Jabalpur News : जबलपुर ( नईदुनिया प्रतिनिधि)। बिजली के दाम बढ़ाने के लिए बिजली कंपनियों ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष जो रिपोर्ट पेश की है उस पर सवाल खड़े हो गए हैं। बिजली विभाग की इस कार्ययोजना पर सवाल खड़े करते हुए नागरिक उपभोक्ता मंच ने बताया कि एक तरफ बिजली कंपनियों ने नियामक आयोग को प्रस्तुत अपनी राजस्व रिपोर्ट में स्वयं स्वीकारा है। वर्ष 2023 -24 में जो सरप्लस बिजली होगी। उसमें तीन हजार करोड़ की बिजली न तो उपयोग में लाई जा सकेंगी न ही बेची जा सकेगी। वहीं दूसरी तरफ बिजली कंपनियों ने अपनी इसी रिपोर्ट में 1500 करोड़ का घाटा बताकर लगभग चार प्रतिशत से बिजली रेट बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

मंच के डा पीजी नाजपांडे ने बताया कि इस बिजली कंपनियों की रिपोर्ट के मुताबिक नियामक आयेाग को इस विरोधाभास पर स्वंय संज्ञान लेते हुए बिजली कंपनियों को ये निर्देश देना था कि 1500 करोड़ घाटे की पूर्ति के लिए बिना उपयोग की तीन हजार करोड़ की बिजली न तो अन्य कंपनियां खरीदे न ही उसे उत्पादित करें। ऐसा करने से घाटे की पूर्ति हो जाती तथा बिजली के रेट बढ़ाने की नौबत नहीं आती। जनसुनवाई पर लाखों रुपये खर्च न होते।

31 जनवरी को आंदोलन-

मंच के डा पीजी नाजपांडे ने बताया कि बिजली कंपनियों की इस कार्ययोजना के विरोध में और बिजली के दाम न बढ़ाये जाने की मांग को लेकर 31 जनवरी को आंदोलन किया जाएगा। ये जनता के साथ अन्याय है। ये निर्णय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन. पेंशनर समाज, सीनियर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन, महिला संगठन, पेंशनर्स संघ तथा किसान समिति के पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया है। इस अवसर पर रजत भार्गव, आरएस तिवारी, डीपी दुबे, सुशीला कनौजिया, सुभाष चंद्रा एचपी उरमलिया. मनीष शर्मा, राजेश गिरदानिया, डीआर लखेरा आदि उपस्थित रहे।

Posted By: Jitendra Richhariya

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