लापरवाही

जिला अस्पताल में उपचार नहीं मिलने पर मौत के बाद हंगामा

-ग्राम झकेला के ग्रामीणों ने तहसीलदार की समझाइश पर थाने पहुंचे

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला अस्पताल एक बार फिर चर्चाओं में है। ग्राम झकेला के ग्रामीण बुखार और पेट दर्द के मरीज को लेकर शुक्रवार अल सुबह जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां पर कोई भी चिकित्सक उपलब्ध नहीं हुआ। ओपीडी में भी कोई भी कर्मचारी नहीं मिल पाया। ग्रामीण मरीज को उपचार के लिए एक निजी चिकित्सालय ले गए। वहां के चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए उपचार करने से मना कर दिया। इस पर मरीज को लेकर ग्रामीण पुनः जिला अस्पताल पहुंचे। अबकी बार चिकित्सक मिल गया। चिकित्सक ने मरीज को आईसीयू में भर्ती किया व बोतल चढाई, लेकिन उपचार के दौरान मरीज की मौत हो गई। मौत की खबर सुनते ही ग्रामीण भडक गए और चिकित्सकों पर समय पर उपचार नहीं करने की बात को लेकर हंगामा करने लगे। बाद में तहसीलदार की समझाइश के बाद थाने पर रिपोर्ट लिखवाई गई।

ग्राम झकेला के धनसिंह पिता भुरजी उम्र 35 वर्ष की तबीयत शुक्रवार सुबह अधिक खराब हो गई। उसे बुखार के साथ ही पेट में दर्द हो रहा था। ग्रामीण अपनी निजी वाहन से सुबह 4.30 बजे उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल के मुख्य द्वार बंद थे। ग्रामीणों ने जैसे-तैसे दरवाजा खुलवाया। जब अंदर मरीज को लेकर पहुंचे तो वहां पर कोई भी चिकित्सक उपस्थित नहीं था। जब परिजन ओपीडी में गए तो वहां भी कोई भी कर्मचारी उपस्थित नहीं था। उपचार के लिए ग्रामीण जिला अस्पताल में इधर-उधर भटकते रहे।

निजी चिकित्सक ने मना किया

जब जिला अस्पताल में कोई भी चिकित्सक उपलब्ध नहीं था और मरीज की स्थिति खराब होती जा रही थी। ग्रामीण मरीज को लेकर शहर के एक निजी अस्पताल पहुंचे। यहां के चिकित्सकों ने मरीज की स्थिति को देखते हुए उपचार करने से मना कर दिया। चिकित्सकों ने उसे गुजरात उपचार के लिए ले जाने को कहा।

वाहन उपलब्ध नहीं था

मृतक धनसिंह के भाई बालूसिंह का कहना है कि निजी चिकित्सक ने मना कर दिया तो वे मरीज को गुजरात ले जाने के लिए वाहन की तलाश करने लगे लेकिन अल सुबह होने से कोई भी वाहन नहीं मिल पाया। मजबूरन मरीज को उन्हें जिला अस्पताल पुनः लेकर आना पडा। दूसरी बार आने पर चिकित्सक मिल गया। चिकित्सक ने उनके भाई को आईसीयू में भर्ती कर दिया और एक बॉतल चढाई। सुबह 7 बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

लापरवाही बताई

मृतक के पिता भुरजी का कहना है कि पहली बार आने पर ही अगर उनके पुत्र धनसिंह को उपचार मिल जाता तो उसे बचाया जा सकता था। लेकिन कोई भी चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। और ना ही ओपीडी में कोई कर्मचारी था। ऐसी लापरवाही के चलते ही उनके पुत्र की जान गई है। इसकी जवाबदारी कौन लेगा? कहने को तो जिला अस्पताल गरीबों का अस्पताल है लेकिन यहां इतनी लापरवाही से काम किया जाता है।

2 घंटे तक शव आईसीयू में रखा

मरीज की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने इस घटना की सूचना जिला प्रशासन को भी दी। करीब 2 घंटे तक मृतक का शव आईसीयू में ही रखा रहा। परिजन चिकित्सक पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। उन्होंने लापरवाही करने वाले चिकित्सक पर कार्रवाई की मांग भी की। जिला प्रशासन की ओर से तहसीलदार बीपी भिलाला जिला अस्पताल पहुंचे और उन्होंने परिजनों को समझाईश दी और कार्रवाई का भरोसा दिया। तब जाकर मामला शांत हुआ। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पीएम करवाकर जांच शुरू कर दी है।

जांच का विषय है

जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. सावंत चौहान का कहना है कि वैसे तो 24 घंटे चिकित्सक व कर्मचारी जिला अस्पताल में उपस्थित रहते है। फिर भी परिजनों के कहने पर उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में जांच करवाई जाएगी। जांच के बाद ही मामले पर कुछ कहा जा सकता है।

13 जेएचए 40- आईसीयू में दो घंटे तक पड़ा रहा शव।

13 जेएचए 42- मरीज की मौत के बाद परिजनों ने आक्रोश व्यक्त किया।