अतुल शुक्ला, जबलपुर। पटरी पर ट्रेनों को सुरक्षित दौड़ने के लिए रेलवे ने संरक्षा से जुड़े कई कदम उठाए, लेकिन यह कदम अब नाकाफी साबित हो रहे हैं। रेलवे के लिए निजी कंपनियों की मालगाड़ियों को दुर्घटना से रोकना चुनौती बन गया है। दरअसल हाल ही में निजी कंपनी की मालगाड़ी में ब्रेक फेल होने के मामले सामने आने के बाद रेलवे की जांच में कई खामी मिली, जिसके बाद इन ट्रेनों की रफ्तार कम कर दिया है। पश्चिम मध्य रेलवे की सीमा में कोयला ढुलाई में लगे निजी कंपनी के रैक की रफ्तार को 50 किमी प्रति घंटे से अधिक चलाने पर रेलवे ने रोक लगा दी है। वहीं शेष मालगाड़ी अपने औसत रफ्तार 60 किमी प्रति घंटे पर ही चलेंगी। सूत्रों के मुताबिक जिन मालगाड़ी के रैक में खामी मिली, उन्हें गोसलपुर में निजी कंपनी द्वारा तैयार किया गया था।

ब्रेक लगाने के बाद भी नहीं रुकी

जबलपुर रेल मंडल के मालगाड़ी ड्राइवर द्वारा निजी कंपनी के रैक का इस्तेमाल कोयला ढुलाई में किया जा रहा है। कुछ माह पूर्व एक के बाद एक कर कई ऐसे मामले सामने आए, जिसमें निजी कंपनी के रैक का ब्रेक फेल हो गए। रेलवे के ड्राइवरों ने जांच टीम को बताया कि निर्धारित गति से ट्रेन चलाने के बाद ब्रेक लगाया गया, लेकिन कई किमी तक ट्रेन नहीं रुकी। इस दौरान कोई बड़ी दुर्घटना तो नहीं हुई, लेकिन सिग्नल पार कर जाने के बाद रेलवे ने उल्टे ड्राइवर पर कार्रवाई की। इधर इन रैक को भी खड़ा करा दिया गया। लखनऊ से आई रेलवे की जांच टीम ने इन रैक को चलाकर जांच की। इस दौरान इनके ब्रेक सिस्टम में खराबी मिली।

पहले खड़े किए, फिर दौड़ दिए

निजी कंपनी की मालगाड़ी में ब्रेक न लगने के बाद इनके सभी चार रैक को खड़ा कर दिया गया। जांच टीम की रिपोर्ट के बाद इन्हें नहीं चलाया गया। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक रेलवे पर निजी कंपनी ने रैक चलाने का दबाव बनाया। वहीं दूसरी ओर रेलवे के ड्राइवर और यूनियन ने इसका विरोध किया। साथ ही निजी कंपनी के रैक चलाने से मना कर दिया। रेलवे के आपरेटिंग विभाग ने इन रैक की औसम गति को 60 से घटाकर 50 किमी प्रति घंटे पर कर दिया, ताकि दुर्घटनाओं को समय रहते नियंत्रित किए जा सके। हालांकि, गति कम करने के बाद भी कई ड्राइवर इस रैक को चलाने से पीछे हट रहे हैं।

खामी दूर, फिर भी डर

कंपनी के इन रैक में लगे ब्रेक को तकनीकी तौर पर बदला गया है, जिससे ब्रेक के दौरान बनने वाले दबाव में खामी आ रही है। यही वजह है कि कई बाद ब्रेक लगता है तो कई बार नहीं। इधर, रेलवे ने निजी कंपनी से यह रैक लिए, ताकि बड़ी मात्रा में प्लांट को जरूरी कोयला पहुंचा सके और बदले में कंपनी को किराए के अलावा कई रियायत दी गई। इन दिनों रेलवे अपनी मालगाड़ी के साथ निजी कंपनियों की मालगाड़ी चलाने पर खास जोर दे रहा है।

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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