जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। प्रदेश के एक लाख से अधिक वकीलों का पंजीयन करने वाली संस्था एमपी स्टेट बार कौंसिल के चेयरमैन पद पर इंदौर के अधिवक्ता विवेक सिंह को चुन लिया गया है। रविवार को स्टेट बार सामान्य सभा की बैठक में बहुमत से उनका निर्वाचन हुआ। वे विगत 24 वर्ष से वकालत के व्यवसाय में हैं।

दरअसल, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में पैरवी करने वाला कोई अधिवक्ता 40 वर्ष बाद इस महत्वपूर्ण पद पर आसीन हुआ है। नव निर्वाचित स्टेट बार चेयरमैन अधिवक्ता विवेक सिंह वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. जय सिंह के पुत्र हैं, जो 20 वर्ष तक स्टेट बार सदस्य रहे हैं। साथ ही स्टेट बार की विभिन्न कमेटियों में पदाधिकारी के आलावा बार कौंसिल आफ इंडिया में स्टेट बार प्रतिनिधि भी रहे हैं।

इस तरह हुआ निर्वाचन :

रविवार को जैसे ही स्टेट बार सामान्य सभा की बैठक शुरु हुई इंदौर के अधिवक्ता सुनील गुप्ता ने चेयरमैन पद के लिए अधिवक्ता विवेक सिंह के नाम का प्रस्ताव रखा। स्टेट बार के 16 सदस्याें ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसी के साथ विवेक सिंह स्टेट बार के नये चेयरमैन निर्वाचित हो गए।

पूर्व चेयरमैन डा. विजय चौधरी ने कार्यकाल समाप्त होते ही सम्पन्न कराई प्रक्रिया :

स्टेट बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन भोपाल निवासी अधिवक्ता डा. विजय कुमार चौधरी ने अपना कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही नियमानुसार सामान्य सभा की बैठक बुलाई। इसके जरिये नये चेयरमैन के निर्वाचन की प्रक्रिया पूर्ण कराई।

आरके सिंह सैनी पुन: चुने गए वाइस चेयरमैन :

स्टेट बार के पूर्व वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी को पुन: वाइस चेयरमैन चुन लिया गया। इसके अलावा उन्हें सात कमेटियों में भी महत्वपूर्ण पदों पर निर्वाचित किया गया है। अधिवक्ता सैनी जिला बार एसोसिएशन, जबलपुर के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने पूर्व चेयरमैन डा. चौधरी व नव निर्वाचित चेयरमैन विवेक सिंह का स्वागत किया। इस दाैरान विवेक सिंह को समर्थन देने वाले स्टेट बार सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त, मनीष तिवारी, राधेलाल गुप्ता, जगन्नाथ त्रिपाठी, राजेश पांडे, दिनेश नारायण पाठक, शिवेंद्र उपाध्याय, जेपी मिश्रा, प्रेम सिंह भदौरिया, राजेश शुक्ला, जितेंद्र शर्मा, सुनील गुप्ता व राजेश व्यास सहित अन्य मौजूद रहे।

प्रदेश के अधिवक्ताओं का कल्याण मूल संकल्प :

नव निर्वाचित स्टेट बार चेयरमैन विवेक सिंह ने कहा कि प्रदेश के अधिवक्ताओं का कल्याण उनका मूल संकल्प है। इसी मंशा से वे स्टेट बार की राजनीति में आए थे। समर्थक सदस्यों ने जो भरोसा जताया है, उसकी कसौटी पर खरा उतरने कोई कोर-कसर शेष नहीं रखी जाएगी। मृत्यु दावा व चिकित्सा सहायता राशि में अभिवृद्धि, अधिवक्ता स्वास्थ्य बीमा, एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू कराने सहित राज्य के अधिवक्ताओं की जो भी जायज मांगें हैं, उन्हेंपूरा कराने की दिशा में प्राणपण से सचेष्ट रहूंगा।

हाई कोर्ट ने बैंक मैनेजर की बर्खास्तगी पर मांगा जवाब

जबलपुर।हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कैनरा बैंक, सिवनी के बर्खास्त मैनेजर मणिराज पटेल की याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नर्मदा प्रसाद चौधरी व अमित चौधरी ने पख रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता को शिकायत के आधार पर समुचित जांच प्रक्रिया पूर्ण किए बिना बर्खास्त कर दिया गया। महज दो-तीन घंटे के भीतर विभागीय जांच पूरी करने का नाटक रचकर बर्खास्त किया जाना जांच के दायरे में है। साथ ही याचिकाकर्ता की सेवा भी गौर करने लायक है, जिसके अंतर्गत उसने निर्धारित लक्ष्यों को सदैव समय-सीमा के भीतर पूर्ण करके प्रतिमान दर्ज किया था। हाई कोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद कैनरा बैंक के आला अधिकारियों से जवाब मांग लिया। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।

Posted By: Jitendra Richhariya

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