Jabalpur News: जबलपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। बेरोजगारी से जूझ रहे प्रदेश के 1200 वेटरनरी डॉक्टरों के सामने कोरोनाकाल ने संकट और भी बढ़ा दिया है। एक साल पहले बेरोजगार विद्यार्थियों ने पशुपालन विभाग में वेटरनरी डॉक्टर बनने के लिए भोपाल से जबलपुर तक प्रदर्शन किया था। 20 दिनों तक भूख हड़ताल भी की। तत्कालीन प्रदेश सरकार के आश्वासन के बाद प्रदर्शन खत्म हुआ।

अब एक साल होने को है पर मांग तो दूर प्रस्ताव पर भी चर्चा नहीं हुई। नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय के स्नातक विद्यार्थी वेटरनरी के पदों के भरने के इंतजार में एक साल से जबलपुर-भोपाल के चक्कर लगा रहे हैं। प्रदेश सरकार बदलने के बाद उनकी मांगें पूरी होने की उम्मीद बढ़ी थी पर अब तक कुछ नहीं हो सका है। अब बेरोजगार स्नातक एक बार फिर सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

सात हजार की जरूरत 16 सौ डॉक्टर

प्रदेश में पशुओं की संख्या अन्य प्रदेश से ज्यादा है। यहां तक की दूध उत्पादन में भी प्रदेश दूसरे नंबर पर है। मौजूदा समय में पशुओं के इलाज के लिए भी पशुपालन विभाग के पास पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं। हालात यह है कि वर्तमान में सात हजार वेटरनरी डॉक्टर की जरूरत है, काम सिर्फ 1600 से ही लिया जा रहा है। नए डॉक्टर्स की भर्ती के लिए वेटरनरी स्नातक ही नहीं, बल्कि भारतीय पशु चिकित्सा संघ ने भी इस मांग को सरकार के समक्ष रखा था। अब तक मांग पूरी हुई न ही इस पर कोई चर्चा

प्रदेश में खुलनी हैं तीन हजार गोशाला

पशुपालन विभाग ने प्रदेश में तकरीबन तीन हजार गोशाला खोलने की तैयारी की है। पर्याप्त संख्या में वेटरनरी डॉक्टर भी पशुपालन विभाग के पास नहीं है। इधर, नौकरी की उम्मीद लगाए बेरोजगार वेटरनरी स्नातक अब जबलपुर से भोपाल तक प्रदर्शन करने एकजुट हो गए हैं। वेटरनरी छात्रों का कहना है कि इतनी संख्या में गोशाला खोली जा रही हैं, लेकिन इनमें रखे जाने वाली गायों के इलाज के लिए वेटरनरी डॉक्टर ही नहीं है। 20 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठने के बाद भी हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया है।

ऐसे हैं प्रदेश में हालात

1.प्रदेश में पशु चिकित्सकों के 3481 पद सृजन के प्रस्ताव को मंजूरी का इंतजार

2.7000 पदों के स्थान पर सिर्फ 1600 ही उपलब्ध हैं। 5 वर्षों से भर्ती नहीं

3.प्रदेश में 1200 से अधिक पशु चिकित्सक बेरोजगार घूम रहे हैं।

4.एक हजार गोशालाओं का निर्माण हो चुका है। इलाज के लिए डॉक्टर ही नहीं।

5.3,000 गोशालाओं का निर्माण प्रदेश में कराने का लक्ष्य। बिना वेटरनरी डॉक्टर के पूरा नहीं।

6.वेटरनरी डॉक्टर्स नहीं होने से केंद्र सरकार के राष्ट्रीय रोग उन्मूलन कार्यक्रमों की हालात खराब।

सरकार बदली पर मांग अब तक अधूरी

वेटरनरी कॉलेज के प्रवेश द्वार पर तकरीबन दो से तीन हजार विद्यार्थी सितंबर से अक्टूबर 2019 में हड़ताल पर थे। इन्हें मनाने के लिए मप्र से राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा आए थे। उस वक्त प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। मांग को पूरा करने के लिए समय-सीमा भी तय हुई, लेकिन सरकार बदल गई। भाजपा सरकार के वरिष्ठ नेताओं से वेटरनरी स्नातकों ने मुलाकात की। इसके बावजूद मांग पूरी नहीं हुई है।

फैल रही महामारी, इलाज के लिए डॉक्टर नहीं

वेटरनरी छात्र गोविंद चौधरी बताते हैं कि एक वर्ष के अंदर 11 राज्यों में व कोरोना काल के दौरान 6 राज्यों ( उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर) में पशु चिकित्सकों की भर्ती प्रक्रिया हो चुकी है। मध्यप्रदेश में अब तक कोई तैयारी भी नहीं है।

इनका कहना है

प्रदेश में 7 हजार में सिर्फ 16 सौ पद हैं। 12 सौ वेटरनरी स्नातक बेरोजगार हैं। पीएससी में 5 साल से वेटरनरी डॉक्टर की भर्ती नहीं निकली है। 3481 वेटरनरी डॉक्टर के पद सृजन करने का प्रस्ताव है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।

-नरेंद्र सिंह तोमर, उपाध्यक्ष, भारतीय पशु चिकित्सा संघ, मध्यप्रदेश

Posted By: Nai Dunia News Network

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