यशवंतसिंह पंवार, झाबुआ।

झाबुआ के 256 साल पुराने बड़े तालाब के अच्छे दिन लाने की कवायद तेजी से इन दिनों चल पड़ी है । 1990 के बाद रविवार को उसका एक गेट खोला गया। दूसरा गेट भी युद्ध स्तर पर सफाई कार्य चलने के बाद मंगलवार-बुधवार तक खोलेने की संभावना है । इस कार्य के लिए बड़वानी से विशेषज्ञों का दल बुलवाया गया था। तालाब के गहरीकरण व घाटों की सफाई पिछले दो दिनों से चल रही है । पहले ही तालाब 75 प्रतिशत तक खाली हो चुका है । उसको खाली करने की मुहिम दो मई से आरंभ हुई और इसके पानी को मेहताजी के तालाब व हाथीपावा की पहाड़ी पर हरियाली लाने के लिए भेजा गया । इसी बीच झाबुआ के वैभव को स्थायी रूप से समस्या मुक्त बनाने के लिए एक साल तक तालाब को खाली रखने की आवाज उठ रही है । हालांकि कलेक्टर का कहना है कि यह संभव नहीं होगा ।

जिला मुख्यालय की शान कहे जाने वाले बड़े तालाब की दुर्दशा देखकर कई आंखें नम होती रही हैं । तीन दशक से यह तालाब घोर उपेक्षा का शिकार चल रहा है । अब जाकर युवा कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने इसकी सुध ली है । दरअसल, समस्या के चक्रव्यूह में फंसे तालाब को बड़े ऑपेरशन की जरूरत है । एक बड़े वर्ग का मानना है कि मानसून आने में ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में तालाब का शत-प्रतिशत जीर्णोद्धार कार्य अपनी मंजिल तक पहुंच नर्हीं पाएगा।

चार सदस्यों की टीम आई

तालाब के गेट खोलने के लिए संसाधनों की कमी है । ऐसे में तालाब के गेट खोलने के लिए बड़वानी से जल संसाधन विभाग ने दल बुलवाया । चार सदस्यों का दल रविवार को सुबह 10 बजे आया । आधे घंटे में ही एक गेट खोल दिया गया। सफाई होने के बाद ही दूसरा गेट अगले दो-तीन दिन में खुल पाएगा । इस दौरान मिट्टी के बीच दबी एक पुरानी गणेश जी की प्रतिमा भी मिली है।

यह है समस्याएं

- 20 साल से हो रही जलकुंभी

- 3 हजार से अधिक मकानों के ड्रेनेज तालाब में

- 3-4 बीघा में अतिक्रमण फैला

- 10-12 किमी दूर से आ रही पानी की आवक को रोका जा रहा

एक नजर में

- 1766 में राजा बहादुरसिंह ने तालाब बनवाया

- 68 बीघा के क्षेत्र में था

- 1994-95 से घोर अपेक्षा का शिकार

- 1990 में अंतिम बार सफाई के लिए गेट खुले

- 02 गेट है तालाब के 12 वर्ग फीट के

ऐसे बिगड़ी हालत

- 5-6 शासकीय क्वार्टर नपा ने किनारे पर बनाए

- 2005 में शासकीय गार्डन किनारे पर बनाया

- 03 घाट की बलि इसमें चढ़ गई

- 02 घाट धार्मिक स्थलों के लिए समतल किए

- 100 से अधिक मकान किनारे पर बने

ऐसा था वैभव

-13 घाटों से तालाब आकर्षक लगता था

- 06 कु एं तालाब के किनारे पर

- 03 सुंदर गार्डन राजशाही के जमाने मे

- 03 कक्ष का यूरोपियन गेस्ट हाउस

-25 फीट तक गहराई

अब क्या हुआ अचानक ?

हमेशा तालाब को उपेक्षा से उभारने की मांग चलती रही और प्रशासन लीपापोती करता रहा । आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र सिंह राठौर ने 12 दिसंबर 2019 को तालाब के सीमांकन व सफाई की मांग प्रशासन से की । सीमांकन कार्य पानी होने का कहकर स्थगित किया गया । कलेक्टर मिश्रा से हाल में ही जब गुहार लगाई गई तो वे तत्काल एक्शन में आ गए । जलकुंभी सफाई की मुहिम चलाई। फिर तालाब को खाली करते हुए कलेक्टर ने तालाब को उसका मूल स्वरूप देने के निर्देश दिए।

यह हो रहा कार्य

- 20 दिन से तालाब उद्धार की मुहिम चल रही

- 7-8 बार कलेक्टर अब तक अवलोकन कर चुके

- 02 जेसीबी से चल रही खुदाई

- 50-100 ट्राली मिट्टी निश्शुल्क अब तक उठी

- 22 मई को तालाब का गेट खुला

आगामी दिनों की योजना

- घाट की सफाई

- दीवारों की मरम्मत

- उग रहे बड़े पेड़ों की कटाई

- तालाब का गहरीकरण

- बीच के टापू को हटवाना

- किनारों की गाद हटवाना

- दोनों गेट पर फिर से हैड लगाना

खाली रखना अनिवार्य

आरटीआई कार्यकर्ता राठौर का कहना है कि 68 बीघा क्षेत्रफल वाले तालाब की सफाई व गहरीकरण के कार्य को एक माह में करना संभव नहीं है । कार्य अधिक है। एक वर्ष तक उसको खाली रखकर ही उसका उद्धार किया जा सकता है। पहली बार किसी कलेक्टर ने इस कार्य मे इतनी रुचि दिखाई है।

ड्रेनेज लाइन का कार्य ही लंबा

रहवासी गोपाल नीमा का मानना है कि बड़ी संख्या में किनारे पर बने शासकीय -अशासकीय मकानों का मल-मूत्र सबसे अधिक तालाब को दूषित कर रहा है। ड्रेनेज लाइन का कार्य ही लंबा है। मानसून आने तक यह कार्य नहीं हो पाएगा। एक वर्ष तक खाली रखते हुए सभी समस्याओं से तालाब को स्थायी मुक्ति दिलवाई जा सकती है।

सकारात्मक कदम उठाया

समाजसेवी जितेंद्र सिंह सिसोदिया ने बड़े तालाब के अच्छे दिन लाने की कवायद को आवश्यक बताते हुए प्रशासन के प्रयासों की सराहना की है। उनका मानना है कि पहली बार इतनी रुचि प्रशासनिक स्तर पर देखने को मिल रही है। जनता को सहयोग के लिए आगे आना चाहिए।

मिट्टी आकर ले जाएं

कलेक्टर मिश्रा ने आह्वान किया है कि सभी अपनी ट्रैक्टर-ट्राली लाकर तालाब की मिट्टी निश्शुल्क ले जाएं । तालाब के गहरीकरण व सफाई कार्य में हर कोई सहयोग के लिए आगे आएगा तो यह कार्य जल्दी व बेहतर ढंग से हो सकेगा। एक साल तक उसको खाली रखना संभव नहीं होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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