Madhya Pradesh High Court जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से व्यापमं के आरोपित अंबरीश शर्मा को चौथी बार झटका लगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने विदेश जाने की अनुमति देने से इन्कार करते हुए अर्जी खारिज कर दी।

आवेदक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त व अधिवक्ता याज्ञवल्क शुक्ला ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि आवेदक को सीबीआइ द्वारा व्यापमं घोटाले में आरोपित बनाया गया था। पूर्व में जमानत अर्जी दायर की गई थी। हाई कोर्ट ने जमानत आवेदन कुछ शर्तों के साथ मंजूर किया था।

उनमें से एक शर्त विदेश जाने पर रोक से संबंधित थी। 31 अगस्त, 2018 को लगाई गई उक्त शर्त को शिथिल किए जाने की मांग के साथ आवेदक पूर्व में तीन बार हाई कोर्ट आ चुका है। यह चौथी अर्जी है। इस बार भी उसकी मांग पूर्ववत है।

उसे अपने बेटे के यूएसए के विश्वविद्यालय में दाखिले और वहां निवास आदि के सिलसिले में समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने जाना है। लेकिन जमानत अर्जी स्वीकृत करते समय लगाई गई शर्त के कारण वह विदेश नहीं जा सकता। कोविड-19 का खतरा वैश्विक है, अत: पुत्र को अकेले विदेश भेजना उचित नहीं होगा। पिता को पुत्र की सुरक्षा के मद्देनजर अनुमति दी जानी चाहिए।

सीबीआइ की ओर से भारत के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल जिनेंद्र कुमार जैन ने उक्त मांग का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि व्यापमं का मामला अत्यंत गंभीर है। हाई कोर्ट ने जमानत का लाभ देते समय जो शर्त लगाई थीं, वे अति आवश्यक थीं। इन्हीं के तहत पासपोर्ट जप्त बराया गया था।

आवेदक के खिलाफ पीएमटी-2012 में गड़बड़ी का गंभीर आरोप लगा था। पुलिस स्टेशन स्पेशल टास्क फोर्स, भोपाल में 30 अक्टूबर, 2013 को अपराध पंजीबद्ध किया गया था। फिलहाल, विशेष अदालत के समक्ष चार्जशीट और ट्रायल सहित अन्य प्रक्रिया लंबित है। लिहाजा, विदेश जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

Posted By: Sunil Dahiya

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