-सिंचाई के लिए तय समय से ज्यादा बिजली की मांग

रायपुरिया/पेटलावद। सिंचाई के लिए तय समय से अधिक की बिजली की मांग कर रहे किसानों ने रायपुरिया के 33 केवी विद्युत स्टेशन पर मंगलवार देर रात करीब ढाई बजे से बुधवार सुबह तक हंगामा कर ग्रिड को पूरी तरह बंद करवा दिया। मामले की खबर लगने के बाद अलसुबह विभाग के डीई और रायपुरिया तथा पेटलावद के जेई पुलिस को लेकर मौके पर पहुंचे और आठ घंटे से बंद ग्रिड से सप्लाय को सुचारु करवाया। इस मामले में रायपुरिया के एक भाजपा पदाधिकारी सहित पांच के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।

बताया जाता है कि ग्राम रामनगर और रायपुरिया के किसान सिंचाई के लिए अतिरिक्त थ्री फेज विद्युत प्रदाय की मांग को लेकर मंगलवार देर रात लगभग 2.30 बजे रायपुरिया के 33 केवी ग्रिड पर पहुंचे। वहां उन्होंने ड्यूटी पर तैनात शंकरसिंह राजपूत और गोवर्धन गणेश से दबावपूर्वक ग्रिड से आसपाास के पचास से ज्यादा गांवों में जारी विद्युत सप्लाय को बंद करवा दिया तथा अपनी मांग को मनवाने के लिए रातभर ग्रिड पर ही डेरा डालकर बिजली चालू नहीं करने दी। इससे रायपुरिया 33 केवी से जाने वाली बिजली बुधवार सुबह 9.30 बजे तक चालू नहीं हो पाई। मामले की गंभीरता को देख अलसुबह ही डीई ब्रजेश यादव, पेटलावद जेई वीरेंद्रसिंह सोलंकी तथा रायपुरिया जेई जय परमानंदानी पुलिस को लेकर पहुंचे और 8 घंटे से बंद विद्युत सप्लाय चालू करवाया। मामले को लेकर डीई श्री यादव ने बताया कि नियमानुसार सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली प्रदाय की जा रही है। इसके लिए बाकायदा ऊपरी स्तर से लोड और मांग के अनुसार दिशा-निर्देश जारी होते है। इस प्रकार से बलपूर्वक ग्रिड का घेराव कर विद्युत प्रदाय बंद करवाना और जबरन अपनी मांगें मनवाना गैरकानूनी है।

हर समय रहता है जोखिम

रायपुरिया ग्रिड पर आए दिन घेराव की स्थिति पर गंभीरता को लेकर विद्युत अधिकारीयों ने हंगामा कर रहे किसानों पर प्रकरण दर्ज करवाया है। नगर निरीक्षक केएल डांगी ने बताया कि जेई जय परमानंदानी की रिपोर्ट पर राजू पाटीदार ग्राम रामनगर, गेंदालाल कांजी पाटीदार, पन्नालाल पाटीदार सभी निवासी रामनगर, अजय धर्मराज पाटीदार, बालमुकुंद लालचंद्र पाटीदार ग्राम रायपुरिया और एक अन्य पर धारा 147, 186, 353, 506 के तहत प्रकरण दर्ज किए गए हैं। जेई जय परमानंदानी के अनुसार क्षेत्र के किसानों द्वारा पहले भी अपनी अवैधानिक मांगों को मनवाने को लेकर ग्रिड पर बलपूर्वक बंद व धरने की स्थिति बनाई जा चुकी है। ऐसी स्थिति में ग्रिड पर तैनात कंपनी के कर्मचारी व शासकीय संपत्ति का हर समय जोखिम बना रहता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाया गया है।