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जिला अस्पताल का हाल : 6 माह में 1 लाख 14 हजार 570 मरीजों के खून की 44 तरह की हो चुकी जांच-

झाबुआ में रिपोर्ट नॉर्मल, गुजरात गए तो बताया डेंगू

प्वॉइंटर

-झाबुआ और आसपास के मरीज जिला अस्पताल पर ही निर्भर

- झाबुआ और गुजरात के जांच तरीकों में आ रहा भारी अंतर

-दाहोद में केवल प्लेटलेट्स बढ़ा हुआ बताकर भर्ती कर लेते हैं

-जिम्मेदारों का कहना- दाहोद में क्या चलता है, सबको पता है

झाबुआ। नईदुनिया प्रतिनिधि

डेंगू एक ऐसी बीमारी हो गई है, जिसका नाम सुनकर ही मरीज व उसके परिजन आतंकित हो जाते हैं। डेंगू को लेकर यहां अजीब तरह की स्थिति सामने आ रही है। झाबुआ व गुजरात के डेंगू पता लगाने के तरीकों में भारी अंतर है। पिछले 6 माह में 1 लाख 14 हजार 570 मरीजों के खून की जांच जिला अस्पताल में हो गई। आश्चर्यजनक बात यह है कि इनमें से एक को भी डेंगू नहीं निकला। जब यही मरीज पड़ोसी राज्य गुजरात के दाहोद पहुंचे तो उन्हें वहां डेंगू बताते हुए भर्ती कर लिया गया। भारी-भरकम अस्पताल का बिल बना और मरीज व उसके परिजन परेशान हुए, सो अलग। इस तरह के मामलों में यहां के अमले का अलग ही रूप सामने आ रहा। उनका मानना है कि केवल प्लेटलेट्स बढ़े हुए बताकर ही डेंगू कहकर मरीज को भर्ती कर लिया जाता है।

जिला अस्पताल को 200 से बढ़ाकर 300 बेड का करने की कार्रवाई चल रही है। स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट कहते हैं कि यहां के मरीजों को हर तरह की सुविधा दी जाएगी। वे जल्द ही ऐसी स्थिति कर देंगे कि किसी भी मरीज को उपचार के लिए झाबुआ से दाहोद नहीं जाना पड़ेगा। सिलावट झाबुआ में दौरा करते समय और यहां से जाने के बाद भी यही इच्छाशक्ति व्यक्त कर रहे हैं, लेकिन यहां का नजारा ही अलग है। पहले तीन साल तक लैब के सुविधाघर पर ताले लगे रहने का मामला सामने आया। अब डेंगू जैसी गंभीर बीमारी को लेकर भी अलग तरह का रवैया सामने आ रहा है।

यह है स्थिति

इस वर्ष 1 अप्रैल से लेकर 31 अक्टूबर तक 1 लाख 14 हजार 570 मरीजों ने जिला अस्पताल में अपने खून की जांच करवा ली। किसी को भी डेंगू नहीं निकला। दावा यह है कि 48 में से 44 तरह की जांचें यहां हो जाती हैं। झाबुआ व अन्य कई स्थानों के मरीज जिला अस्पताल में आकर ही अपना उपचार करवाते हैं। यहां जब उन्हें डेंगू नहीं बताया गया तो वे निश्चिंत हो गए। इसी बीच तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो दाहोद गए। वहां डेंगू बताते हुए तत्काल अस्पताल में ही भर्ती कर दिया गया। ऐसे दर्जनों मामले यहां हो गए हैं।

....यहां से बॉक्स....

पीड़ितों का दर्द

उषा परमार का कहना है कि उन्होंने झाबुआ जिला अस्पताल में खून की जांच करवाई थी। बुखार था और सिर में दर्द भी हो रहा था। यहां कहा गया कि वायरल बुखार है। दवा लेने के बाद भी कोई आराम नहीं हुआ। फिर उन्होंने दाहोद जाकर जांच करवाई। वहां कह दिया गया कि डेंगू है। लगभग 5 दिन तक दाहोद के अस्पताल में ही भर्ती रहना पड़ा।

- रियाज भाई का कहना है कि शहर के कई क्षेत्रों में इन दिनों बीमारियों का प्रकोप चल रहा है। हुडा क्षेत्र के एक ही परिवार के दो बच्चों को दाहोद में डेंगू बताया गया था और उन्होंने यहां भी अपना चेकअप करवाया था, लेकिन यहां पर डेंगू नहीं निकला।

यह है तरीकों में अंतर

जिला अस्पताल के अमले का कहना है कि यहां एलाइजारिडर से डेंगू की जांच की जाती है जबकि दाहोद में कार्ड मैथड से। दाहोद का तरीका यहां मान्य नहीं है। प्लेटलेट्स थोड़े भी बढ़े हुए दिखे तो दाहोद में तुरंत कह दिया जाता है कि डेंगू है। फिर तत्काल मरीज को वहां के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। दाहोद में लगातार निजी अस्पतालों का जाल फैला है। इस शिकंजे में यहां के मरीज भी उलझ जाते हैं।

की जाती है जांच

जिला अस्पताल के आरएमओ डॉ. सावंतसिंह चौहान का कहना है कि हर मरीज की जांच गहनता से होती है। जांच के अनुसार ही यहां उपचार भी कर दिया जाता है। दाहोद में क्या चलता है, सबको मालूम है।

22 जेएचए 09- झाबुआ के जिला अस्पताल में मरीजों के खून की जांच की जाती है।

22 जेएचए 10- रोज बड़ी तादाद में मरीज आ रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network