जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दूध के दाम में मनमानी वृद्धि के रवैये को चुनौती को गंभीरता से लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इसके बावजूद राज्य की ओर से गंभीरता नदारद है। इसे लेकर उपभोक्ता मंच जनांदोलन की रणनीति बना रहा है। शीघ्र जमीनी संघर्ष शुरू होगा। इसके लिए रविवार को कॉफी हाउस में बैठक हुई। इसमें दूध के दाम नियंत्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व जस्टिस राजीव कुमार दुबे की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के प्रांताध्यक्ष डॉ.पीजी नाजपांडे व डॉ.एमए खान की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा था। उन्होंने दलील दी थी कि नियमानुसार राज्य शासन को न केवल दूध का रेट निर्धारित करना चाहिए बल्कि उसकी मॉनीटरिंग भी करनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। 13 अप्रैल, 2007 को स्वयं राज्य शासन ने इस संबंध में व्यवस्था दी थी। इसके बावजूद अपने ही निर्णय को अमलीजामा पहनाने में शासन कमजोर साबित हो रहा है। इससे आम जनता महंगा दूध खरीदने विवश है।

मनमाने तरीके से तीन रुपये बढ़ा दिए गए दाम : अधिवक्ता उपाध्याय ने कोर्ट को अवगत कराया था कि जबलपुर के दूध विक्रेताओं ने मनमाने तरीके से तीन रुपये का इजाफा करते हुए दूध 55 से 56 रुपये लीटर बेचना शुरू कर दिया है। इस दाम के बोर्ड लटका दिए गए हैं। फलस्वरूप जनता लुटने मजबूर है। मंडला, दमोह, नरसिंहपुर, अनूपपुर, बालाघाट, उमरिया, शहडोल, कटनी, सिवनी जिलों की तुलना में जबलपुर में दूध का दाम बहुत अधिक है। ऐसे में मॉनीटरिंग शासन-प्रशासन का कर्त्तव्य है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।

Posted By: Ravindra Suhane

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