जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कड़कड़ाती सर्द रातों में गरीब जरूरतमंद आसमान के नीचे फुटपाथ पर रात गुजार रहे हैं। लेकिन नौकरशाह ऐसे हो गए हैं जिन्हें ठंड में ठिठुरते गरीब दिखाई नहीं हो रहे हैं। जबकि जिस चौराहे, फुटपाथ, दुकानों के सामने गरीब धरती को बिछौना और आसमान को चादर समझकर चंद कपड़ों में लिपटे रात गुजारते हैं उन्हीं रास्तों से शहर के जिम्मेदार, कर्णधार भी अपनी गाडि़यों से रोजाना गुजरते हैं। गरीबों को आश्रय देने के लिए रैन बसेरा तो बनाए गए हैं लेकिन ये भी खाली पड़े ही पड़े हैं। शहर के मालगोदाम चौराहे, हाईकोर्ट के सामने, कलेक्ट्रेट रोड, एसपी आफिस, इंदिरा मार्केट के अलावा तीन पत्ती चौराहा, बस स्टैंड के आस-पास के फुटपाथ पर बुधवार को भी गरीब रात में सोते दिखे।

रैनबसेरा अब भी बंद पड़े: नगर निगम, जिला प्रशासन की उदासीनता से शहर के बीचों बीच स्थित तीन पत्ती चौक स्थित रैनबसेरा जर्जर होने के कारण जहां दो वर्षों से बंद है वहीं सेठ गोकुलदास धर्मशाला रैन बसेरा अब भी खाली है। यहां गरीबों को आश्रय देने सुविधाएं तो बेहतर है लेकिन गरीब फिर भी नहीं ठहर पा रहे। नगर निगम का दलील है कि रात को उन्हें यहां लाया जाता है और सुबह वे चले जाते हैं। इसी तरह अंबेडकर चौक स्थित रैनबसेरा कब बंद कर दिया गया इसकी किसी को भनक ही नहीं लगी। इसी तरह रांझी में गरीबों को आश्रय देने के लिए रैन बसेरा तो बना दिया गया है लेकिन अभी तक इसे खोला नहीं गया है। बताया जाता है कि नगर निगम ने अभी तक इसे संचालित करने के लिए किसी संस्था को नियुक्त नहीं किया है।

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सीएम संजीदा, अफसर गंभीर नहीं: फुटपाथ पर रहने वालों के प्रति सीएम शिवराज सिंह चौहान संजीदा है। भोपाल में तो उन्होंने रैन बसेरों का निरीक्षण किया और व्यवस्थाएं भी देखी। लेकिन जबलपुर में अफसर गरीबों के प्रति गंभीर नजर नहीं आते। कभी कभार नगर निगम द्वारा वाहनों के माध्यम से दो-चार गरीबों को सेठ गोकुलदास धर्मशाला या फिर तिलवारा रैन बसेरा तो छोड़ आता है लेकिन दोबारा उनकी सुध नहीं लेता। यहीं कारण है कि शहर के फुटपाथों गरीबों से खाली नहीं हो पा रहे।

Posted By: Ravindra Suhane

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