झाबुआ(नईदुनिया प्रतिनिधि)। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मंगलवार को वर्षा का आगमन झाबुआ में हुआ । सुबह से ही बादलों ने अपना डेरा जमा लिया। हालांकि, रिमझिम वर्षा का दौर ही चलता रहा । पंचायत चुनाव निपटते ही अब किसानों ने हल थाम लिए हैं । तेजी से बोवनी चल रही है। वैसे एकमात्र जिले का पेटलावद केंद्र ही ऐसा है, जहां इंद्र देवता की कृपा बनी हुई है, इसलिए क्षेत्र में बोवनी कार्य पूर्ण होने को है, जबकि जिले के अन्य क्षेत्रों में तो अब शुरुआत हो रही है।

जून में आने वाला मानसून अब तक जिले पर ठीक से मेहरबान नहीं हुआ था, लेकिन मंगलवार की सुबह से माहौल बदल गया है । सुबह से ही झाबुआ में अंधेरा छाया रहा। बादल छाए रहे और ऐसा लगा कि अब झमाझम वर्षा होगी, मगर रिमझिम से बात आगे नहीं बढ़ी । रुक-रुककर ही अमृत बरसा।

बोवनी की शुरुआत

25 जून को प्रथम व एक जुलाई को दूसरे व अंतिम चरण के पंचायत चुनाव हो चुके हैं। मतदान व मतगणना के बाद वातावरण भी अब ठंडा होता जा रहा है। वैसे कुछ गांवों में चुनावी रंजिश के चलते विवाद हो रहे हैं। इसी बीच आम ग्रामीण ने अब चुनाव भूलकर अपना ध्यान बोवनी करने पर केंद्रित कर लिया है।

पेटलावद में बोवनी सबसे पहले

जिले में अब तक पेटलावद ही अन्य केंद्रों से अलग चल रहा है। अन्य केंद्रों में पिछले साल के मुकाबले कम वर्षा हुई, लेकिन पेटलावद पिछले वर्ष के आंकड़े पर आ गया है । ऐसे में बोवनी का लक्ष्य भी इसने सबसे पहले पा लिया है। दूसरे केंद्रों पर अब तक बोवनी कार्य ने जोर ही नहीं पकड़ा है।

वर्षा की स्थिति मिमी में

केंद्र अब तक हुई पिछले वर्ष अब तक

झाबुआ 52.1 94.3

रामा 93.1 141.0

थांदला 51.0 166.2

पेटलावद 110.2 110.7

रानापुर 44.0 219.0

मेघनगर 58.0 171.0

औसत 68.0 150.3

बोवनी का लक्ष्य

- 189261 हेक्टेयर में बोवनी होना है

- 59206 हेक्टेयर में अनाज

- 7830 हेक्टेयर में दलहन

- 84970 में तिलहन

- 33000 हेक्टेयर में कपास

- 4255 में अन्य फसलें

बोवनी इतनी अब तक

- 1032 हेक्टेयर झाबुआ में

- 6170 हेक्टेयर रामा

- 0.079 हेक्टेयर रानापुर

- 0.140 हेक्टेयर थांदला

- 53775 हेक्टेयर पेटलावद

-4055 हेक्टेयर मेघनगर

एक नजर में

-11 लाख 91 हजार आबादी

-773 मिमी जिले की औसत वर्षा

- 1 लाख 71 हजार किसान परिवार

- 06 विकासखंड

श्रावण नजदीक ही

13 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है । इसके साथ ही पावन श्रावण मास की शुरुआत भी हो रही है । श्रावण के सेरों का हमेशा ही इंतजार बना रहता है। इस बार विलंब से मानसून आया है। ऐसे में अब लगातार जिले में अमृत बरसने की उम्मीद की जा रही है । पहले ही कृषि सत्र कुछ विलंब से चल रहा है ।

31 जुलाई तक फसल बीमा

इधर, कृषि विभाग ने किसानों से फसल बीमा करवाने का आग्रह करना शुरू कर दिया है । 31 जुलाई इसके लिए अंतिम तिथि रखी गई है । किसानों को इसके पूर्व अपनी फसल का बीमा करवाना होगा। किसी भी परिस्थिति में यह बीमा किसानों के लिए राहत का कारण बन जाता है।

बरसने वाले बादल हैं

कृषि विभाग के उपसंचालक नगीन रावत का कहना है कि अब झमाझम वर्षा होगी । शुरुआत हो चुकी है। ये बरसने वाले बादल हैं।

बादलों ने समझी धरा की वेदना, झमाझम बरसे बदरा

- लंबी खेंच के बाद झमाझम हुई वर्षा से किसानों के चेहरे खिले

पेटलावद (नईदुनिया न्यूज)। क्षेत्र में वर्षा रूठ गई थी। गर्मी और उमस ने नागरिकों का हाल बेहाल कर रखा था, वहीं किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी थीं, लेकिन मंगलवार शाम से हुई झमाझम वर्षा से मौसम में ठंडक घुल गई, इससे लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। वहीं किसानों के मुरझाए चेहरे भी खिल उठे। इनका कहना था कि यह बारिश किसी अमृत से कम नहीं है।

रूठे मानसून से मुरझा रही फसलों को वर्षा से मिली संजीवनी

गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से आसमान से आग बरस रही थी। दिन ही नहीं रात में भयंकर गर्मी का सामना करना पड़ रहा था। चिलचिलाती गर्मी ने हर किसी को बेहाल करके रख दिया था। उमस भरी गर्मी से चैन की नींद एकदम गायब सी हो गई थी। लेकिन फिर कई दिन बाद शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक में बादलों ने धरा की वेदना को समझा और शाम से लेकर रात में हुई वर्षा ने मौसम को बदलकर रख दिया। क्षेत्र में कुछ जगह हल्की वर्षा हुई, लेकिन शहरी क्षेत्र में तो एक बूंद नहीं गिरी। वर्षा नहीं होने का सबसे ज्यादा असर फसलों पर पड़ा। कई गांवों में फसलें सूख गईं, वहीं बारिश का इंतजार कर रहे हैं किसानों को अन्य स्रोतों से खुद सिंचाई करना पड़ी। लंबे समय बाद मंगलवार को सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। शाम चार बजे बाद आसमान में छाए बादल मेहरबान हुए, फिर वर्षा का दौर शुरू हुआ। क्षेत्र में अच्छी वर्षा से गर्मी से राहत मिली तो फसलों को लेकर किसानों की चिंता भी कम हुई।

वर्षा ने किसानों की उम्मीद जगाई

बरवेट(नईदुनिया न्यूज)। अंचल से रूठा हुआ मानसून पिछले तीन दिनों से सक्रिय होने से किसानों को राहत मिली है। रविवार की तरह सोमवार व मंगलवार को रुक-रुककर वर्षा हो रही है। आसमान में काले काले बादलों की आवाजाही लगी हुई है। वर्षा होने से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली तो किसानों के सामने खेती-किसानी को लेकर जो चिंता थी, वह दूर होती दिखी।

पिछले एक पखवाड़े से वर्षा न होने का सिलसिला रविवार को टूट गया। बरवेट अंचल में अच्छी वर्षा होने से खरीब की फसलों की बोवनी ने जोर पकड़ लिया है। वर्षा अधिक होने से खेतों में जल जमाव से वराप नहीं आया है, जिससे बोवनी में समस्या आ रही है।

हाथ से बुआई कर रहे किसान

बरवेट क्षेत्र में 23 जून को कई किसानों ने बुवाई कर दी थी। इसके बाद से मानसून रूठ सा गया था। जिससे सोयाबीन मक्का और कपास के 20 प्रतिशत बीज का जर्मीनेशन नहीं हो पाया था। वह अब हाथों से खेतों में बीज बो रहे हैं।

तीन दिन से वर्षा का सिस्टम फिर से बना

पिछले तीन दिन से वर्षा का सिस्टम फिर से बना हुआ है। जिससे रुक-रुककर तेज वर्षा हो रही है। वर्षा से जल स्रोत और खेतों को पानी मिलने लगा है। हालांकि अभी बहुत पानी की जरूरत है जिससे किसान रोपाई का कार्य कर सकें। खेतों में लबालब पानी का भराव हो, इसके लिए प्रतिदिन झमाझम वर्षा की जरूरत है। वर्षा न होने के कारण किसान चिंतित थे। क्षेत्र के कई हिस्से में खरीफ फसल की बोवनी लगातार पिछड़ती जा रही थी। जानकारों का कहना है कि जून के अंतिम सप्ताह में सोयाबीन की खेती से उत्पादन बेहतर रहता है, लेकिन मानसून ने जिस तरह जून के पहले पखवाड़े में दस्तक दिया था। वह सिलसिला बीच में ही टूट गया। रविवार से आसमान में छाए बादल और रुक- रुककर हो रही वर्षा ने किसानों में फिर उम्मीद बढ़ा दी है। आने वाले दिनों किसान खाद, बीज और दवाई के छिड़काव में व्यस्त रहेंगे, ताकि बोवनी के बाद में फसल की ग्रोथ बढ़ सके।

पहली बार पारा में झमाझम, छाई खुशी

पारा(नईदुनिया न्यूज)। लंबे इंतजार के बाद अंततः मंगलवार को काले-काले मेघ पारा में जमकर बरसे। यूं तो क्षेत्र में दो से तीन बार जोरदार वर्षा हो चुकी है, लेकिन पांच से सात मिनट बाद अचानक यह थम जाती थी। इससे उमस भी बढ़ जाती थी। लेकिन पिछले तीन-चार दिनों से माहौल बनाने के बाद मंगलवार को सुखद वर्षा का दौर खबर लिखे जाने तक जारी था। पारा क्षेत्र में अब तक बुआई का काम लगभग पूरा हो चुका है। वर्षा के बाद किसानों के साथ आमजनों में उत्साह छा गया है।

वर्षा मापी यंत्र के बगैर अंदाज से करते हैं आकलन

वर्षो पूर्व स्थानीय अस्पताल जो कि बखतपुरा में संचालित होता था, वहां पर वर्षा मापी यंत्र लगा था। मगर पारावासियों की किस्मत तो देखिए विकासखंड का दर्जा, पुलिस थाना, हायर सेकेंडरी स्कूल भवन, धमोई से पारा पेयजल की व्यवस्था, पारा-मोहनखेड़ा-राजगढ़ मार्ग, पारा- रानापुर मार्ग, तहसील या टप्पा तहसील का दर्जा, खेल मैदान, अग्निशमन यंत्र, स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक तो ठीक एक वर्षा मापक यंत्र तक लगाने को शासन-प्रशासन के पास फुर्सत नहीं है, इसलिए कालीदेवी या झाबुआ का वर्षा का आंकड़ा ही पारा का मान लिया जाता है।

अभी तेज व झमाझम वर्षा का इंतजार

रानापुर (नईदुनिया न्यूज)। लंबे समय के बाद मंगलवार को सुबह से ही आसमान में बादल डेरा जमाए बैठे थे। दोपहर दो बजे बाद अचानक अंधेरा होकर रिमझिम वर्षा का दौर शुरू हुआ, जो शाम तक चलता रहा। इससे मौसम खुशनुमा हो गया। वर्षा से नगर में स.डकों पर पानी से कीच.ड हो गया। इस रिमझिम बरसात से किसानों के साथ सभी वर्ग खुश दिखे व चिंता की लकीरे कुछ हद तक दूर हुई। हालांकि अभी तेज व झमाझम बरसात का इंतजार है। खेत व नदी-नाले सभी सूखे प.डे हैं।

घुघरी में तेज वर्षा

घुघरी (नईदुनिया न्यूज)। लंबी खेंच के बाद मंगलवार को दोपहर 3ः30 बजे तेज वर्षा हुई। रतलाम और झाबुआ से गुजरने वाले वाहनों को हेडलाइट चालू करना पड़ी।

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close