मनोज कुमार दीक्षित, जबलपुर। आदिवासी जन नायक टंट्या भील की गौरव गाथाओं की गूंज इन दिनों मध्य प्रदेश में बुलंद है। तमाम शासकीय आयोजनों के जरिए भारतीय संग्राम के इस वीर सपूत की शहादत और संघर्ष को याद किया जा रहा है। इसी बीच यह खबर हैरान करने वाली हो सकती है कि वीर सपूत की शहादत स्थली जबलपुर में उनके बलिदान के नामो निशां तक मौजूद नहीं हैं। 132 वर्ष पहले 4 दिसंबर 1889 को उन्हें जबलपुर के केंद्रीय कारागार (अब नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार) में फांसी दे दी गई थी। फांसी उपरांत उनके मृत शरीर को पतालपानी (खंडवा) के कालाकुंड रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था, ताकि अंग्रेजों की दहश्ात और सर्वोधाता बनी रहे।

टंट्या भील की शहादत स्थली को देखने के लिए जब शुक्रवार को नईदुनिया टीम जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस केंद्रीय कारागार पहुंची तो उनके बलिदान के कोई दस्तावेज या यादों संबंधी निशानी नहीं मिली। जबलपुर के इतिहासकार डॉ. आनंद सिंह राणा बताते हैं कि जन नायक ने अंग्रेजी शासन को ध्वस्त करने के लिए 12 वर्षों में 24 युद्ध लड़े और अपराजेय रहे। महारथी टंट्या महिला शक्ति के संरक्षक थे, इसलिए वे मामा भी कहलाए। अपने जीवन काल में वे अन्याय के खिलाफ हमेशा लड़ते रहे। जबलपुर के केंद्रीय कारागार में उन्हें फांसी दी गई।

तोड़ी ताड़ो जेल सलाखा, फांद गयो दीवार।

मार छलांग उड़यो हवा में, भैरव का अवतार।

मालवा में जन्मे पूरे देश में फैला शौर्य

इतिहासकारों के अनुसार जन नायक का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बड़दा गांव में 26 जनवरी 1840 को श्रीयुत भाऊ के घर में हुआ था। मध्य प्रदेश सरकार ने उनके शौर्य और बलिदान को अक्षुण्य बनाए रखने के लिए शहीद स्थली से गौरव कलश यात्रा भी शुरू की है। जबलपुर के प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव समेत जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में 25 नवंबर को शहादत स्थली जबलपुुर जेल से पवित्र मिट्टी से भरा कलश लेकर उनकी जन्मस्थली खंडवा रवाना हुए। इस पवित्र कलश यात्रा का आदिवासी क्षेत्रों में भ्रमण कराने के उपरांत आज इंदौर में समापन होगा।

लिखित अभिलेख या निशानी मौजूद नहीं

नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार के अधीक्षक अखिलेश तोमर बताते हैं कि टंट्या भील को फांसी दिए जाने संबंधित लिखित अभिलेख या निशानी जेल में मौजूद नहीं है। हर स्तर पर जानकारी लेकर अभिलेखों को तलाशा गया पर अब तक कोई औपचारिक प्रतीक चिन्ह या निशानी नहीं मिल सकी है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों के दिशा-निर्देश अनुसार ही काम किया जा रहा है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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