Ganeshotsav 2021: झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शहर में गणपति जी के चार प्रमुख मंदिर हैं। सभी मंदिरों की अपनी-अपनी विशेषता है। कालेज मार्ग स्थित जगदीश मंदिर में विराजित सिद्ध विनायक की मूर्ति तो बावड़ी की सफाई के दौरान निकली थी। उक्त मूर्ति को लेकर राजा महेन्द्र जा रहे थे, लेकिन जगदीश मंदिर पर आकर बैलगाड़ी रुक गई। राजा ने मूर्ति की स्थापना जगदीश मंदिर में ही कर दी। इसके साथ ही राजगढ़ नाके के समीप आठ रूपों में विराजित हैं निगर्वगणेश्वर अष्ट विनायक भगवान। रिद्धी-सिद्धी माताजी के साथ थांदला गेट पर हर श्रद्धालु की चिंता हरने के लिए चिंतामणि गणेश की स्थापना की गई थी। प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता है। बस स्टैंड के समीप भी विद्युत कार्यालय पर श्रीवरदमुखी पंचमुखी विराजित हैं। यहां भी विशेष अनुष्ठान होते हैं।

200 वर्ष पुरानी है मूर्ति

कालेज मार्ग स्थित जगदीश मंदिर के पुजारी जगदीश पंडा ने बताया कि मंदिर में विराजित गणेश जी की मूर्ति करीब 200 वर्ष पुरानी है। झाबुआ के तत्कालीन राजा को हरीबाई की बावड़ी की सफाई के दौरान यह मूर्ति मिली थी। राजा इस मूर्ति को लेकर स्थापित करने के लिए राजमहल ले जा रहे थे। लेकिन जगदीश मंदिर के करीब आते ही बैलगाड़ी आगे ही नहीं बढ़ी। बुजुर्गों के कहने पर राजा ने जगदीश मंदिर में ही भगवान श्रीसिद्ध विनायक की स्थापना कर दी। तभी से भगवान यहां विराजित हैं। यहां गणेश उत्सव के दौरान सुबह भगवान का अभिषेक, फिर श्रंगार व शाम को आरती होगी।

आठ रूपों में विराजित हैं निगर्वगणेश्वर अष्ट विनायक

राजगढ़ नाके के समीप पावर हाउस ग्रिड पर वर्ष 2003 में भगवान निगर्वगणेश्वर अष्ट विनायक की स्थापना की गई थी। भगवान के आठ रूपों की मूर्तियां भी यहां स्थापित की गई हैं। पुजारी दुर्गेश पांडे ने बताया कि भगवान निगर्वगणेश्वर अष्ट विनायक यहां आठ रूपों में विराजित हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गणेश चतुर्थी से यहां 10 दिनों तक भगवान का विशेष श्र्ाृंगार किया जाता है। अन्य आयोजन भी होते हैं।

चिंता हर लेते हैं चिंतामणि

थांदला गेट के समीप वर्ष 2005 में भगवान श्री चिंतामण गणेश जी की माता रिद्धी-सिद्धी के साथ स्थापना की गई थी। बीच बाजार में होने के कारण यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर के पुजारी मनोज कुमार सारोलकर ने बताया कि शुक्रवार से 10 दिनों तक भगवान का प्रतिदिन श्र्ाृंगार होगा व शाम को पांच थालियों से आरती की जाएगी। बुधवार को 21 थालियों के साथ आरती होगी। 51 किलो के लड्डुओं का भोग भी लगेगा।

पंचमुखी होने से महत्व

बस स्टैंड के समीप विद्युत कार्यालय पर श्रीवरदमूर्ति पंचमुखी गणेश जी की स्थापना वर्ष 2002 में की गई थी। तभी से यहां गणेश चतुर्थी पर आयोजन किए जा रहे हैं। कंपनी के नंदू भाई ने बताया कि पंचमुखी मूर्ति होने से मंदिर का महत्व अधिक है। यहां 10 दिनों तक भगवान का विशेष श्र्ाृंगार किया जाएगा। अन्य आयोजन भी होंगे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

NaiDunia Local
NaiDunia Local