जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्वच्छता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बावजूद स्वच्छ सर्वेक्षण में जबलपुर का लगातार पिछड़ना जनप्रतिनिधियों को भी खल रहा है। इस संबंध में शहर के कांग्रेस और भाजपा के जनप्रतिनिधियों को टटोला गया तो उनका कहना था कि स्वच्छ सर्वेक्षण में जबलपुर भी इंदौर की तर्ज पर सफलता के सोपन तय कर सकता है। ये थोड़ा मुश्किल है पर नामुमकिन कतई नहीं। करना ये है कि स्वच्छता में हमेशा अव्वल आने वाले इंदौर के मुकाबले जबलपुर किन- किन बिंदुओं में पिछड़ा रहा है इसका गहन अध्ययन कर उन बिंदुओं पर चिंहित कर काम करना होगा। इसके लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा जो सुझाव दिए जाते हैं उन पर भी गंभीरता से अमल कर धरातल पर उतारना होगा। जनता में स्वच्छता के प्रति जागरूकता लाने और इंदौरियों की तरह सफाई की आदत डालने के लिए वार्ड पार्षदों को जनता और प्रशासनिक तंत्र के बीच सेतु का काम करना पड़ेगा। क्योंकि वार्ड पार्षद ही है जो जनता और प्रशासनिक व्यवस्था से सीधे जुड़े हुए हैं। इसके अलावा स्वच्छता के कार्यों की भी सघन और नियमित निगरानी भी जरूरी है। शहर के राज्य सभा सदस्य, क्षेत्रीय विधायकों का कहना है कि वे भी प्रशासन के साथ आगे आकर नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करेंगे। जबलपुर को स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में नए कीर्तिमान पर पहुंचाएंगे।

अपने निर्णय थोपते हैं अधिकारी-

जनप्रतिनिधियों का दर्द ये भी है कि शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने, स्वच्छ सर्वेक्षण के तय मानकों को पूरा कराने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होती है। श्रम और मौजूदा संसाधन और धन का किस तरह उपयोग किया जाए ये प्रशासनिक अधिकारी तय करते हैं। यदि शासन स्तर पर जबलपुर की अनदेखी की जा रही है या अन्य कोई कारण है तो उसके लिए जनप्रतिनिधियों से सलाह व सुझाव लिए जाने चाहिए, पर देखने में आ रहा है कि नगर निगम के अधिकारी अपने स्तर पर ही काम कर रहे हैंं, अपने निर्णय ही थोप रहे हैं। जनप्रतिनिधियों से न तो सलाह लेते हैं न उनके सुझाव पर अमल करते हैं। नतीजातन हर बार शहर की रैकिंग गिर रही है। विदित हो कि पिछले पांच वर्षों के आंकड़े पर गौर करें तो स्वच्छ सर्वेक्षण में 17 से 25वीं रैंक के इर्द-गिर्द रहा। वर्ष 2016 से शुरू सर्वेक्षण में आज तक जबलपुर शीर्ष 10 में भी जगह नहीं बना पाया है।

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क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि-

स्वच्छ सर्वेक्षण में जबलपुर का लगाताा पिछड़ना प्रशासनिक उदासीनता का दर्शाता है। ठेका प्रथा भी इसमें काफी हद तक जिम्मेदार है। सफाई को लेकर कार्यों की सघन और नियमित निगरानी जरूर है। ठेकेदार कहां कितने कामगारों को लगा रहे ये भी ईमानदारीसे देखा जाना चाहिए। यदि सभी काम ईमानदारी से होंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।-सुमित्रा बाल्किमिक, राज्य सभा सदस्य

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स्वच्छता की दिशा में किए जाने वाले कार्यों में प्लानिंग की कमी है। ये कार्य प्रशासनिक बाडी ही करती हैं। यदि बेहतर तरीके से प्लानिंग बनाई जाए और उसे बिंदुवार किया जाए तो काफी हद तक सफलता मिलेगी। इसके अलावा जबलपुर के नागरिकों में भी इंदौर की की तरह स्वप्रेरणा से स्वच्छता बनाए रखने का जूनुन होना चाहिए। जनप्रतिनिधियों को भी बड़ी सोच के साथ सहयोग करना चाहिए।-विवेक कृष्ण तन्खा, राज्य सभा सदस्य

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सफाई की व्यवस्था नगर निगम के अधिकारियों को ही बनानी हैं । जाे कमियां है उनमें सुधार किया जाना चाहिए। अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर सुझाव भी दिए जाते हैं उन्हें गंभीरता से लेते हुए अमल करना चाहिए। अपना पक्ष भी मजबूती से रखना चाहिए। स्वच्छता को लेकर यदि शासन स्तर पर बाधा आ रही उसे दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।- तरूण भानोत, पूर्व मंत्री व विधायक पश्चिम विधानसभा क्षेत्र

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जबलपुर इंदौर के मुकाबले अभी विकसित नहीं हुआ है नागरिकों में भी स्वच्छता को लेकर गंभीरता नही है। अधिकारियों की कार्ययोजना कागजों तक ही सिमटी रहती है उसे धरातल पर उतारा जाना चाहिए। स्वच्छता के नये कीर्तिमान हासिल करना मुश्किल नहीं है। यदि ठान लें तो कर सकते हैं। सभी जनप्रतिनिधियों को अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।- लखन घनघोरिया, पूर्व मंत्री व विधायक, पूर्व विधानसभा क्षेत्र

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जबलपुर को स्वच्छता में बेहतर मुकाम दिलाने का दायित्व सिर्फ नगर निगम का नही है बल्कि ये दायित्व हम सभी का है। नागरिकों को भी सहभागिता करनी होगी। इधर-उधर कचरा, गंदगी न फेंकने का संकल्प लेना होगा। इंदौर की तरह नागरिकों स्वंय प्रेरित होना पड़ेगा। जनता और अधिकारियों के बीच वार्ड पार्षदों को सेतु की तरह काम करना होगा। सभी अपना दायित्व निभाएंगे तो सफलता जरूर मिलेगी।-अशोक रोहाणी, विधायक, कैंट विधानसभा क्षेत्र

Posted By: Mukesh Vishwakarma

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