झाबुआ। ब्यूरो। बचपन से फ्लोरोसिस पीड़ित बालक रामचंद्र कभी पैरों पर चल नहीं पाया। पैरों की हडि्डयों में टेढ़ापन आने से वह हाथों के सहारे घिसटकर ही चलता रहा। एक साल तक चले इलाज के बाद अब वह खड़ा होने लगा। जब कुछ ठीक होने की उम्मीद बंधी तो पिता ने पहली कक्षा में भेजना शुरू कर दिया, लेकिन अब दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने में दिक्कतें आ रही है।

स्कूल से कहा जा रहा है कि आधार कार्ड लेकर आओ, लेकिन रामचंद्र का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा। दरअसल हाथों के सहारे चलने से उंगलियों की रेखाएं घिस गई। अब आधार कार्ड के लिए फिंगर प्रिंट स्कैन नहीं हो पा रही। पिता दूधा भाबर अब तक चार बार उसका आधार रजिस्ट्रेशन करनवाने की कोशिश कर चुके हैं।

जिले में फ्लोरोसिस पीड़ित बच्चों के लिए काम कर रही संस्था इनरेम (इंडियन नेचरल रिसोर्स इकोनोमिक एंड मैनेजमेंट) फाउंडेशन इस बच्चे का एक साल से इलाज कर रहा है। संस्था के जितेंद्र पाल और सचिन वाणी के अनुसार जून 2015 तक बच्चा जमीन पर हाथों के सहारे घिसटकर चलता था। पैर बिलकुल काम नहीं करते थे।

सालभर तक उसे संस्था द्वारा उपलब्ध कराए गए फिल्टर का पानी दिया गया, कैल्शियम टेबलेट दी गई। इसमें मेग्निशियम, विटामिन 'डी" और जिंक भी है। इसके साथ जंगली झाड़ी फुहाड़िए का पाउडर उपचार के रूप में दिया गया। नतीजा ये हुआ कि अब बच्चा खड़ा होने लगा, लेकिन अब आधार कार्ड नहीं बन पाने की नई समस्या सामने आ गई।

स्पेशल केस, भोपाल करेंगे बात

तकनीकी तौर पर कई ऑप्शन हैं। देश के हर व्यक्ति का आधार बनना है। इसके लिए बायोमेट्रिक पहचान के और तरीके हैं। इस केस लिए हम भोपाल बात कर रास्ता निकालेंगे।

-अनुराग चौधरी, सीईओ, जिला पंचायत, झाबुआ

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