जगदीश प्रजापति, बरवेट।

परंपरागत खेती को छोड़कर आज कई किसान नवीन कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती में मोटा उत्पादन ले रहे हैं। कृषि की इन आधुनिक तकनीकों में एक तकनीक नेट हाउस खेती भी है। जिससे किसान आज दोगुना उत्पादन ले रहे हैं वो भी उच्च क्वालिटी में। नेट हाउस खेती को अपनाने वाले ऐसे ही झाबुआ जिले के दर्जनों किसान अब हाइब्रिड खेती में नई इबारत लिख रहे हैं। यहां के युवा किसान नेट हाउस खेती के जरिये कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर रहे हैं।

खराब मौसम से फसलों को बचाने के लिए नेट हाउस में खेती का चलन का बढ़ रहा है। वहीं गुणवत्ता और आकार के मामले में तो इनका कोई जवाब ही नहीं होता। यहीं कारण है कि किसानों को अच्छी कीमत मिलती है और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होती है। नेट हाउस या पाली हाउस में आम तौर पर सब्जियों की खेती की जाती है। संरक्षित खेती में विशेष तौर से छोटे आकार के फलों को ही उगाया जाता है। लेकिन नेट हाउस में अब खीरा ककड़ी की खेती भी हो रही है। झाबुआ जिले के बरवेट क्षेत्र में किसानों ने पहली बार प्रयोग के तौर पर खेत में नेट हाउस बनाकर खीरा की खेती शुरू की और उन्हें जबरदस्त सफलता मिल रही है।

नेट हाउस में खेती का चलन का बढ़ रहा

-बरवेट के युवा किसान राजाराम पाटीदार ने बताया कि खराब मौसम से फसलों को बचाने के लिए नेट हाउस में खेती का चलन का बढ़ रहा है। साथ ही जैविक और अजैविक कारकों से भी फसल नेट हाउस में प्रभावित नहीं होती। वहीं गुणवत्ता और आकार के मामले में तो इनका कोई जवाब ही नहीं होता। यहीं कारण है कि किसानों को अच्छी कीमत मिलती है ओर उत्पादन भी दो गुना होता है।

किसानों को फायदा

-बरवेट के उन्नात किसान ओमप्रकाश पटेल ने बताया कि नेट हाउस में सभी प्रकार की सब्जियों की खेती कर सकते हैं। उनके मुताबिक महाराष्ट्र में सबसे अधिक नेट हाउस में खेती होती है। वहां पर उन्होंने देखा कि नेट हाउस में केले की खेती भी हो रही है। हमने भी नेट हाउस में खीरा ककड़ी लगाकर शुरुआत की है।

-उन्होंने बताया कि मैंने एक एकड़ में खीरा के पौधे लगाए हैं। उत्पादन प्रारंभ हो गया है। सामान्य तौर पर होने वाली खीरा अब अच्छी क्वालिटी की हो रही है और उत्पादन भी दोगुना हो रहा है। उन्होंने बताया कि नेट हाउस में खीरा की खेती कर किसान उपज को दोगुना ही नहीं, उससे ज्यादा तक बढ़ा सकते हैं।

केंद्र सरकार की मंशा संरक्षित खेती को बढ़ावा

किसानों की आय बढ़ाने के लिए मोदी सरकार कई प्रकार की योजना शुरू कर लाभ पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की मंशा है कि किसानों की आय दोगुना हो। इसके लिए संरक्षित खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। मन की बात में मोदी ने कई बार इसका जिक्र भी किया है। संरक्षित खेती के लिए नेट हाउस बनाने में भी सरकार से मदद मिल रही है। उन्नात किसान गोपाल राठौर बावड़ी वाले के मुताबिक, जब मैंने नेट हाउस बनाया तो सरकार की योजना से 50 प्रतिशत सब्सिडी मिली।

सब्जियों को एक्सपोर्ट कर सकते हैं

नेट हाउस में सब्जियों की गुणवत्ता एक्सपोर्ट लायक होती है। नेट हाउस की फल व सब्जियों का दूसरे कई देशों में निर्यात किया जा सकता है, और इसका सीधा लाभ किसानों को मिलता है। इस समय खीरे की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। यहां के कृषि विज्ञान केंद्र ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका अदा की है।

तेज हवाओं से सुरक्षित रहते हैं फसलों के पौधे

युवा एव प्रगतिशील किसान ओमप्रकाश हरिराम पाटीदार कहते हैं कि नेट हाउस में सब्जियों की खेती में कई फायदे हैं। पहला तो कीट और मौसम की मार का असर नहीं पड़ रहा है। सब्जियों के पौधे तेज हवाओं को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और उखड़ जाते हैं। लेकिन नेट हाउस में इस समस्या से भी निजात मिल जाती है। किसानों का कीट आदि पर लगने वाला खर्च बच जाता है। नुकसान न के बराबर होता है। इसमें पौधे की हाइट आम पौधे से तीन गुना तक बढ़ जाती है। जिससे आय में बढ़ोतरी होती है। वहीं गुणवत्ता इतनी अच्छी होती है कि अच्छे दाम में बिक जाती हैं।

सरकार दे रही सब्सिडी

उद्यानिकी विभाग के एसडीओ सुरेश इनवाती ने बताया संरक्षित खेती के लिए सरकार नेट हाउस के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है। जिसके लिए किसान एमपी आनलाइन पर जाकर मध्यप्रदेश फार्मर्स ट्रेकिंग सिस्टम एमपीएफएसटीएस पर पंजीयन कर सकते हैं। एक एकड़ में 28 लाख चालीस हजार में नेट हाउस तैयार होता है। किसान 14 लाख 20 हजार रुपये नकद देकर नेट हाउस लगा सकता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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