यशवंतसिंह पंवार, झाबुआ।

इन दिनों जिले में शादियों की धूम मची हुई है, मगर यह आयोजन बोर्ड परीक्षा में पूरक प्राप्त करने वाले बच्चों के लिए खतरा बन गए हैं। विशेष केंद्रों में प्रतिदिन इन बच्चों के लिए कक्षाएं चल रही हैं। यहां विषय विशेषज्ञ तो पहुंच रहे हैं मगर शिक्षा के मामले में उदासीन बच्चे इन कक्षाओं से दूरी बनाए हुए हैं। वैवाहिक आयोजन अपनी जगह है, लेकिन कहीं इसके चक्कर में साल ना खराब हो जाए ?

10वीं व 12वीं का बोर्ड परीक्षा परिणाम जिले में इस वर्ष अत्यंत ही निराशाजनक रहा। भोपाल तक जिले के खराब परिणाम की चर्चा है। इसी बीच सेकंड चांस यानी पूरक में आने वाले बच्चों की तैयारी के लिए प्रशासनिक तौर पर कार्ययोजना बनाते हुए उस पर अमल किया जा रहा है, लेकिन विशेष कक्षाओं में इन दिनों बच्चों की उपस्थिति बहुत ही कम है। बताया जा रहा है कि जिले में बनाए गए 40 विशेष केंद्रों में नाममात्र के बच्चे पढ़ने आ रहे हैं। वजह यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शादियों की धूम मची हुई है। जश्न मनाने में मस्त बच्चे स्कूलों से किए जाने वाले मोबाइल भी अटैंड नहीं कर रहे हैं।

2333 बच्चों को सेकंड चांस

आठ सालों में इस वर्ष कक्षा 12वीं का परीक्षा परिणाम बहुत ही कमजोर रहा। वहीं कक्षा 10वीं का परिणाम 2017 के बाद वापस निम्नतम स्तर पर चला गया । दोनों कक्षाओं में 2333 बच्चे पूरक में रहे, वहीं 4759 तो फेल ही हो गए। पूरक परीक्षा 20 जून से होना है । पूरक यानी सेकंड चांस में बच्चों की नैया पार करने के लिए बनाई गई योजना अब खटाई में पड़ती दिख रही है, क्योंकि शादियों के आयोजन रुकावट बनकर सामने आ चुके हैं।

चार घंटे तक चिंतन हुआ

29 अप्रैल को परिणाम आया था। फिर पांच मई को समीक्षा बैठक करते हुए चार घंटे तक चिंतन किया गया । इस मैराथन बैठक में पूरक परीक्षा के लिए बच्चों को बेहतर तैयारी करवाने की योजना बनी । गर्मी की छुट्टियां होने से अतिथि शिक्षकों के आने का सवाल ही नहीं था । ऐसे में विषय विशेषज्ञों के भरोसे यह महत्वपूर्ण कार्य करने का निश्चित किया गया। जिले में 40 केंद्र बनाए गए, ताकि आसपास के सभी विद्यालयों से बच्चे एक ही जगह आकर पढ़ाई कर सकें।

शादियों ने खलल डाला

इस समय 100-150 शादियां ग्रामीण क्षेत्रों में हर दिन हो रही हैं । दिनभर कस्बों से बरात के वाहन निकलते दिखाई पड़ते हैं। डीजे होता है और सामूहिक नृत्य करने की मस्ती होती है । इस मस्ती ने पूरक में रहे बच्चों के एक साल को खतरे में डाल दिया है। बच्चे व उनके अभिभावक मस्ती में डूबे हुए हैं। उन्हें यह जरा भी अंदाज नहीं है कि वे क्या खो रहे हैं?

यह है योजना

- 40 केंद्र जिले में बने

- 8 बजे सुबह से विशेष कक्षा लगती है

- 12 बजे दोपहर तक चलती है

- 100 से अधिक विषय विशेषज्ञों की ड्यूटी

- 25 प्रतिशत के लगभग ही बच्चों की उपस्थिति

यह रहा परिणाम

- 16258 बच्चे 10-12वीं की परीक्षा में रहे शामिल

- 4759 फेल हो गए

- 2333 को पूरक मिली

- 57.01 प्रतिशत परिणाम 12वीं का

- 55.98 प्रतिशत परिणाम 10वीं का

इतने हैं विशेष केंद्र

ब्लाक, केंद्र

- मेघनगर, 11

- पेटलावद, 05

- रामा, 05

- थांदला, 06

- रानापुर, 05

- झाबुआ, 08

कुल, 40

एक नजर में

- 131 हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी जिले में

- 20 जून से आरंभ होगी पूरक परीक्षा

अंग्रेजी-विज्ञान विषय में ज्यादा

इस बार अंग्रेजी व विज्ञान विषय में ज्यादा बच्चों को पूरक मिली है। कक्षा 12वीं में झाबुआ ब्लाक के 231 बच्चों को पूरक मिली है, जिसमें से 111 अंग्रेजी, 50 भौतिकी व 17 जीवविज्ञान में अटक गए हैं । मेघनगर ब्लाक में 80 को पूरक है और उसमें से 43 बच्चे सिर्फ अंग्रेजी में ही अटके हैं। कक्षा 10वीं में झाबुआ ब्लाक के 325 बच्चों को पूरक है, जिसमें से 98 गणित,96 अंग्रेजी व 34 बच्चे विज्ञान में पीछे रह गए । मेघनगर ब्लाक में 137 को पूरक है और इसमें से 76 बच्चे अकेले अंग्रेजी में फेल हो गए।

मोबाइल अटैंड नहीं कर रहे

आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त प्रशांत आर्य उपलब्ध नहीं हुए । उत्कृष्ट विद्यालय के प्रिंसिपल महेंद्र खुराना ने बताया कि बच्चों की उपस्थिति कमजोर ही है । उनसे मोबाइल पर संपर्क करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन वे मोबाइल ही अटैंड नहीं कर रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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