौकरी की तलाश करने में लगे हैं। यही वजह है कि वह इन दिनों साक्षात्कार देने झांसी में डेरा डाले हुए हैं। विश्वविद्यालय से बड़ी नोकरी के लिए इस प्रोफेसर ने डीन बनने की ख्वाहिश लिए जबलपुर से झांसी की ओर रुक किया है। उन्हें उम्मीद है कि वे साक्षात्कार में सफल होंगे। हालांकि इस साक्षात्कार को देने के लिए देश भर से आ रहे उम्मीदवार पहले ही अपना जुगाड़ लगाकर बैठे हैं। कैसी भी हैं भी दिन रह चुके हैं और कई अभी भी कई ऐसे प्रोफेसर भी है जिन्होंने सारी उम्र डीन बनने की ख्वाहिश पूरी करने में अपनी उम्र को रिटायरमेंट तक ले आए। इस बार उन्हें उम्मीद है कि उनकी यह ख्वाहिश हर हाल में पूरी होगी, इसलिए उन्होंने साक्षात्कार के लिए पढ़ाई के साथ जुगाड़ भी लगाया है।

स्टेशन की सफाई से मुखिया नाराज

रेलवे ने अपनी आय बढ़ाने के लिए कई प्रयोग शुरू किए और उन पर फोकस भी किया। इस दौरान यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर भी किया, लेकिन इस दौरान रेलवे ने स्टेशन की सफाई को नजरअंदाज कर दिया। इस सफाई पर यात्रियों का ध्यान किया तो उन्होंने शिकायत की, लेकिन ये शिकायत अनसुनी कर रेलवे ने दरकिनार कर दी। अब पश्चिम मध्य रेलवे जोन के मुखिया ने भी स्टेशन की सफाई को लेकर नाराजगी की है। इतना ही नहीं इस सफाई के जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाकर उन्हें खामियाजा भुगतने का संकेत ही दिया। हालांकि रेलवे अभी तक स्टेशनों की सफाई को लेकर कोई बड़ा कदम नहीं उठाया , जिसकी वजह से स्टेशनों की गंदगी हर और बिगड़ती जा रही है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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