जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि । इंसान का नैसर्गिक गुण ही मुस्कुराना है, लेकिन जीवन की झंझावतों में वह अपने मूल गुण से ही भटक जाता है। कई बार ईश्वर के दिए इस प्रसाद को खो भी देता है, इसके बाद संकटों में घिरता चला जाता है। मुस्कुराना ही मनुष्य का मूल स्वभाव है। यह संदेश नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय कारागार (सेंट्रल जेल) में नौ दिवसीय आर्ट आफ लिविंग के प्रिजन स्मार्ट शिविर में गूंजा।

आजादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में बंदियों को जीवन जीने की कला और आध्यात्म से आदर्श जीवन की राह दिखाई गई। शिविर के समापन पर बंदियों ने अनुभव साझा किए। शिविर के समापन पर जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने बताया कि कैदियों ने शिविर में नित नए अनुभव लिए। सुदर्शन क्रिया के साथ सांसों पर नियंत्रण और ध्यान की जो क्रियाएं उन्हें सीखने मिलीं, जिसके बाद सकारात्मक विचार और जीवन के प्रति नजरिया बदला है।

तीन खंड में हुआ शिविर-

जेल के तीन खंडों में 150 महिला व पुरुष बंदियों के लिए शिविर आयोजित किया गया। संस्था के प्रशिक्षक ऋतु राज असाटी, अरुणा सरीन, नवीन बरसैयां, विजय अग्निहोत्री, महिला खंड में दीपा मूरजानी, प्रीती प्यासी, सरिता चौकसे और पद्मश्री करुणा मुदगल ने योग, ध्यान, प्राणायाम और सुदर्शन क्रिया का प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षक असाटी ने बताया कि गुरु श्री श्री रविशंकर जी की प्रेरणा से आर्ट आफ लिविंग का यह शिविर 20 वर्षों से प्रदेश की जेलों में आयोजित किया जा रहा है।

बंदियों ने साझा किए अनुभव-

- इस शिविर के बाद बहुत ही हल्का महसूस कर रहा हूं। मानसिक रूप से बहुत की सकारात्मक हो गया हूं। समझ में आ गया है कि गुरुकृपा क्या होती है, ध्यान और साधना का हमारे जीवन में कितना गहरा महत्व है।

-बिट्टू नामदेव

-खुशी को कहीं नहीं, अपने अंदर की तलाश करना है, ये सूत्र मुझे शिविर में सीखने मिला है। शिविर में नियमितता के बाद मेंरे जीवन में बहुत बदलाव आया है, जो बहुत की चमत्कारी है।

-रोशन कुमार चौधरी

-जीने की कला का जो पाठ मैंने पढ़ा, उसके बाद खुद में बहुत परिवर्तन महसूस किया है। मैं आगे भी नियमित क्रियाओं को करते हुए अपने जीवर को ऊर्जावान और सकात्मक बनाकर आगे बढ़ूंगा।

-सुनील सोनी

Posted By: tarunendra chauhan

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close