जबलपुर। हाई कोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग, ओबीसी का पक्ष मजबूती से रखने विशेष अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के न्यायदृष्टांत खोज रहे हैं। जो न्यायदृष्टांत पहले से उनके पास हैं, उनकी कानूनी बिंदुओं के हिसाब से सूक्ष्म व्याख्या जारी है। मसलन, इंदिरा साहनी के मामले में वे बिंदु तलाशे जा रहे हैं, जिनका संबंध ओबीसी के हितों को संरक्षित करने से है। विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह ने बताया कि हाई कोर्ट में अब तक 38 बार सुनवाई हो चुकी है। अब मामला अंतिम स्तर की बहस तक पहुंच गया है। मध्य प्रदेश शासन की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह व उनकी टीम के अलावा सालिसिटर जनरल तुषार मेहता को बुलाया जा रहा है। जबकि अशिता दुबे सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी सहित अन्य अधिवक्ता पक्ष रखेंगे।

मामला 14 प्रतिशत व 27 प्रतिशत के बीच बहस से जुड़ा है। एक पक्ष संविधान के अनुरूप 14 से अधिक ओबीसी आरक्षण न देने पर दबाव बना रहा है, तो दूसरा 51 प्रतिशत जनसंख्या वाले ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण की मांग पर अड़ा है।

विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि वे लंबे समय से ओबीसी के मामले लड़ रहे हैं। कई मामलों में जीत मिली है। कई परीक्षाओं में ओबीसी का हक मारा जा चुका है। जिसका विरोध किया गया। ऐसे में सच्चाई सामने आई है। ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन का गठन किया गया। इसी के बैनर के तले मामले दायर किए गए। यह संगठन कानूनी रास्ते के अलावा आंदोलन का भी सहारा लेता है। जब ओबीसी मामले की सुनवाई होती है तब न केवल मध्य प्रदेश किंतु पूरे देश के ओबीसी वर्ग के रहनुमाओं की निगाह टिक जाती है। मध्य प्रदेश शासन को भी इस मामले की गंभीरता का एहसास है। इसीलिए एक बड़े वर्ग को नाखुश नहीं किया जा सकता। इसी सिलसिले में विशेष अधिवक्ता नियुक्त किया गया है।

Posted By: Jitendra Richhariya

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