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लॉकडाउन में पानी पर लॉक : पेटलावद के झौंसर-मातापाड़ा में गहराया जलसंकट, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की तरफ से मदद नहीं, नल-योजना भी ठप-

पानी के लिए बहाते हैं पसीना, लगाते हैं 10 किमी के पांच फेरे

मनोज जानी - पेटलावद (नईदुनिया)।

महामारी के चलते झाबुआ जिले में संपूर्ण लॉकडाउन लागू है। इसकी अलग परेशानी है, लेकिन डेढ़ हजार की आबादी वाले ग्राम झौंसर के लोग पानी को तरस रहे हैं। मातापाड़ा और डाबरिया फलिए के लोग तीन से चार किमी दूर से पानी ढोकर लाते हैं। औसतन 10 किमी रोज पैदल चलना पड़ता है। प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिल रही है। नल-जल योजना ठप है।

पेटलावद विकासखंड के कई गांवों में जलसंकट के कारण कुछ ऐसे ही कठिन हालात है, लेकिन इन गांवों की सुध कोई नही ले रहा है। तहसील मुख्यालय से महज 5 किमी की दूरी पर बसे इस गांव के बाशिंदे पानी के लिए कई किमी का सफर तय कर रहे हैं। इस फलिए के लोगों को दूसरे डाबरिया फलिए में शैतान भूरिया के कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। यहां 700 से 800 लोग का पूरा दिन पानी की जुगाड़ में ही बीत जाता है। पूरा परिवार बैलगाड़ी से तो बच्चे साइकिल से पानी लाते हैं। हर घर में बैलगाड़ी पर ड्रम बंधे हैं, जिस पर ताला लगाना पड़ता है, नहीं तो पानी की चोरी हो जाए। लक्ष्मी ने बताया कि पानी के लिए 2 किमी दूर जाना पड़ता है। रोज पांच फेरे लगाना पड़ते हैं। यानी 10 किमी तक का सफर रोज पैदल तय करते हैं।

15 वर्षों में 15 से अधिक नलकूप फेल

गांव में 15 वर्षों में शासन की ओर से 15 से अधिक नलकूप खनन करवाए गए, लेकिन एक में भी पानी नहीं निकला। पिछले साल भी नलकूप खनन किए गए, लेकिन जवाब दे गए। गांव में जो 4 हैडपंप चालू हैं, उसमें भी तेजी से जलस्तर गिर रहा है।

बिजली के अभाव में नल-जल योजना ठप

गांव में मुख्यमंत्री नल-जल योजना से पानी टंकी का निर्माण हुए कई वर्ष हो चुके है। इस टंकी को शुरू करने के लिए कुएं से पानी लिफ्ट करके टंकी में डालना है, लेकिन बिजली नहीं होने से कुछ नहीं हो सकता। जो पाइप लाइन डाली गई है, वह भी कारगार सिद्ध नहीं हो सकी। पीएचई की लापरवाही से आज तक यह टंकी चालू नहीं हो सकी।

(यहां से हाफ कॉलम फोटो)

पानी भरने में गुजरता है पूरा दिन

ग्राम मातापाड़ा की सुंदरबाई भूरिया ने बताया कि सुबह उठकर सबसे पहले पानी के लिए दौड़ना पड़ता है। इससे घरेलू कामकाज धरे रह जाते हैं। यहां तक कि समय पर भोजन भी नहीं बन पाता। कुएं पर सुबह से भीड़ लगती है। डिब्बों को कतार में लगा दिया जाता है। पानी की समस्या दिनोंदिन विकराल होती जा रही है।

मजदूरी भी छोड़नी पड़ती है

ग्रामीण दशरथ पारगी का कहना है कि गांव में पानी नहीं होने के कारण उन्हें आसपास के इलाकों में जाना पड़ता है। ऐसे में उन्हें मजदूरी छोड़नी पड़ती है, क्योंकि अगर मजदूरी पर गए तो पानी कौन भरेगा।

पशुओं को पिलाने के लिए भी नहीं है पानी

कालूबाई भूरिया ने बताया कि गांव में पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि पशुओं के लिए भी जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है।

जितना हो सकता है, करते हैं सेवाकार्य

निजी कुएं वाले शैतान भूरिया ने बताया कि जितना हो सकता है, उतना सेवाकार्य करते हैं। हर साल चार माह इसी तरह जलसंकट में गुजारना पड़ता है। सभी जनप्रतिनिधियों को समस्या बताई, लेकिन किसी ने भी सुध नहीं ली।

मामला दिखवाएंगे

पीएचई के एसडीओ शैलेष बघेल और उपयंत्री टीएस बामनिया ने बताया कि कहां समस्या आ रही है, मामला दिखवाना पड़ेगा। हमारी जानकारी के अनुसार हैंडपम्प चालू हैं। कुछ वाटर लेवल भी डाउन है। टीम भिजवाकर मामला दिखवा देते हैं।

28 पीईटी 5 पेटलावद के ग्राम झौंसर के लोगों को पानी के लिए करीब तीन किमी दूर निजी कुएं में जाना पड़ता है, जहां सुबह से ही बच्चों के साथ बड़ों की भी कतार लगती है। -तन्मय चतुर्वेदी

28 पीईटी 3 पानी चोरी के डर से ड्रम पर ताला लगाना पड़ता है।

28 पीईटी 4 जलसंकट से जूझने के बावजूद पशुओं का भी ध्यान रखना पड़ता है।

28 पीईटी 6 पानी की जुगाड़ के लिए बैलगाड़ी का लेना पड़ता है सहारा।

28 पीईटी 7 साइकिल से बच्चे करते हैं पानी का जुगाड़।

28 पीईटी 8 तीखी धूप सहते हुए ग्रामीणों को सुनसान पगडंडियों से होकर पानी लेने के लिए काफी दूर जाना पड़ता है।

28 पीईटी 10 सुंदरबाई भूरिया

28 पीईटी 11 दशरथ पारगी

28 पीईटी 12 कालूबाई भूरिया

28 पीईटी 13 शैतानसिंह भूरिया

Posted By: Nai Dunia News Network

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