यशवंतसिंह पंवार, झाबुआ । छोटे तालाब के जीर्णोद्धार के नाम पर अब तक एक करोड़ नौ लाख रुपये का भुगतान हो चुका है । इस कार्य का पब्लिक ऑडिट हो तो अभी तक हुआ तमाम कार्य खारिज कर दिया जाएगा, लेकिन ना तो अफसरों को और ना ही जनप्रतिनिधियों को सरकारी पैसों के इस दुरुपयोग की चिंता है। दुखद पहलू यह है कि इतनी राशि खर्च करने के बावजूद छोटे तालाब की दशा आज तक नहीं सुधरी है । पहले भी यहां से गुजरने पर भयंकर बदबू आती थी और आज भी यही स्थिति है।

दरअसल छोटे तालाब का वैभव ही खत्म कर दिया गया है । केवल तालाब का सौंदर्य निखारने के नाम पर योजना बनाई जा रही है । योजना से किसका भला हो रहा है, यह तो नहीं मालूम, मगर यह तय है कि जनता का तो कुछ भी भला नहीं हो रहा।

2016 में टेंडर हुए

झाबुआ के दोनों बड़े व छोटे तालाब को सजाने-संवारने के लिए 2016 में भोपाल से विशेष योजना स्वीकृत हुई ।टेंडर निकले और कार्य शुरू हुआ। कुछ ही दिनों में कार्य बंद कर दिया गया, लेकिन भुगतान बराबर होता रहा । पांच करोड़ 28 लाख की यह योजना बताई जा रही है।

शिकायतों के बाद लीपापोती

तालाब को संवारने के नाम पर होने वाली राशि के आहरण को लेकर शिकायतें होती रही। साथ ही साथ लीपापोती भी चलती रही । अभी भी यही सिलसिला चल रहा है। रुका हुआ कार्य फिर शुरू किया जा रहा है, ताकि बचा हुआ सरकारी भुगतान वापस निकाला जा सके।

यह था वैभव

रियासतकाल में छोटे तालाब का काफी वैभव रहा । पेयजल पाइप लाइन नहीं थी । यही तालाब आमजन की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करता था । यहां तैराकी स्पर्धा होती थी । राजस्थान के उदयपुर की दोनों लोकप्रिय झील, फतेह सागर व पिछोला के तर्ज पर 19 वी शताब्दी में दो तालाब झाबुआ में बने। दोनों तालाब आपस मे जुड़े हुए थे । धीरे-धीरे इस संपर्क को खत्म कर दिया गया। आसपास बस्तियां व सरकारी आवास बन गए, जिनके मल-मूत्र की निकासी तालाबों में ही कर दी गई।

ऐसे बिगड़ी हालत

- चारों तरफ अतिक्रमण हो गया

- मकानों की गंदगी सीधे तालाब में आने लगी

- तालाब के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग

- अफसरों का शहर के वैभव व भविष्य से लेना-देना नहीं

- जनप्रतिनिधियों की उदासीनता

एक नजर में

-250 वर्ष से अधिक पुराना तालाब

- 50 साल पहले तक इसका पानी पीया जाता रहा

- 2016 में टेंडर निकाला गया

- एक करोड़ 9 लाख का भुगतान हो गया

- 15-16 माह से काम बंद

नपा सीएमओ एलएस डोडिया से सीधी बात

सवाल- छोटे तालाब के कार्य का कितना भुगतान अब तक हुआ ?

जवाब- एक करोड़ के लगभग का भुगतान हो चुका है।

सवाल- एक करोड़ का काम तो नजर नहीं आ रहा ?

जवाब- तालाब के आसपास जालियां लगाई गई हैं।

सवाल - केवल जालियां लगाने में एक करोड़ खर्च हो गया।

जवाब - नहीं,अन्य भी बहुत कार्य हुए हैं । पिचिंग ,भराव, फव्वारे लगाने सहित अनेक कार्य डीपीआर के अनुसार हुए हैं।

सवाल- तालाब में मकानों की गंदगी रोकने के लिए क्या किया ?

जवाब- पाइप लाइन डाली गई है।

सवाल- अभी काम क्यों बंद है ?

जवाब- ठेकेदार ने किसी कारण से काम बंद किया था । अब एक माह में काम पूर्ण करने का कह रहा है। करीब 80 लाख का कार्य बचा हुआ है।

सवाल- बदबू रोकने के लिए क्या करेंगे ?

जवाब- इसके लिए अलग से कुछ करना पड़ेगा।

यह है इनकी पीड़ा

- रहवासी शरद शास्त्री का कहना है कि छोटे तालाब के पास से गुजरना कठिन हो जाता है ।आसपास के क्षेत्र में रहने वालों को राजवाड़ा आने-जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ता है । गंदगी के कारण निकलना दूभर हो जाता है।

-रहवासी मुकेश भाई ने बताया कि बार-बार कहने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है ।आखिर कब तक इस तरह से चलता रहेगा ? तालाब की शक्ल बिगाड़ दी गई है। मनमर्जी से ही कुछ भी योजना बना ली गई ।

- पार्षद साबिर फिटवेल ने बताया कि वे लगातार शिकायत कर रहे हैं, मगर कोई सुनता ही नहीं है ।राशि का भुगतान करने में देरी नहीं की जाती और काम बंद होने के बाद भी भुगतान तो लगातार किया जा रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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