जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने रेलवे इन दिनों सभी परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने में जुट गया है। पश्चिम मध्य रेलवे जोन की सीमा में आने वाली जबलपुर, भोपाल और कोटा रेल मंडल की सीमा से गुजरने वाले रेल लाइन के अधिकांश रेल लाइन पर तेज गति की ट्रेन चलाने के लिए परख लिया है, लेकिन कोटा का यदि छोड़ दिया जाए तो जबलपुर और भोपाल रेल मंडल के ट्रैक पर तेज गति से ट्रेन अभी तक नहीं दौड़ सकी हैं। इसकी मुख्य वजह रेल लाइन के दोनों ओर बढे़ अतिक्रमण और जानवर हैं। रेलवे ट्रैक को इनसे बचाने के लिए ट्रैक के दोनों ओर पफेंसिंग लगाने का काम किया जाना था, लेकिन काम तो दूर, यह शुरू तक नहीं हो सका है।

योजना तैयार, पर काम नहीं: जबलपुर समेत जहां-जहां से रेल लाइन गुजरती है, वहां उसके दोनों ओर फेंसिंग लगाई जानी थी। इतना ही नहीं स्टशेनों के दोनों ओर बाउंड्रीवॉल बनाई जानी थी। रेलवे ने स्टेशन के दोनों ओर तो बाउंड्रीवाल बना दी, लेकिन फेंसिंग नहीं लगा सका। सूत्र बताते हैं कि यह काम रेलवे बोर्ड स्तर पर होना था, लेकिन कुछ रेल मंडल में यह काम शुरू हो गया है और कुछ में अभी भी टेंडर और कमीशन के कारण नहीं हो पाया है। अब हालात यह है कि ट्रैक पर कभी भी कहीं से भी जानवर आ जातेे हैं और इंजन से टकराकर उनकी मौत हो जाती है। वहीं ट्रैक पर दोनों लगे अतिक्रमण के कारण इनमें रहने वाले लोग ट्रैक के आसपास ही रहते हैं।

100 के अधिक नहीं हुई स्पीड: पश्चिम मध्य रेलवे ने अपनी सीमा से गुजरने वाली ट्रेनों की स्पीड बढाने के लिए अब तक जो प्रयास किए, वह नाकाफी रहे। अभी तक ट्रेनों की रफ्तार को 100 किमी प्रति घंटे तक लाने में उसे पूरी सफलता नहीं मिली है। जबलपुर मंडल में ट्रेनों की स्पीड बढाने के लिए जो प्रयास किए, वह नाकाफी रहे। इसकी एक वजह रेलवे के अतिक्रमण भी हैं। मंडल ने कुछ समय पूर्व इन अतिक्रमण को हटाने के लिए जो तैयारी की, उन पर अभी तक पूरी तरह से अमल नहीं हो सका है।

Posted By: Ravindra Suhane

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