मेघनगर (नईदुनिया न्यूज)। मेघनगर में शुक्रवार को भी भारी संख्या में विभिन्ना यात्री ट्रेनों से यात्री उतरे। इन यात्रियों में बहुलता आदिवासी श्रमिक वर्ग की थी। रतलाम होकर आने वाली ट्रेनों में राजस्थान के कोटा, रामगंजमंडी, सवाईमाधोपुर, जयपुर, जोधपुर आदि नगरों से वापस लौटने वाले श्रमिक थे। वहीं दाहोद होकर आने वाली ट्रेनों में गुजरात के अहमदाबाद, कच्छ, भुज, सूरत, अंकलेश्वर, राजकोट, गांधीधाम, वलसाड़, वापी आदि स्थानों से अपने घरों की ओर लौटने वाले श्रमिक थे।

मेघनगर रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों की संख्या में प्रतिदिन यात्रियों का आवागमन हो रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम के पास इनकी जांच की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। एक ही ट्रेन से सैकड़ों सवारियां उतर कर सीधे प्लेटफार्म के बाहर बिना किसी रोक-टोक के आ जाती हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुछ यात्रियों की जांच की जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि जांच किए जाने वालों और उतरने वाले यात्रियों की संख्या में बहुत बड़ा अंतर होता है। इस संबंध में मेघनगर के स्वास्थ्य अधिकारी डा. पायस ने बताया कि हमारे पास जितना भी स्टाफ है वह हमने लगा दिया है। हमारे द्वारा अनुविभागीय अधिकारी को शिक्षकों तथा अन्य विभागों से सहयोग के लिए मांग की गई है जिससे यहां आने-जाने वाले यात्रियों की जांच करने में पर्याप्त सहयोग मिल सके। स्टेशन मास्टर से भी हमने मांग की है कि प्लेटफार्म पर प्रवेश व निर्गम के दो द्वार में से एक को बंद किया जाए ताकि जांच में सुविधा रहे।

नहीं मिली कोई व्यवस्था

ग्राम कालियावीरान के सेतु मुणिया ने बताया कि राजस्थान के सवाई माधोपुर से अलग-अलग ट्रेन से 2 दिनों में हम यहां पहुंचे हैं। रास्ते में खाने-पीने के सामान की व्यवस्था भी खत्म हो गई। ठेकेदार ने हमारे मजदूरी के पैसे भी नहीं दिए। बड़ी मुश्किल स्थिति में हम यहां तक आए, लेकिन यहां पर पीने के पानी की उचित व्यवस्था भी नहीं मिली। पिछली बार तो यहां पर भोजन के पैकेट भी दिए गए थे और बसों द्वारा घर तक निशुल्क भेजने की व्यवस्था भी की गई थी।

फैक्ट्री बंद होने से लौटना पड़ा

अंकलेश्वर से मेघनगर प्लेटफार्म पर उतरने वाले ग्राम सेमलीपाड़ा के राजू डामोर ने बताया कि गुजरात में हम जिस फैक्ट्री में काम कर रहे थे, वह फैक्ट्री बंद हो चुकी है। कोरोना का प्रकोप बहुत फैल चुका है। इसी कारण हम अपने परिवार सहित बड़ी कठिनाई से अलग-अलग ट्रेन पकड़ कर यहां तक पहुंचे हैं। यहां आने के बाद भी हमारी परेशानी कम नहीं हुई है। यहां से घर पहुंचने के लिए साधनों की उचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में हम गरीबों की समस्या को सुनने वाला कोई भी नहीं है।

पिटोल सीमा पर कैंप लगे तीन दिन हो गए, स्क्रीनिंग एक की भी नहीं

पिटोल। झाबुआ जिले के प्रभारी मंत्री हरदीपसिंग डंग नें हालात को भांपकर जिले में पिटोल सहित गुजरात से आने वाले 8 पाईंट पर जांच दल बैठाने की बात कही व गुजरात से आने वालों की स्क्रीनिंग किए जाने के निर्देश भी दिए किन्तु आज तक हालात सिर्फ रस्म अदायगी जैसे नजर आ रहे हैं। पिटोल में तीन दिन से कैंप में किसी भी मेडिकल विभाग से डाक्टर के नहीं पहुंचने के कारण स्क्रीनिंग व ऑक्सीमीटर से जांचें नहीं हो पाई हैं जबकि दल के अन्य सदस्य बगैर निर्देशों के जांच कार्य नहीं कर पाए हैं। ड्यूटी पर जरूर तैनात हैं।

जिन डाक्टर की लगाई ड्यूटी वे ही संक्रमित

नोडल अधिकारी श्रम निरीक्षक संजय कनेश ने बताया कि शुक्रवार को जिन डाक्टर की ड्यूटी लगाई थी, वे ही पाजिटिव निकले हैं, इसलिए जांच चौकी पर नहीं पहुंच सके।

Posted By: Nai Dunia News Network

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