जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मालवीय चौक से कोतवाली थाना के बीच हर गली से हाथों में झंडा लिए बाइक सवारों की फौज आती रही। इसी तरह शहर की तमाम सड़कों पर बाइक में सवार कार्यकर्ता नजर आए। एसडीएम, तहसीलदार से लेकर थाना प्रभारी एक रैली के पीछे चले तो दूसरी जगह से वाहनों की भीड़ आ रही थी। किसी भी अधिकारी को यह समझ नहीं आया कि कहां नजर रखें और किसके पीछे जाए।

प्रशासनिक स्तर से वाहन रैली की परमिशन जारी नहीं की गई। फिर बिना परमिशन के रैली निकालने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा सकी। चौराहों-तिराहों पर जाम के हालात बने। जिसे रोक पाने में पुलिस व प्रशासन नाकाम रहा।

भीड़ बढ़ती गई, रास्ते बंद होते गए-

- सुबह 11 बजे के बाद मालवीय चौक जाने वाले सभी रास्तों को पुलिस ने बैरीकेड लगाकर बंद कर दिया।

- गोलबाजार से मालवीय चौक, तीन पत्ती से मालवीय चौक, बड़ा फुहारा से मालवीय चौक का रास्ता बंद कर दिया गया। जिससे लोगों को कई किलोमीटर घूमकर दूसरे रास्ते से जाना पड़ा।

- दोपहर 1 बजे वाहन रैली और कार्यकर्ताओं की भीड़ देखकर रसल चौक, नौदराब्रिज से क्राइस्ट चर्च स्कूल वाले मार्ग को भी बंद कर दिया।

- घंटाघर से कलेक्ट्रेट जाने वाला मार्ग भी ब्लॉक कर दिया गया।

- हाइकोर्ट के चारों तरफ के मार्ग को बड़े वाहनों की आवाजाही के लिए बंद करना पड़ा। क्योंकि तहसील चौक पर दोपहर 2 बजे के बाद कार्यकर्ताओं व प्रदर्शन करने वाले जमा हो चुके थे।

दोपहर 12 बजे अलर्ट हुए अफसर-

- ग्वालियर और मुरैना में हुई हिंसा की खबर तेजी से जिला प्रशासन के अधिकारियों तक पहुंची। दोपहर 12 बजे अपर कलेक्टर छोटे सिंह ने सभी एसडीएम व तहसीलदारों को फील्ड में जाने के निर्देश दिए। तब तक पुलिस विभाग सक्रिय हो चुका था।

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