जबलपुर (बृजेश शुक्ला)। महीने में आने दो प्रदोष ने इस बार सावन माह को खास बना दिया है। अगर आप सावन माह के द्वितीय सोमवार 29 जुलाई को भोले का पूजन करने का मन बना रहे हैं तो जल्दी तैयारी कर लीजिए। क्योंकि इस बार का सावन विशेष है और इसमें दो सोमवार प्रदोष के साथ आ रहे हैं।

भक्तों को यह विशेष अवसर 29 जुलाई और 12 अगस्त को मिलेगा। यह शुभ संयोग वर्ष 2008 के बाद इस बार 2019 में पड़ रहा है। इसके बाद यह संयोग 2024 में पड़ेगा। यानी इस बार अगर आपने देरी कर दी तो फिर ऐसे संयोग के लिए आपको पांच साल का इंतजार करना पड़ेगा।

सावन माह सोमवार का दिन और प्रदोष व्रत तीनों ही भगवान शिव को समर्पित और प्रिय है। इसलिए इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का अधिक महत्व है। यह दुर्लभ संयोग कई वर्षों में एक बार आता है इसलिए यह दिन केवल शिव भक्तों के लिए ही नहीं बल्कि मानव जाति के लिए खास दिन है। इस दिन प्रदोष का व्रत रखकर पूर्ण विधि-विधान से शिव परिवार का पूजन करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। उसके परिवार से बीमारियों का साया हमेशा हट जाता है और सुख, सौभाग्य, धन-धान्य से पूर्ण हो जाता है।

क्या है प्रदोष काल

प्रदोष काल दरअसल उस समय को कहते हैं, जब सूर्यास्त हो गया हो, लेकिन रात नहीं आई हो। यानी सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले के बीच जो अवधि होती है, उसे ही प्रदोष काल कहा जाता है। सोम प्रदोष व्रत के दिन इसी समयावधि के दौरान यदि भगवान शंकर की विधिवत पूजा की जाती है तो वह सारी मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। सोम प्रदोष व्रत की पूजा शाम 4.30 बजे से लेकर शाम 7 बजे के बीच की जाती है।

इच्छाएं पूरी होती हैं

हमेशा बेचैन और चंचल चित रखने वाले लोगों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है। सोम प्रदोष व्रत को करने वाले लोगों को जीवन में कभी हार का सामना नहीं करना पड़ता और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं- पंडित सौरभ दुबे, ज्योतिषाचार्य