जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सालभर पहले कोरोना का वो समय तो याद होगा जब हर दूसरा-तीसरा व्यक्ति आक्सीजन के लिए दौड़ रहा था। आक्सीजन सिलिंडर की मारामारी मची हुई थी। उस वक्त हर किसी को स्वच्छ हवा की अहमियत समझ में आई थी। जबलपुर को प्रकृति ने ऐसे कई स्थल दिए हैं, जहां पहले स्वच्छ हवा की भरमार थी, लेकिन जमीन पर कब्जे की ललक ने हरियाली को खत्म कर कंक्रीट के जंगल खड़े कर दिए। इनमें से एक मदन महल की पहाड़ी है। यहां करीब तीन साल पहले कंक्रीट का जंगल था। सड़क, चट्टानों पर मकान, दुकान सब थीं। पहाड़ी पर चट्टानें और उस पर बने निर्माण भी नजर आते थे। बाद में हाई कोर्ट के दखल से पहाड़ी को कब्जामुक्त किया गया। करीब 60 एकड़ जमीन खाली हुई। इसके 51 एकड़ जमीन पर 36 हजार पौधे रोपे गए। अब पहाड़ी पर एक बार फिर हरियाली चादर नजर आने लगी है। पर्यावरणविदों का मानना है कि आने वाले एक दशक में शहर में यह पहाड़ी आक्सीजन का बड़ा टैंक होगी। पहाड़ी की शुद्ध हवा फेफड़ों को जवां कर देगी।

2019 में हाई कोर्ट के निर्देश पर अतिक्रमण हटाए गए थे। उस वक्त 24 एकड़ में करीब 600 से ज्यादा निर्माण थे जिन्हें अलग किया गया। बाद में नगर निगम ने खाली जमीन को हराभरा बनाने के लिए मप्र राज्य वन अनुसंधान केंद्र को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया। पर्यावरण विशेषज्ञों की मदद से पहाड़ी पर अलग-अलग तरीके से पौधे लगाए गए। यहां से पत्थर, मलवे को हटाकर बाहर से मिट्टी, खाद लाकर जमीन तैयार की गई। सबसे पहले खाली हुए 24 एकड़ जमीन को 24 भाग में बांटकर पौधे लगाए गए। पहले चरण में 20600 पौधे लगाए गए। वर्तमान में स्मार्ट सिटी इस पहाड़ी को सहेजने का काम कर रही है।

फल उद्यान बनाया-

स्मार्ट सिटी के पर्यावरण प्रभारी और प्रोजेक्ट मैनेजर केएल कावरे ने बताया कि बदनपुर पहाड़ी के 20 एकड़ क्षेत्र में फल उद्यान विकसित किया गया है। इस क्षेत्र के परंपरागत फल सीताफल, आंवला, जामुन, मुनगा, बेल, जामुन आदि को लगाया गया है। ऐसे 12 हजार पौधे लगाए गए हैं। उनके अनुसार पहाड़ी के तेजी से हराभरा बनने के पीछे ड्रिप इरीग्रेशन तकनीक काम आई। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास की राशि खर्च हुई है।

1500 एकड़ का इलाका-

प्रोजेक्ट मैनेजर केएल कावरे की माने तो मदन महल की पहाड़ी का पूरा इलाका अलग-अलग विभागों में बंटा हुआ है। ये करीब 1500 एकड़ भूमि है। उनके अनुसार औसतन एक परिपक्व वृक्ष 260 पाउंउ आक्सीजन प्रति वर्ष पैदा करता है। दो परिपक्व वृक्ष चार व्यक्तियों के लिये पर्याप्त आक्सीजन देता है। चौहानी, सूपाताल, बदनपुर इलाके में लगभग 36 हजार पौधे लगाए गए हैं जो अगले 15 साल में परिपक्व होकर प्रतिवर्ष करीब 94 लाख पाउंड आक्सीजन पैदा करेंगे। 80 हजार किलो फल देंगे, साथ ही 10,00,000 लीटर पानी से भू जल स्तर को बढ़ाएंगे। राज्य वन अनुसंधान परिषद के विज्ञानी डा.उदय होमकर ने बताया कि यह पहाड़ी आक्सीजन का बड़ा केंद्र बन चुकी है। आने वाले समय में यह और बेहतर रमणीक स्थल में तब्दील हो जाएगी।

Posted By: tarunendra chauhan

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