ग्राउंड रिपोर्ट.... जलसंकट का मोनो....इसके नीचे करड़ावद वाली खबर ले लें....

आधी रात से ही शुरू हो जाता है संघर्ष

मवेशियों के लिए भी जुगाड़ मुश्किल

-रानापुर के गांवों में जलसंकट, मुख्य स्रोतों ने दम तोड़ा

गणेश आर. पोरवाल

रानापुर। नईदुनिया न्यूज

गर्मी बढ़ते ही जलसंकट ने दस्तक दे दी। दूसरी ओर मुख्य स्रोत हैडपंप भी साथ छोड़ने लगे हैं। इसका असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से देखने को मिल रहा है। ग्राम पंचायत सुरड़िया में पानी के सभी मुख्य स्रोतों ने दम तोड़ दिया है। इससे गांव के लोगों को पानी के लिए आधी रात से ही इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। सबसे बड़ी मुसीबत मवेशियों के लिए खड़ी हो गई है।

सुरड़िया रानापुर तहसील मुख्यालय से लगभग 14 किमी दूर स्थित है। यह गांव विकास से कोसों दूर है। यहां पर 700 परिवार हैडपंप पर ही निर्भर हैं। गर्मी आते ही जल स्तर घटने से महिलाओं व बच्चों को दो से तीन किमी दूर जाना पड़ता है। गांव के लोग वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। समस्या के स्थायी समाधान के लिए बड़ी योजना की जरूरत है, ताकि जल स्तर बढ़े और बारहो महीने पानी मिल सके।

ग्राम पंचायत सुरड़िया

- गांव 1

- आबादी 4500

- फलिए 6

- हैडपंप 34

- बंद 30

- चालू 4

- टैंकर 2, दोनों चालू

- तालाब 3

यह है स्थिति

- तीन में से केवल एक तालाब में ही पानी है, वह भी कम, जिसका उपयोग केवल मवेशियों के पीने के लिए किया जा रहा है।

- केवल एक ही स्टॉपडेम है।

- गांव के लोग 3 से 4 किमी दूर ग्राम भांडाखेड़ा व काकरादरा से जैसे-तैसे पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं।

- गांव के पास से गुजर रही भामसी नदी पर लंबे समय से बड़े बांध की मांग की जा रही है। अगर यह मांग पूरी हो गई तो समस्या का स्थायी हल निकल आएगा।

इन फलियों में स्थिति गंभीर

तोलिया फलिया, पिदिया फलिया, अमलियार फलिया और भूरिया फलिया में स्थिति गंभीर है। आज तक पानी के लिए इस क्षेत्र की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। भामसी नदी पर बांध बनने से ही समस्या दूर हो सकेगी। सुरडिया के ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पास से भामसी नदी पर बांध या बैराज बन जाए तो जल स्तर बढ़ सकता है। आसपास कोई बड़ा तालाब भी नहीं है। अगर बांध नहीं बने तो अभी बैराज बना देना चाहिए, ताकि कुछ राहत मिले। ग्रामीणों का आरोप है कि पीएचई के अधिकारी व कर्मचारी कभी गांवव में आते ही नहीं। कई हैडपंप बंद पड़े हैं।

कई आवेदन दिए, कुछ नहीं हुआ

सुरड़िया की सरपंच मधुबाई मेड़ा ने बताया कि मेरी पंचायत में पानी की समस्या बेहद गंभीर होती जा रही है। गत वर्ष मैने जनसुनवाई व पीएचई विभाग को हैंडपंप खनन व उनमें विद्युत मोटर लगाने के लिए अनेक आवेदन दिए, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद आज तक कोई भी व्यक्ति इस ओर ध्यान नहीं दिया और आवेदन को रद्दी की टोकरी में शायद फेंक दिया। जल स्तर घटने व गर्मी चालू होने के बाद से पानी की समस्या ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। भामसी नदी पर बड़ा बांध या तालाब बन जाने से जल स्तर बढ़ सकता है। अभी इस समय पीदिया फलिया, तिलिया फलिया व रोड फलिया के हैडपंपों में विद्युत मोटर लगाने की आवश्यकता है।

दो से तीन किमी दूर जाने की मजबूरी

पंचायत सचिव कल्याणसिंह मछार के अनुसार पानी की समस्या दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है ।गांव वालों को दो से तीन किमी की दूरी पर लाने को मजबूर हो रहे है। नवीन पेयजल योजना का काम चालू है। कुछ जगहों पर हैडपंपों में विद्युत मोटर लगाने की आवश्यकता है। इससे पानी की समस्या का कुछ हल हो सकता है।

16 जेएचए 32 - रानापुर जनपद के ग्राम सुरडिया में इस तरह हैडपंप बंद पड़े हैं।

16 जेएचए 33 - हैडपंप पर इस तरह भीड़ लगी रहती है।

16 जेएचए 34 - ग्रामीणों ने जलसंकट के बारे में रखी अपनी बात।