Benefits of Fasting: जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हमारे देश में व्रत या उपवास रखना समाज के अहम कार्यों में से एक माना जाता है। भारतीय परंपराओं के रूप में यह हमारी संस्कृति और संस्कार में शामिल है। इसका ऐतिहासिक महत्व हमारे यहां हजारों वर्ष पुराना है। वहीं बाहर के देशों के वैज्ञानिकों ने भी हमारी इस संस्कृति को वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्वीकार कर लिया है कि व्रत हमारे लिए उतना ही जरूरी है, जितना शरीर के लिए भोजन। इसे रखना सेहतमंद माना गया है। हमारे देश में व्रत रखने का संबंध भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति से जोड़ कर देखा जाता रहा है। इनका सिर्फ धार्मिक महत्त्व ही नहीं है, बल्कि शारीरिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। व्रत करने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के लाभ हासिल होते हैं। यह एक आध्यात्मिक औषधि के रूप में है, जो मनुष्य को बाहर और अंदर दोनों से स्वस्थ रखने का काम करता है।

कम कर सकते हैं वजन

व्रत करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे वजन कम कर सकते हैं। अगर आपकी तोंद निकली हुई है, व्रतों के दौरान वेट लॉस कर सकते हैं। व्रत रखने से हमारे शरीर में मौजूद फैट एनर्जी में बदल जाता है, जिससे हमारा वजन कंट्रोल में रहता है। इसके अलावा व्रत के दौरान हम फास्ट फूड और जंक फूड जैसे चीजों से दूर बनाए रखते हैं, जो वेटलॉस में मददगार हो सकता है।

कंट्रोल में रहता है ब्लड प्रेशर

व्रत रखने से शरीर में मौजूद बैड कलेस्ट्रॉल का लेवल कम होता है और ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता है। जिसका सीधा असर हमारे दिल पर पड़ता है और हमारा दिल स्वस्थ रहता है।

पाचन तंत्र को आराम

शरीर के मेटाबॉल्जिम को मजबूत करने में व्रत रखना सबसे सरल तरीका माना जाता है, क्योंकि व्रत रखने से शरीर के पाचन तंत्र को आराम मिलता है। इससे पाचन तंत्र अपनी गति में सुधार ला पाता है और सुचारु रुप से काम कर पाता है।

डिप्रेशन और ब्रेन स्ट्रोक जैसे रोगों से बचाव

व्रत रखना मानसिक रुप से भी आपकी कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर पाता है। व्रत रखने से ब्रेन हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है, जो मस्तिष्क में मौजूद स्टेम सेल कोशिकाओं सक्रिय करती है और उन्हें न्यूरॉन्स में बदलने काम करती हैं, जिससे डिप्रेशन, ब्रेन स्ट्रोक और अन्य मानसिक बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

नष्ट हो जाते हैं हानिकारक बैक्टीरिया

व्रत करने से शरीर में कुछ अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि होती है, जो सिर्फ व्रत उपवास करने से ही उत्पन्न होते हैं। इसी तरह कुछ विशेष प्रकार के हानिकारक बैक्टिरिया के नष्ट होने की प्रक्रिया भी सिर्फ व्रत के समय ही होती है। व्रत उपवास करने से शरीर प्रकृति के अनुसार ढलने लगता है। स्वाभाविक रूप से भूख प्यास आदि लगने लगते हैं।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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