जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मुख्यमंत्री जनसेवा अभियान के दौरान योजनाओं का लाभ दिलाने के मामले में गांवों ने शहर को पछाड़ दिया है। शहरी क्षेत्रों में पंजीयन कम कराए गए, वहीं आवेदनों के निपटान में भी शहरों का प्रदर्शन दयनीय रहा। ग्रामीण क्षेत्रों से 87,819 आवेदन आए जबकि शहरी क्षेत्रों में केवल 12021 आवेदन जमा हुए।

प्रधानमंत्री के जन्मदिन से प्रदेश में मुख्यमंत्री जनसेवा पखवाड़ा का आयोजन किया गया। इस दौरान गांवों और शहरों में लोगों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने शिविर लगाए गए। इन शिविरों में आयुष्मान योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, स्वरोजगार के लिए ऋण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, स्वच्छ भारत मिशन, किसान क्रेडिट कार्ड, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना जैसी तीस से ज्यादा योजनाओं को लेकर समस्या समाधान शिविर लगवाए गए। शहरी क्षेत्र में अफसरों और कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है। बावजूद इसके शहरी क्षेत्र में न तो अधिक संख्या में शिविर आयोजित हुए और न ही बहुत ज्यादा आवेदन जमा कराए।

कहां से आए कितने आवेदन

ग्रामीण इलाकों में जनसेवा पखवाड़ा के अंतर्गत 479 पंचायतों में शिविर लगे, जिनमें कुल 87,819 आवेदन आए। इन आवेदनों में से 34,320 को मंजूरी प्रदान कर दी गई। 4335 अस्वीकृत कर दिए गए, जबकि 49,164 आवेदन अभी लंबित हैं। इसके विपरीत शहरी क्षेत्रों में 157 शिविर ही लगाए जा सके। ये शिविर नगर निगम जबलपुर सहित नगर पालिका सिहोरा व पनागर एवं नगर परिषद मझौली, पाटन, कटंगी, शहपुरा, भेड़ाघाट व बरेला में लगाए गए। इन नौ स्थानों से कुल 12021 आवेदन जमा कराए गए। इनमें से 3750 को स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि 108 अस्वीकृत कर दिए गए। शहरी क्षेत्रों में लंबित आवेदनों की संख्या 8163 रही।

इन योजनाओं के अधिक आवेदन

इन शिविरों के दौरान सर्वाधिक आवेदन आयुष्मान योजना के संबंधित रहे। इनकी संख्या लगभग 50 प्रतिशत रही। इनके स्वच्छ भारत मिशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना और वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदन भी रहे।

नगरीय निकायों में स्थिति

शहरी क्षेत्र के निकायों की बात करें तो नगर निगम क्षेत्र में 8878, सिहोरा नगरपालिका में 659, पनागर नगरपालिका में 171, कटंगी नगर परिषद में 1055, बरेला में 646, पाटन में 227, भेड़ाघाट में 171, मझौली में 168 और शहपुरा में 68 आवेदन जमा करा जा सके।

आवेदनों के निपटान की स्थिति

ग्रामीण क्षेत्रों में कुल आवेदन के 39 प्रतिशत स्वीकृत की पांच प्रतिशत का निराकरण भी कर दिया गया। जबकि 56 प्रतिशत लंबित हैं। जबकि शहरी क्षेत्र में 31 प्रतिशत स्वीकृत हुए और निपटारे का प्रतिशत एक रहा। यहां 68 प्रतिशत आवेदन लंबित हैं।

Posted By: Jitendra Richhariya

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