झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि । मासक्षमण उपवास-दो श्रेणी तप की तपस्या हुई। सबसे कम उम्र के सात वर्षीय बालक क्रियांश व 19 वर्षीय लवेश ने 31 उपवास की तपस्या की। इसी के साथ 65 वर्षीय प्रेमलता चंडालिया ने भी 31 उपवास की तपस्या की। महामृत्युंजय तप मासक्षमण के तपस्वी सोमवार को पारणा करेंगे। पुण्य सम्राट पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय जयंतसेन सुरीश्वर जी के पट्टधर पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय नित्यसेन सुरीश्वर जी मसा और साधु-साध्वी मंडल की प्रेरणा से झाबुआ में चल रही।

मासक्षमण उग्र तपस्या का दो दिवसीय पारणा महोत्सव रविवार को प्रारंभ हुआ। रविवार की सुबह पूज्य आचार्यश्री की निश्रा में सभी तपस्वियों का बहुमान श्री संघ अध्यक्ष मनोहर भंडारी परिवार और चातुर्मास समिति अध्यक्ष मुकेश, मनोज जैन नाको.डा परिवार ने किया। सोमवार को शोभायात्रा में बग्घी में भगवान और गुरुदेव की तस्वीर लेकर बैठने का चढ़ावा बोला गया। सुबह स्वधर्मी वात्सल्य का आयोजन लाभार्थी परिवार बाबूलाल, आनंदीलाल संघवी परिवार द्वारा किया गया। दोपहर में प्रभु आदिनाथ पंच कल्याणक पूजन पढ़ाई गई और रात में एक शाम देश के नाम मधुकर ग्रुप और त्रिलोक मोदी के संगीत मंडल के साथ आयोजित हुआ।

जिनालय से प्रारंभ होगा वरघो.डा

सोमवार को मासक्षमण के तपस्वियों का वरघोड़ा सुबह श्री ऋषभदेव बावन जिनालय से प्रारंभ होगा। तपस्वी जिन्होंने मात्र गर्म जल के आधार पर उग्र तपस्या की है, उनके नाम लोकेंद्र बाबेल 34 उपवास, प्रेमलता चंडालिया 33 उपवास, ज्योति मुकेश लोढ़ा 31 उपवास, सपना संघवी, रश्मि रुनवाल, क्रियांश जतिन भाई, मनोज जैन नाको.डा, लोवेश वागरेचा, महेंद्र मूथा, शरद रुनगरेचा, सिद्धार्थ मूथा, श्रेयस मेहता, रुचि जैन, सुहानी बाबेल, प्रतिभा भंडारी, अंजू भंडारी, सरोज सेठिया, पुष्पा कोठारी, ममता धनसुख संघवी, प्राची बरडिया, कुमारी रिंकल मोदी, 30 उपवास, शीतल काठी 22 उपवास, पुष्पक संघवी, श्रुति सकलेचा व निर्मल पोखरना, भावना संघवी 16 उपवास, वीनस कटारिया 14 उपवास। इसके अतिरिक्त श्रेणी तप पुष्पा जैन और स्नेहलता काव.डिया ने किया है।

धन-वैभव में नहीं, संयम में ही सुख है : जिनेंद्र मुनि जी

झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आत्मोद्धार वर्षावास में रविवार को महती धर्मसभा में पूज्य जिनेंद्र मुनि जी महाराज ने कहा कि पहले व्यक्ति व्यापार के लिए जहाज से बाहर जाते थे। जिनका भाग्य प्रबल होता हैं वह लाभ कमाते हैं, जिनका भाग्य कमजोर होता, वे हानि उठाते थे। कभी-कभी तूफान आने के कारण जहाज डूब जाता है। जिसके पुण्य अच्छे हैं, वह बच भी जाते हैं समुद्र के बीच बना हुआ द्वीप सहायक बनता है। संसार में ऐसे भी व्यक्ति हैं, जो परोपकार के कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्ति अन्य की भलाई भी करते हैं, जिससे दुखी व्यक्ति की नैया पार हो जाती है। कोरोना काल में देश में कई ऐसे व्यक्ति, संस्थाओं ने पीड़ित परिवारों, व्यक्तियों की तन-मन-धन से सहायता की थी।

उन्होंने कहा कि उपकार करके उपकारी घमंड न करें। दुनिया में ऐसे कई व्यक्ति हैं, जो ऐसे कार्य करके किसी भी प्रकार की आशा नहीं करते हैं। परंतु संसार में ऐसे व्यक्ति भी होते हैं, जो इस प्रकार के सहयोगी और उपकारी की हत्या भी कर देते हैं। ऐसे व्यक्ति के हृदय में दया और अनुकंपा के भाव नहीं होते। गणधर भगवान के हमारे ऊपर अनंत उपकार है, वे ज्ञान का मार्ग बताकर सन्मार्ग की ओर प्रेरित करते हैं। अज्ञान रूपी अंधकार मिटाकर ज्ञानरूपी प्रकाश दिखाकर मार्ग दिखाते हैं और उपकारी व्यक्ति कष्ट उठाकर भी सहायता करता है, वह दिन-रात नहीं देखता है। ऐसे व्यक्ति के हृदय में यही भाव रहते हैं कि हम दूसरे की सहायता करें, दुखी व्यक्ति के दुख दूर हो। दुनिया में ऐसे भी व्यक्ति होते हैं, जो इस प्रकार के उपकारी व्यक्ति पर ताने भी मारते हैं। उनको ईर्ष्या-द्वेष भी होता है। अच्छा कार्य करने वाले के प्रति कुछ व्यक्ति प्रमोद भाव भी रखते हैं, परंतु अधिकांश को ईर्ष्या होती है, वक्त आने पर वे हत्या मारपीट भी करते हैं। आजकल गुंडों को सुपारी देकर भी हत्या तक करवा देते हैं। इस प्रकार का क्रूर कार्य करने वाला तथा दूसरों से करवाने वाला व्यक्ति गाढ़े कर्म बंध कर दुर्गति का मेहमान बनता है।

मेरू पर्वत पर किया अभिषेक

जमीकंद में अनंत जीव है, इनका त्याग जरूरी है। धर्मसभा में अणु वत्स पूज्य संयत मुनिजी महाराज ने कहा कि भगवान महावीर स्वामीजी का जन्म होने के बाद इंद्रदेव उन्हें मेरू पर्वत पर ले जाकर जन्मा अभिषेक करते हैं। इंद्र को भगवान से बल पर शंका हुई पर भगवान ने अवधि ज्ञान से यह जान लिया था। वे अंगूठा दबाते हैं, जिससे मेरू पर्वत हिल जाता है। इंद्रदेव ने जाना कि भगवान ने अवधि ज्ञान से पर्वत हिला दिया। उनकी शक्ति पर शंका की भी गलती स्वीकार की। एक दिन के भगवान में इतनी शक्ति कहां से आई, उन्होंने क्या खाया? वस्तुत शक्ति बिर्या अंतराय कर्म के क्षयों क्षम्न होने पर आती है। संस्कारी व्यक्ति शक्ति के लिए दवाइयां खाता है, पर शक्ति खाना पचने पर ही आती है।

प्रत्याख्यान लिए

अशोक श्रीमाल करवड़ ने 38 उपवास तथा किरण मूणत रतलाम ने 16 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। आजाद बहन श्रीमाल ने 19, भीनी कटकानी ने 12 उपवास के प्रत्याख्यान लिए। अन्य तपस्वी विभिन्ना तपस्या कर रहे हैं। बुधवार से शुरू होने वाली पंचरंगी तपस्या में श्रावक-श्राविका द्वारा भाग लेने हेतु सहमति व्यक्त की है। तपस्या पूर्ण करने वालों की तपस्या के उपलक्ष्य में परिजनों व उनके रिश्तेदारों द्वारा चौबीसी का आयोजन निरंतर चल रहा है। प्रवचन का संकलन सुभाषचंद्र ललवानी द्वारा किया गया। सभा का संचालन प्रदीप रूनवाल ने किया।

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close