रायपुरिया (नईदुनिया न्यूज)। रायपुरिया में गत सात दिनों से जारी श्रीमद भागवत कथा महाआरती के साथ समापन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में भक्त उमड़े। कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह संपन्ना हुआ। साथ ही पंडित नागर ने कृष्ण और सुदामा जी के मिलन का प्रसंग सुनाया। इसे सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गए। अंतिम दिन होने से बुधवार को पंडाल कथा श्रवण करने आए श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था।

सात दिवसीय कथा के अंतिम दिन कथावाचक पंडित राजेश नागर ने कहा कि मनुष्य को अच्छे कर्म करना चाहिए। कर्मानुसार ही परमात्मा उन्हें फल देते हैं। जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, परमात्मा का साथ नहीं छोड़ना चाहिए वही हमें नैया पार करवाता है। हमेशा जो भी कार्य करें, वह लक्ष्‌य बनाकर करें, उसमें सफलता जरूर मिलती है।

हमारी वजह से किसी को कष्ट न हो

पंडित नागर ने कहा कि हमेशा यह कोशिश करना चाहिए कि हमारी वजह से किसी का दिल नहीं दुखे। मित्रता तो ऐसी करना चाहिए जैसे भगवान कृष्ण और सुदामा की। जो दुखी होकर भी भगवान से कुछ मांगता नहीं, भगवान उन्हें खुद देते हैं। इतनी सारी परेशानी आने के बाद भी भगवान के परम मित्र सुदामा ने प्रभु का नाम लेना नहीं छोड़ा। इसी का परिणाम रहा कि भगवान ने उन्हें बिना मांगे बहुत कुछ दे दिया। इसलिए हम चाहें हमारे कार्य में कितने भी व्यस्त हों, हमें सुबह-शाम मंदिर पर पहुंच कर प्रभु के दर्शन करना चाहिए। कथा समाप्ति के बाद श्रीमद् भागवत की महाआरती उतारी गई। उसके बाद प्रसादी वितरित की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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