झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आत्मोद्धार वर्षावास में शुक्रवार को स्थानक भवन में जिनेंद्र मुनि जी ने कहा कि जीव और कर्म का अनादिकाल से संबंध रहा है। जीव पूर्ण रूप से कर्म से बंधा हुआ है, वह कर्म के अधीन रहने के कारण कर्म बंध करता रहता है। जीव को कर्म का स्वरूप अभी तक सही रूप से समझ में नहीं आया है। जब समझ में आ जाएगा कि मेरी आत्मा अनादिकाल से संसार कर्म के कारण परिभ्रमण कर रही हैं तो वह कर्म से मुक्त हो सकता है। जीव महामोह, मिथ्यात्व और मायाजाल में उलझा हुआ है तथा संसार में दुख उठा रहा है।

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति किसी असहाय, दीन-दुखी, गरीब की सहायता करके उसे अपने जैसा बना देता है, संपन्ना बना देता है, परंतु वक्त आने पर सहायता प्राप्त व्यक्ति कृतघ्न बन जाता है। संसार में ऐसे व्यक्ति बहुत हैं। कृतज्ञता करने वाले की संपत्ति भी ह.डप लेते हैं, ऐसे व्यक्ति के मन में अशुभ भाव आते हैं तथा वह हत्या तक कर देता है। ऐसा व्यक्ति इस प्रकार के कृत्य करके महामोहनीय कर्म का बंध कर लेता है। जिन व्यक्तियों ने सहयोग दिया, माता-पिता, गुरु के प्रति कृतज्ञता प्रगट करने पर आदर के भाव आते हैं, कृतज्ञ बनने पर उसके परिणाम में कठोरता आती है। तिर्यंच भी अपने उपकारी के प्रति कृतज्ञ होते हैं। उपकारी की रक्षा करना चाहिए, कृतज्ञता नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संसार में कुछ व्यक्ति ईर्ष्या व जलन की भावना से युक्त होते हैं। ऐसे व्यक्ति मलीन बनकर अपने उपकारी के लाभ में विघ्‌न उत्पन्ना करके कर्म बंध करते हैं। वे जलन और ईर्ष्यावश अपने ऊपर किए हुए उपकार को भूल जाते हेैं तथा उसके बारे में विपरीत सोचता है। वह छल प्रपंच करके उपकारी को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे व्यक्ति का हृदय कठोर होता है तथा हृदय के भाव मलीन हो जाते हैं। दिनभर मन में बुरे विचार आते रहते हैं। संसार में जीव कई प्रकार के छल-प्रपंच करके कर्म का बंध करता है। मोह कर्म में वह अपना भान भूल जाता है। जीव मोह में आबद्ध होकर दूसरों पर अपना अधिकार जमाना चाहते हैं। व्यक्ति क्रोध में आकर ईर्ष्या जलन कर कर्म बंध करता है, फिर बार बार क्रोध कर भव-भव तक कर्म बंध करता रहता है। जलन ओर ईर्ष्या भंयकर आग है, इसमें जलकर व्यक्ति अपने आत्मगुणों को समाप्त कर लेता है।

धर्मसभा में अणुवत्स पूज्य संयत मुनि जी ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी जी ने अंतिम देशना में गर्गाचार्य आचार्य के बारे में बताया कि उनके बहुत सारे शिष्य थे, कोई शिष्य क्रोधी, अहंकारी थे। शिष्य उनकी आज्ञा का पालन नहीं करते थे। आचार्यश्री के समझाने पर भी वे नहीं समझे तो आचार्यश्री उनको छोड़कर चल दिए। संयमी साधु उनकी खुशामद नहीं करते हैं, वे अप्रतिबद्ध रहते हैं, किसी से बंधे हुए नहीं होते हैं। साधु और गृहस्थ में अंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि साधु किसी से दबे हुए नहीं होते हैं, जबकि गृहस्थी दबा हुआ रहता है। भगवान ने असंयम को छोड़कर संयम अपनाने की बात कही। जिसको यह संसार असार और दुखमय लगे, उसको संसार छोड़ना चाहिए। संसारी व्यक्ति को दूसरों की चमचागीरी करना पड़ती है, संबंधियों की जी-हुजूरी करना पड़ती है। साधु को श्रावक की खुशामद नहीं करना पड़ती है, किसी की अपेक्षा नहीं करना पड़ती है। साधु को संसारी जैसे कार्य करना ही नहीं है, इसलिए ऐसे पांच महाव्रतधारी को किसी की भी जी हुजूरी नहीं करना पड़ती है। केवल सामयिक करने वाले व्रतधारी ही विशेष अतिथि होते हैं। साधु के वस्त्र, पात्र चोर चुरा ले, सामान लूट लें तो वे चोर-डाकू की गरज खुशामद नहीं करते, परंतु गृहस्थ को इस प्रकार की स्थिति आने पर खुशामद करना पड़ती है। अतः संयम ही श्रेष्ठ रास्ता है। संयम अच्छा है, संयम ही ग्रहण करने योग्य है।

तप से कटते हैं भव के बंधन

निधिता रूनवाल, आरती कटारिया के 31 उपवास पूर्ण होने पर उनका बहुमान तप की बोली लगाकर प्रवीणा दुग्ग.ड ने 16 उपवास, मीनाक्षी मेहता ने 11 उपवास की बोली लगा कर किया। अक्षय गांधी ने 31, आजाद बहिन श्रीमाल ने 17, भीनी कटकानी ने 10 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। 10 तपस्वी वर्षीतप तथा अन्य कई तपस्वी सिद्धितप, मेरूतप तथा अन्य तपस्या कर रहे हैं। तपस्वियों की तपस्या के उपलक्ष्य में चौबीसी का आयोजन दिन में तथा रात में चल रहा है। प्रवचन का संकलन सुभाष ललवानी ने किया। सभा का संचालन प्रदीप रूनवाल ने किया।

भक्ति : नवकार आराधना का समापन आज, तपस्वियों का निकाला जाएगा वरघोड़ा

-4 अगस्त से चल रही थी तपस्या

झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। झाबुआ में आचार्य नित्यसेन सुरीश्वर जी मसा और साधु-साध्वी मंडल की निश्रा में चार अगस्त से प्रारंभ हुई नवकार आराधना का समापन शनिवार को सुबह नौ बजे होगा। अध्यक्ष मुकेश जैन और सचिव भरत बाबेल ने बताया कि आत्मानंदी चातुर्मास अंतर्गत झाबुआ में पुण्य सम्राट पूज्य जयंतसेन सुरीश्वर जी के पट्टधर पूज्य आचार्य नित्यसेन सुरी जी और साधु-साध्वी मंडल की निश्रा में चार अगस्त से प्रारंभ नवकार आराधना का समापन शनिवार को होगा। सुबह तपस्वियों का वरघोड़ा आराधना स्थल से झाबुआ ऋषभदेव बावन जिनालय आएगा और नगर में वरघोड़ा होता हुआ पुनः आराधना स्थल पहुंचेगा। सभी तपस्वियों के हाथ में तिरंगा झंडा भी रहेगा। सभी तपस्वी श्वेत पोशाक में रहेंगे। आराधना स्थल पर पारणा होगा। अंतिम दिवस शुक्रवार को पूज्य आचार्यश्री और साधु-साध्वी मंडल की निश्रा में नवकार भाव यात्रा का आयोजन हुआ। सुबह संघपति बने प्रेमलता लुणावत, पुष्पा व लीलाबेन भंडारी परिवार को श्री संघ बाजे-गाजे से आराधना भवन लाए। यहां पूज्य आचार्यश्री ने संघपति परिवार को मंगल आशीर्वाद दिया।

तपस्वियों के पारणा से होगा समापन

नौ दिवसीय आराधना का शनिवार को तपस्वियों के पारणा से होगा समापन । वरघोड़ा निकलेगा आराधना स्थल से तपस्वियों का आचार्यश्री और साधु-साध्वी मंडल की निश्रा में निकलेगा वरघोड़ा। 700 के लगभग तपस्वी वरघोड़े में शामिल रहेंगे। आराधक ऋषभदेव बावन जिनालय दर्शन कर पुनः आराधना स्थल पहुंचेगे। यहां पारणा उत्सव का आयोजन होगा।

आचार्यश्री के मंगलाचरण से प्रारंभ हुई भावयात्रा

शुक्रवार को इसके बाद नवकार भावयात्रा पूज्य आचार्यश्री के मंगलाचरण से प्रारंभ हुई। शुक्रवार को नवकार अंतिम पद पड़मम हवाई मंगलम में परोली तीर्थ, ढंकगिरी तीर्थ, मंडार तीर्थ, हस्तिनापुर तीर्थ, वडाली तीर्थ, ईडर तीर्थ, मंदसौर तीर्थ, लक्षमनी तीर्थ की भावयात्रा पूज्य मुनिराज प्रशमसेन विजय जी मसा ने विशेषता बताते हुए संपन्ना करवाई। आज एकासने और समस्त नवकार आराधकों के पारणे कराने के लाभार्थी श्री नवकार महामंत्र के अखंड आराधक स्व. सुजानमल चंदाबाई की स्मॄति में चंद्रसेन, प्रकाश, प्रदीप कटारिया रहे। इनका बहुमान लाभार्थी श्रीसंघ अध्यक्ष मनोहर भंडारी और चातुर्मास समिति अध्यक्ष मुकेश जैन नाको.डा परिवार ने किया।

मासक्षमण की दीर्घ तपस्वी रश्मि रुनवाल का बहुमान

झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वरिष्ठ सुश्रावक मानमल रूनवाल की पुत्रवधू रश्मि दिनेश रुनवाल ने आचार्य भगवंत जिनशासन गौरव पूज्य गुरुदेव उमेश मुनि जी मसा के अंतेवासी शिष्य बुद्धपुत्र प्रवर्तक जिनेंद्र मुनि जी की सद्प्रेरणा से 31 उपवास की तपस्या पूर्ण की। तपपूर्ति महोत्सव पर श्रीसंघ ने बहुमान किया। इस अवसर एक निजी गार्डन पर आयोजित तपपूर्ति महोत्सव में स्थानवासी जैन श्री संघ की ओर से प्रदीप रुनवाल, पद्मा देवी रुनवाल, मनीष नाहटा, मेघा बडौला, दिव्या नाहटा, पंकज बोराना, प्रमोद भंडारी, नवीन खींवसरा, प्रदीप रुनवाल, पंकज मोगरा, शैलु बाबेल, देवेन्द्र सोनी, मधु खींवसरा, पारसमल नाहटा, अशोक रुनवाल, नीरज राठौ.ड ने तप अनुमोदनार्थ प्रस्तुति दी। संचालन रितेश रुनवाल ने किया। इस अवसर पर रुनवाल परिवार द्वारा एक निजी गार्डन पर तपपूर्ति महोत्सव रखा गया। जिसमें विभिन्ना शहरों से धर्मानुरागी परिजनों व स्वजनों ने उपस्थित होकर तप की अनुमोदना की।

Posted By: Nai Dunia News Network

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