जन्माष्टमी/जोड़.....

महायज्ञ के साथ अखंड रामायण

पाठ की पूर्णाहुति, उमड़े श्रद्धालु

-भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित

खवासा। नईदुनिया न्यूज

बस स्टैंड स्थित प्राचीनतम तथा चमत्कारिक श्री हनुमान मंदिर पर करीब 40 वर्षों से चले आ रहे श्रावण मास में अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति जन्माष्टमी के अवसर पर महायज्ञ के साथ पूर्ण हुआ। श्रावण मास की पूर्णिमा से प्रतिवर्ष अखंड रामायण पाठ विगत 40 वर्षों से चला आ रहा है। श्रद्धालु प्रतिदिन एक-एक घंटा रामायण पाठ करते है तथा जन्माष्टमी को महायज्ञ के साथ पूर्णाहुति की जाती है।

संकटमोचन मित्र मंडल के सदस्यों ने बताया कि यज्ञ में बैठने वाले यजमान का चयन पाठ दाताओं में से किया जाता है। महायज्ञ का आयोजन पं. ओमप्रकाश दुबे के आचार्यत्व में किया गया तथा यजमान शंभूलाल चौहान थे। इसके बाद पूर्णाहुति तथा महाआरती की गई तथा महाप्रसादी वितरित की गई। शाम को बैंडबाजों के साथ आकर्षक झांकियां भी निकाली गई, जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इसके अलावा बाजना रोड स्थित गोपाल मंदिर और नीम चौक स्थित श्रीकृष्ण मंदिर पर भी जन्माष्टमी के अवसर पर आकर्षक विद्युत सज्जा की गई। श्रीकृष्ण मंदिर पर दिनभर भजन-कीर्तन के साथ ही श्रीकृष्ण भगवान को छप्पन भोग भी लगाया गया। देर रात ठीक 12 बजे महाआरती और महाप्रसादी वितरण कार्यक्रम का आयोजन रखा गया। इसके साथ ही आसपास के सभी गांवों में जन्माष्टमी के अवसर पर मटकी फोड़ कार्यक्रम आयोजित किए गए।

24 जेएचए 01 - खवासा में जन्माष्टमी पर अखंड रामायण पाठ की पूर्णाहुति हुई।

'वासुदेव के दर्शन के बाद ही

सुदामा को सुख प्राप्त हुआ'

-भागवत कथा की पूर्णाहुति पर शोभायात्रा निकली

जामली। नईदुनिया न्यूज

ग्राम पांचपिपला में सात दिनों से चल रही श्रीमद् भागवत का समापन ढोल-ढमाकों के साथ शोभायात्रा निकालकर किया गया। कथा वाचक पं. दिनेशजी शर्मा ने अंतिम दिन भागवत सार में कथा के महत्व को समझाया। उन्होंने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता का वर्णन कर मित्रता का महत्व भी बताया कि किस तरह बेतहाशा गरीबी और मुफलिसी भी सुदामा को प्रभु भक्ति से दूर न कर सकी। अंततः वासुदेव के दर्शन के बाद सुदामा को सुख प्राप्त हुआ।

विद्वान वक्ता ने कहा कि कलियुग के दोष भागवत श्रवण से समाप्त होते हैं। एक समय बाद मानव को सांसारिक मोह से मुक्त होना ही है। प्रभु भक्ति में लीन होकर ही मानव जीवन सफल बना सकते है। मानव को भी दुखों का सामना कर प्रभु भक्ति करने से सुख प्राप्त होता है। कथा के समापन के दिन परीक्षित मोक्ष, रुक्मणी विवाह वर्णन भी सुनाया। कृष्ण जन्म महोत्सव होने से कथा मे भक्तों की भीड़ खासी रही। कृष्ण के जन्म पर बालकृष्ण के रूप में बालक को तैयार किया गया। कथा का नाटकीय वर्णन भी किया गया। इसके बाद पूर्णाहुति के अवसर पर हवन-पूजन किया। साथ ही शोभायात्रा भी निकाली गई। यह राम मंदिर से शुरू होकर हनुमान मंदिर पर संपन्ना हुई। भक्तगण यात्रा में भजनों की धुन पर नृत्य करते दिखे। श्रीमद् भागवत की महाआरती के बाद महाप्रसादी का वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान राख घाट वाले गुरुजी के साथ वरिष्ठ जगदीश भटेवरा, हीरालाल पाटीदार जामली, गोवर्धनसिंह पंवार, गोविंदसिंह पंवार, शंभूसिंह पंवार, लक्ष्मणसिंह चौहान, मोड़सिंह पंवार, सज्जनसिंह राठौर, श्यामसुंदर शर्मा, ईश्वरसिंह चौहान, मोहनसिंह चौहान, अंतरसिंह आदि भी उपस्थित थे।

24 जेएचए 06 - जामली के पांचपिपला में भागवत कथा के तहत हवन भी हुआ।

24 जेएचए 07 - श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग पर जीवंत झांकी आकर्षण का केंद्र रही।