थांदला (नईदुनिया न्यूज)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप भारती पर डिलीवरी में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए महिला के ससुर कमाल डामोर ने नवजात की मौत का जिम्मेदार ठहराया है।

दौलतपुरा निवासी 30 वर्षीय अलका डामोर को 28 सितंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। देर रात प्रसव पीड़ा होने से उसने मृत बच्चे को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसे जिला चिकित्सालय रेफर किया गया, लेकिन स्वजन उसे मेघनगर के जीवन ज्योति अस्पताल ले गए, जहां अब हालत खतरे से बाहर है। महिला के स्वजन ने नवजात की मौत के संदर्भ में डॉ. प्रदीप भारती पर डिलीवरी में लापरवाही बरतने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए जिला स्वास्थ्य अधिकारी को मामले की शिकायत की है। महिला के ससुर ने थाने पर आवेदन देकर डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की है।

आरोप बेबुनियाद

मामले पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. भारती का कहना है कि महिला को समय बीत जाने के बाद डिलीवरी के लिए भर्ती किया गया था, जहां परीक्षण कर नवजात के पेट में पानी होने और उसके जिंदा नहीं बचने की बात स्वजन को बता दी गई थी। डिलीवरी के बाद ऐसे हालत में नवजात अगर जिंदा भी होता तो मानसिक विकलांग पैदा होता। अभद्र व्यवहार और डिलीवरी में लापरवाही बरतने के आरोप को डॉ. भारती ने बेबुनियाद बताया है।

नदी में नहाते समय डूबने से बालक की मौत

थांदला। ग्राम कलदेला में मंगलवार देर शाम स्वजन के साथ खेत पर गए बालक की पास की नदी में नहाते समय डूबने से मौत हो गई। पुलिस के अनुसार मृतक का नाम पांच वर्षीय अंकित पुत्र सुनील भाभर है। बुधवार को शव का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया।

'सौभाग्यमुनिजी को मेवाड़ में भगवान की तरह पूजते हैं'

थांदला। आचार्यश्री उमेशमुनि जी 'अणु' के शिष्य प्रवर्तक जिनेन्द्रमुनि जी के सान्निाध्य में पौषध भवन पर आयोजित गुणानुवाद सभा में श्रमणसंघीय महामंत्री सौभाग्यमुनि जी 'कुमुद' को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभा को सम्बोधित करते हुए जिनेन्द्रमुनि जी ने कहा कि 1987 में आयोजित पुणे के साधु सम्मेलन में सौभाग्यमुनि जी को श्रमणसंघ के महामंत्री पद पर नियुक्त किया गया था। उस समय उनकी भावना थी कि आचार्य पद का दायित्व गुरुदेव उमेशमुनि जी संभालें। इसके लिए उन्होंने प्रयास भी किए, लेकिन गुरुदेव सहमत नहीं हुए। उनके धर्मदास सम्प्रदाय से निकट के संबंध थे तथा सदैव एकता के पक्षधर रहे और श्रमणसंघ के हित में कार्य किया। मेवाड़ (राजस्थान) में उनको भगवान की तरह पूजा जाता है। वे कवि, ओजस्वी वक्ता और साहित्यकार थे। उनके देवलोकगमन से श्रमणसंघ को अपूरणीय क्षति हुई है। धर्मदास गण परिषद के संगठन मंत्री भरत भंसाली ने सौभाग्यमुनि जी के गुरु प्रवर्तक अम्बालाल जी का स्मरण करते हुए कहा कि मेवाड़ परम्परा धर्मदास सम्प्रदाय के 99 टोलों में से ही निकली हुई है। वे श्रमणसंघ व धर्मदास गण के बीच की महत्वपूर्ण कड़ी थे। श्रीसंघ अध्यक्ष ने सभा का संचालन करते हुए सौभाग्यमुनि जी का जीवन परिचय दिया। अंत में चार लोगस्स के कायोत्सर्ग किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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