जबलपुर, गांधीग्राम,नईदुनिया प्रतिनिधि। जिले के विभिन्न स्थानों में पराली की आग प्रदूषण का कारण बन रही है। मामले में वर्तमान समय में गांधीग्राम सहित आसपास के ग्रामों में अल सुबह व देर रात जलाई जा रही खेतों की पराली का धुआं लोगों की सेहत का दुश्मन बना हुआ है। सुबह व शाम के समय आसमान, गांव की आबादी तथा हाईवे पर धुएं के गुबार छाए रहते हैं।दरअसल यह धुआं खेतों में जलाई गई पराली से फैल रहा है।

वायु प्रदूषण का खतरा बढ़ने के बावजूद किसान नहीं चेत रहे आए दिन खेतों की पराली जलाकर वायु प्रदूषण की वजह बन रहे हैं।

प्रदूषण रोकने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन उसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। शासन, प्रशासन द्वारा पर्यावरण प्रदूषण के संकट से बचने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा।

फसल काटने के बाद खेत में आग लगाकर पराली जलाना प्रतिबंधित है। लेकिन गांधीग्राम सहित विकासखंड सिहोरा के आसपास के ग्रामों में कृषक अपने खेतों में धान कटने के बाद आग लगाने का काम लगातार जारी हैं।

रोज जगह जगह खेतों से उठते धुएँ एवं आग की लपटों को देखा जा सकता है।

लोगों को घुटन हो रही : इन दिनों गांव गांव इसके धुंए से चारों ओर धुंध छाई हुई है। हवा में धुंए के कारण लोगों को घुटन महसूस होती है। हाइवे व गांवों के दोनों ओर कृषि भूमि है। जिसके चलते धुंआ गांव की आबादी की तरफ उड़ता है और पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।

मार्निग वाक पर जाना किया बंद : धुएँ के रूप में आसमान व वातावरण में फैले जहरीले प्रदूषण से बहुत से लोगों को सांस लेने में तकलीफ़ होती है।बधाों में भी खांसी आने लगती है।धुएँ की वजह से लोगो ने मार्नंिग वाक पर जाना बंद कर दिया है।

पराली जलाकर ही खेत साफ करने का जुनून : फसलों के छूटे अवशेषों को नष्ट करने के लिए कई आधुनिक उपकरण आ गए हैं। इसके बावजूद किसान पराली जलाकर ही खेत साफ करता है। जिससे पर्यावरण तो दूषित होता ही है,खेतों के मित्र कीट भी नष्ट होते हैं। शासन प्रशासन को इस ओर किसानों को जागरूक करना चाहिए और खेत में आग लगाने के दुष्परिणामों से किसानों को अवगत कराना चाहिए। जिससे किसान खेत में आग न लगाएं। वहीं दूसरी ओर क्षेत्रवासी धुंए के प्रदूषण से बच सकें।

Posted By: Jitendra Richhariya

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