पेटलावद (नईदुनिया न्यूज)। आचार्य तुलसी ऐसे संत थे जिन्होंने अपने चरणों से धरती व चिंतन से आकाश को मापने का प्रयास किया। लाखों लोगों को जीने का गुर सिखाया। ये उद्गार श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अनुशास्ता मुनिश्री वर्धमान कुमार ने 27वें विकास महोत्सव पर तेरापंथ भवन में व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि करीब 27 वर्ष पूर्व आचार्यश्री तुलसी ने स्वेच्छा से अपने आचार्य पद का विसर्जन कर दिया तथा आगामी समय मे अपना पट्टोसव मनाने की भी सर्वथा मनाही कर दी। तब आचार्यश्री महाप्रज्ञजी ने युक्तिपूर्वक ढंग से आचार्यश्री तुलसी के शासनकाल के तेरापंथ धर्मसंघ के स्वर्णिम विकास अवदानों व मानव समाज के उत्थान से जुड़े महान कार्यों के आधार पर उनके पट्टोत्सव दिन भाद्रव शुक्ल 9 को धर्मसंघ में विकास महोत्सव के रूप में मनाने की शुरुआत की। तेरापंथ धर्मसंघ में महामना प्रथम आचार्यश्री भिक्षु ने संघ को अनुशासन, चतुर्थ आचार्य श्रीमज्जयाचार्य ने इसे सजा-संवारकर नया रूप प्रदान किया। आठवें आचार्यश्री कालूगणी ने धर्मसंघ में विद्या के बीजों का रोपण किया। संस्कृत प्राकृत की पढ़ाई के द्वार खोले। आचार्यश्री तुलसी का शासनकाल विकास का स्वर्णिमकाल रहा। वर्तमान में आचार्यश्री महाश्रमण के कुशल नेतृत्व में धर्मसंघ विकास के पथ पर निरंतर गतिमान है।

तप अभिनंदन कार्यक्रम का आयोजन

मुनिश्री वर्धमानकुमार की प्रेरणा से नेहा सौरभ पटवा के 28 उपवास तप संपन्ना व श्रेया प्रदीप पटवा के नौ उपवास संपन्ना होने पर जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा की ओर से साहित्य भेंटकर उन्हें सम्मानित किया गया। पटवा परिवार की महिलाओं ने गीतिकाओं द्वारा तपस्या की अभिवंदना की। इस अवसर पर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष विनोद भंडारी ने अपनी भावनाएं व्यक्त की। कार्यक्रम का संचालन राजेश वोरा ने किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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