World AIDS Day 2020: राजीव उपाध्याय, जबलपुर। नईदुनिया। खून में एचआईवी वायरस है लेकिन वायरस के खून में प्रवेश होने से 90 दिन के पहले वह जांच में पकड़ में ही नहीं आता। यह बहुत खतरनाक स्थिति होती है। इस बीच यदि यह खून किसी को डेढ़ सप्ताह के पहले चढ़ा दिया तो वह मरीज एचआईवी से संक्रमित हो जाएगा। डेढ़ सप्ताह बाद भी यह नहीं कह सकते कि जांच में वायरस मिल जाएगा लेकिन एक संभावना हो सकती है कि वायरस दिखाई दे।

क्या है विंडो पीरियड

किसी भी वायरस का मरीज को संक्रमण होने से लेकर डायग्नोज तक का समय विंडो पीरियड होता है। एचआईवी वायरस में यह पीरियड 90 दिन का होता है। यदि इसके पहले जांच की जाती है तो रिपोर्ट निगेटिव आती है। इसका मतलब खून में वायरस नहीं दिखता। हलांकि कुछ आधुनिक मशीनों से जांच में यह पीरियड कम हो जाता है।

यह है आधुनिक जांच

- पीसीआर (पॉलीमर चेन रिएक्शन)

इस जांच में विंडो पीरियड 72 घंटे होता है। 72 घंटे में वायरस जांच में दिखता है।

- डीएनए या आरएनए वायरल लोड टेस्ट इसमें 24 से 36 घंटे का विंडो पीरियड होता है। यह टेस्ट महंगा है।

- एनएटी (न्यूक्लिक टेस्ट) जांच

मेडिकल कॉलेज से सेवानिवृत्त ब्लड बैंक के विभागाध्यक्ष डॉ. शरद जैन का कहना है कि एनएटी जांच में वायरस का विंडो पीरियड 7 दिन का होता है। सात दिन में ही वह जांच में दिखेगा। लेकिन यह जांच मध्य प्रदेश में नहीं होती, महानगरों में होती है।

अभी यह हो रहा है

- रेपिड एंटीजन टेस्ट किया जा रहा है।

- एलाइजा टेस्ट

इन टेस्ट में भी वायरस का विंडो पीरियड 90 दिन का होता है। जिसमें समय के पहले वह दिखाई नहीं देता।

ऐसा टेस्ट हो, जिसमें समस्या का निदान हो

एचआईवी का विंडो पीरियड 90 दिन का होता है। इस दौरान जांच में यह दिखाई नहीं देता। ऐसा खून किसी मरीज को चढ़ा दिया जाए तो वह संक्रमित हो सकता है। रक्तदान से लिया खून डेढ़ सप्ताह बाद फिर से जांच करके यदि किसी मरीज को चढ़ाया जाता है तो कुछ प्रतिशत ही संभावना है कि उसमें एंटीजन दिखाई देंगे। क्योंकि वह रक्त जीवित मनुष्य से निकालकर डेढ़ सप्ताह तक रखा था इसलिए उसमें एंटीजन के बढ़ने की संभावना कम होती है। इसलिए फिर भी सकारात्मक पक्ष को लेकर चल सकते हैं कि वायरस यदि हो तो दिख जाए। हालांकि ऐसा टेस्ट होना चाहिए जिसमें वायरस का विंडो पीरियड न हो वह जांच में दिखाई दे। जिससे संदिग्ध अवस्था की स्थिति खत्म हो जाए।

डॉ. संजय मिश्रा, पैथोलॉजिस्ट, एल्गिन महिला अस्पताल

रक्तदाता पूरी जानकारी दें

रक्तदाता के लिए यह जरूरी है कि रक्तदान के समय अपनी ट्रैवल हिस्ट्री, बीमारी के बारे में पूरी जानकारी दें। इससे विंडो पीरियड में वायरस मिस नहीं होगा।

डॉ. डीपी लोकवानी, पूर्व कुलपति मप्र मेडिकल यूनिवर्सिटी

बालाघाट संवेदनशील

मध्य प्रदेश में बालाघाट जिला अतिसंवेदनशील है। यह महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ की बार्डर है। इससे इन राज्यों से बालाघाट में मजदूरों का आना-जाना लगा रहता है। जागरूकता की कमी के कारण यह एचआईवी फैला रहे हैं। हालांकि इलाज के कारण कुल संख्या में कमी आ रही है लेकिन औसत इनकी संख्या बढ़ रही है।

पांच साल की स्थिति

वर्ष - मरीजों की संख्या

2015-16 - 113

2016- 17 - 104

2017- 18 - 94

2018- 19 - 99

2019- 20 - 86

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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