मंत्री दस्तक दे रहे घर-घर, खाना खा रहे कुटियाओं में

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

चुनाव प्रचार अब जोर पकड़ चुका है। दोनों प्रमुख दलों की ओर से बूथ मैनेजमेंट करने में दिग्गज लगे हुए हैं। कमलनाथ सरकार के मंत्री वोट के लिए घर-घर दस्तक दे रहे हैं। अपने चुनाव प्रचार में वे कुटियाओं में खाना भी खा रहे हैं। कहीं कार छोड़कर अन्य वाहनों पर भी सवार हो रहे हैं तो कहीं पगडंडी नापते हुए मतदाताओं के पास तक जा रहे हैं। उधर भाजपा अपने दिग्गज नेताओं के लगातार सेक्टर सम्मेलन करवा रही है। शनिवार को भी यह सिलसिला जारी रहा। फलियों में पहले ही प्रचार अभियान जोरों पर है।

कमलनाथ सरकार ने उपचुनाव के लिए झाबुआ में डेरा डाल दिया है। आधा दर्जन मंत्री यहां लगातार घूम रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट शुक्रवार को ही झाबुआ आ गए थे। यहां वे लगातार जनसंपर्क करते रहे। शनिवार को पिटोल क्षेत्र के माल फलिए में पहुंचकर उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा की। नाना डामोर के यहा पहुंच परंपरागत ढंग से भोजन भी किया। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा शनिवार को अंतरवेलिया क्षेत्र का दौरा करते रहे। कई धार्मिक स्थलों का उन्होंने भ्रमण किया।

आते ही बूथ मैनेजमेंट

शनिवार की दोपहर में नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धनसिंह अपनी टीम के साथ झाबुआ पहुंचे। उन्हें झाबुआ शहर का दायित्व दिया गया है। झाबुआ आते ही वे यहां के 34 बूथों के मैनेजमेंट में लग गए। शहर को तीन हिस्सों में बांटते हुए कांग्रेस मैनेजमेंट कर रही है। राजगढ विधायक बापूसिंह तंवर, बड़वाह विधायक सचिन बिरला सहित कई नेता सिंह के साथ लगे रहे। सिंह शहर की स्थिति व हर वार्ड की संभावनाओं को लेकर कार्यकर्ता से चर्चा करने में लगे रहे। उधर ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी, कृषि मंत्री सचिन यादव, पंचायत मंत्री कमलेश्वर पटेल व गृह मंत्री बाला बच्चन भी पिछले दो-तीन दिनों से लगे हुए थे। शनिवार को ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह भी झाबुआ पहुंच गए।

राकेशसिंह उतरे मैदान में

भाजपा की ओर से प्रदेश अध्यक्ष राकेशसिंह ने मोर्चा संभाल रखा है। वे लगातार हर सेक्टर में जाकर सम्मेलन कर रहे हैं। शनिवार को निरंतर उनकी छोटी-छोटी सभाएं होती रही। 25 सेक्टर में विधानसभा को विभाजित करने के बाद भाजपा की रणनीति यही है कि अधिक से अधिक छोटी बैठक करवाई जाए। 15-20 बूथ के बीच एक सेक्टर आ रहा है। एक सेक्टर के माध्यम से कई बूथों पर एक जैसा संदेश पहुंचाने के लिए सेक्टर बैठकें की जा रही है। पूर्व मंत्री व विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों का दायित्व दिया जा चुका है।

12 जेएचए 07- स्वास्थ्य मंत्री सिलावट ने पिटोल क्षेत्र में एक ग्रामीण के यहां भोजन किया।

मात्र एक सप्ताह बचा चुनाव प्रचार खत्म होने में

- शनिवार को थम जाएगा चुनावी शोरगुल

- 21 अक्टूबर को होना है मतदान

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

तमाम रोमांचकता को पीछे छोडते हुए अब चुनाव प्रचार अपने अंतिम पायदान पर पहुंच गया है। शनिवार को शाम 5 बजे चुनावी हल्ला-गुल्ला थम जाएगा। 21 अक्टूबर को 356 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 78 हजार के लगभग मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगें। मतदाताओं का समर्थन लेने के लिए 5 उम्मीदवार मैदान में है। मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच माना जा रहा है। प्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्या दोनों दलों की नजदीक होने से इस विधानसभा उपचुनाव का महत्व बहुत ज्यादा हो गया है। दोनों दल अपनी एक-एक सीट बढाने की कोशिश में है। कांग्रेस की अभी 114 तो भाजपा की 108 सीटें हैं। सीट प्राप्त करने की चाहत में झाबुआ सियासत में इन दिनों प्रमुख हो चला है। भोपाल से ही यहां का सारा चुनाव संचालित हो रहा है।

तमाम प्रक्रिया से गुजरते हुए अब तेजी से चुनाव अपने अंतिम पड़ाव की ओर पहुंच रहा है। मात्र एक सप्ताह में चुनाव प्रचार खत्म हो जाएगा। झाबुआ का नया विधायक चुनने के लिए मतदाताओं से ज्यादा राजनीतिक दलों में उत्साह दिख रहा है। मतदाता तो खामोश है लेकिन राजनीतिक दल अत्यधिक सक्रियता दिखा रहे हैं। एक-एक बड़ी सभा पहले हो चुकी थी। दशहरे बाद चुनाव प्रचार शुरू हुआ था तो कांग्रेस ने फिर एक बड़ी सभा कर ली थी। अंतिम सप्ताह में भी कांग्रेस दो बड़ी सभा करने जा रही है। 16 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह बोरी आएंगे तो 19 अक्टूबर को प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री कमलनाथ रानापुर में सभा लेंगे। भाजपा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान आ रहे हैं लेकिन उनकी छोटी सभाएं ही रखी जा रही है।

24 अक्टूबर को होगा फैसला

21 अक्टूबर को मतदाता ईवीएम मशीन का बटन दबाकर नए विधायक का चुनाव करेंगे। 24 अक्टूबर को पॉलीटेक्निक महाविद्यालय में मतगणना होगी। इस दिन जनता का फैसला सभी के सामने आ जाएगा। तब तक चुनाव को लेकर यहां जबर्दस्त उत्सुकता बनी हुई है। सट्टा बाजार ने भी अपने भाव खोल रखे हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि ज्यादा सौदे अभी नहीं हो पा रहे हैं। वजह यह है कि चुनाव को लेकर जनता की सोच अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाई है।