झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। साइकिल से तीर्थों की यात्रा करते-करते वैराग्य भाव उपन्ना हुआ और आचार्य नवरत्नसागर महाराज से दीक्षा ग्रहण की। रविवार को स्थानीय श्री ऋषभदेव बावन जिनालय के प्रवचन हाल में अध्यात्म योगी गणिवर्य आदर्शरत्न सागरजी महाराज के 45वें जन्म दिवस पर गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ।

सभा में गुरुदेव के शिष्यों और श्रावकों-श्राविकाओं ने विचार रखे। सर्वप्रथम उनके शिष्य मुनि श्री मलेय रत्न सागरजी ने कहा कि गुरुदेव के गुणों का वर्णन करना मतलब सूर्य को दीपक दिखाने के समान है। वे गुणों के भंडार हैं। वे करुणा से भरे हैं और हमेशा सभी जीवों पर कल्याण की भावना रखते हैं। आज उनका आभा मंडल ही इतना प्रभावी है कि उनके सान्निध्य में जो भी आता है, उसकी कई समस्याएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं। यह उनकी कई भवों की साधना का परिणाम है। मुनिराज हीन्कार रत्न सागरजी ने कहां की यह गुरु कृपा ही थी कि मुझे अनार्य देश दुबई छोड़ उनका शरण मिला और उनके आशीर्वाद से 4 माह में आगम का अध्ययन कर लिया और मुझे जब तक 10 सूत्र प्रतिदिन याद नहीं होते थे, तब तक गुरुदेव खुद जल तक ग्रहण नहीं करते थे।

दीक्षा के भाव जाग्रत हो गए

उन्होंने कहा कि साधु जीवन में शारीरिक कष्ट है, परंतु मानसिक शांति है। जबकि सांसारिक जीवन में मानसिक-शारीरिक कष्ट ज्यादा है। इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री समकित सागरजी ने कहा कि गुरुदेव का जीवन संत बनने के बाद का तो प्रेरणादायी है ही किंतु सांसारिक जीवन भी प्रेरणादायी रहा है। दूसरों के प्रति इतनी करुणा बरसाते थे कि जो भी उनके पास रहता था, सब बांट देते थे, यानी त्याग में विश्वास रखते थे। आर्थिक अभाव में साइकिल से तीर्थ यात्राएं करते थे। संतों के दर्शन करते थे और पूज्य नवरत्न सागरजी के संपर्क में आ गए और दीक्षा के भाव जाग्रत हो गए। मुनि श्री अक्षतरत्न सागरजी ने कहा कि गुरुदेव का स्वभाव शकर से भी मीठा है। उनका चारित्रिक जीवन उत्कृष्ट है जो अनुकरणीय है। श्रावक वर्ग अपने विचार रखते हुए मालवा महासंघ के वरिष्ठ श्रीसंघ उपाध्यक्ष यशवंत भंडारी ने कहा कि गुरुदेव अहमदाबाद के पटेल समाज से आते हैं। उनको 8 वर्ष की उम्र से ही संसार से अरुचि रही है और आचार्य नवरत्न सागरजी के संपर्क में आ गए।

आपकी संकल्प शक्ति अनुकरण करने योग्य

झाबुआ श्रीसंघ का सौभाग्य रहा कि गुरुदेव में संयम लेने के भाव झाबुआ में ही जाग्रत हुए थे, जब आचार्य नवरत्न सागरजी झाबुआ आए थे। यहीं से आजीवन चरण पादुकाओं का त्याग किया और प्रथम वर्षीतप की आराधना भी झाबुआ से ही प्रारंभ हुई थी। 2003 में आपने आचार्यश्री से दीक्षा ली। धर्मचंद्र मेहता ने कहा कि आपकी संकल्प शक्ति अनुकरण करने योग्य है। हंसा कोठारी ने आपकी चारित्रिक जीवन उच्चतम शिखर पर पहुंचने की शुभकामनाएं दीं। श्रीसंघ व्यवस्थापक मनोहर भंडारी ने कहा कि झाबुआ श्रीसंघ का सौभाग्य है कि हमें आपका जन्म दिवस मनाने का अवसर मिला। कामिनी रुनवाल ने जन्म दिवस गीत प्रस्तुत किया। संचालन डा. प्रदीप संघवी ने किया। नव आदर्श गुरुभक्त परिवार के शशांक संघवी ने बताया कि गुरुदेव के 45वें जन्म दिवस पर आज 120 से अधिक आयंबिल तप हुए जिसके लाभार्थी सुभद्रा वीरेंद्र, शशांक आरजू संघवी परिवार थे। दोपहर में बाबूलाल कोठारी परिवार ने सामायिक का आयोजन किया। कई धर्मालुओं ने प्रभावना भी वितरित की। 31 मई को महामांगलिक का आयोजन होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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