झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाल ही में देवझिरी सोसायटी के पूर्व प्रबंधक भारत सिंह हाड़ा को बर्खास्त कर दिया गया है ।इस मामले में हाड़ा ने सनसनीखेज राजफाश करते हुए गंभीर आरोप लगाया है कि अधिकारी के इशारों पर यह कार्रवाई की गई है । दो लाख रुपये पहले एक मामले में उन्होंने दे दिए थे । उनसे तीन लाख रुपये ओर मांगे गए, लेकिन उन्होंने नहीं दिए तो रंजिश रखते हुए उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है। उनकी जांच अभी चल रही है । इसके बीच में ही उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है । ना तो उनसे कोई जवाब मांगा गया है और ना ही उन्हें कुछ इसके बारे में जानकारी है ।

गौरतलब है कि यह वही प्रबंधक है, जो लोकायुक्त की जांच के घेरे में पिछले साल 16 सितंबर को आए थे । उसके बाद निलंबन की कार्रवाई हुई और अब तो बर्खास्त ही कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई प्रशासक अशोक कुमार जैन ने की है । जैन ने एक जुलाई को हुई संस्था की प्रबंधकारिणी बैठक में लिए गए इस निर्णय का हवाला देते हुए 21 बिंदुओं में हाड़ा के कार्यों का विस्तार से जिक्र किया है।

अभी तक कोई सूचना ही नहीं

उधर हाड़ा का कहना है कि अभी तो उनकी जांच ही चल रही है। इसके बीच सेवा समाप्ति की कार्रवाई आश्चर्यजनक है । उन्हें अभी तक कोई सूचना ही इस बारे में नही दी गई है । आरोप पता लगते तो वे बिंदुवार उनके जवाब भी देते । हालांकि, उन्होंने कहा कि उनके पास तमाम दस्तावेज मौजूद हैं और प्रमाण सहित अपनी बात रखेंगे।

कहानी कुछ और

पूर्व प्रबंधक इस पूरे घटनाक्रम के पीछे की कहानी कुछ और ही बताते है । उनका गंभीर आरोप है कि लेन-देन के लिए इस तरह से टारगेट किया जाता है । एक मामले में पहले अधिकारी को उन्होंने दो लाख रुपये दिए। बाद में उनके ही एक रिश्तेदार व हत्या के आरोपित को वापस सेल्समैन बनाया गया तो उन्होंने विरोध किया । इस मामले में उनसे तीन लाख रुपये मांगे गए । जब उन्होंने नहीं दिए तो उन्हें टारगेट पर ले लिया गया । लगातार रंजिश के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है। यह ताजा कार्रवाई भी उसी का एक हिस्सा है।

मुझे नही मालूम

देवझिरी सोसायटी के प्रशासक जैन का कहना है कि हा.डा जो गंभीर आरोप लगा रहे हैं, उन्हें उसके बारे में कुछ मालूम नहीं है । उन्होंने जो कार्रवाई की है, उसमें सभी आधार लिए गए हैं।

यह है खास

बदनाम हो चुकी सहकारिता..

दरअसल सहकारिता का क्षेत्र जिले में बदनाम हो चुका है। नित-नई गड़बड़ियों का खुलासा आए दिन होता ही रहता है । इसमें लगे अधिकारी-कर्मचारियों का वेतन 25-50 हजार मासिक है, लेकिन संपत्त्ति की जांच की जाए तो हर कोई बड़ा आसामी निकलेगा। हाड़ा के खुलासे से यह साफ है कि लेन-देन भी इस क्षेत्र में जबर्दस्त ढंग से हो रहा है। अन्य मामलों में भी यही तथ्य सामने आता रहा है।

- सीसीबी के पूर्व महाप्रबंधक एसएन सिरोटिया अपने घर त्योहार मनाने जा रहे थे तो रास्ते मे कालीदेवी ही रुक गए और प्रबंधक से डेढ़ लाख रुपये लेकर गए । बाद में डेढ़ लाख रुपये झाबुआ निवास पर प्रबंधक से मंगवाए और इस दौरान ही वे लोकायुक्त के हत्थे चढ़े । मजेदार बात यह है कि कुछ दिनों बाद उन्हें एक अन्य जिले में मुखिया बनाकर भेजने का आर्डर निकल गया।

- लोन माफी में सहकारिता कर्मियों के वारे-न्यारे हो गए। कई खेल पकड़ में ही नही आए। थांदला का एक मामला उजागर हुआ तो तीन कर्मियों को जेल जाना पड़ा ।

-पिछले दिनों कल्याणपुरा में एक बड़ा घोटाला सामने आया।

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close