झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हिंदू धर्म में पूर्णिमा का बहुत महत्व है। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक कथाओं की माने तो वैशाख में पूर्णिमा के ही दिन भगवान बुद्ध का भी जन्म हुआ था। वैशाख माह की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में ऐसी भी मान्यता है कि विष्णु भगवान के नौवें अवतार भगवान बुद्ध ही थे। इस वर्ष सोमवार को वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।

ज्योतिष शिरोमणि पंडित द्विजेंद्र व्यास ने बताया कि वैशाख पूर्णिमा पर सोमवार को सुबह जल्दी उठकर पावन नदियों में स्नान का बहुत ज्यादा महत्व है। यदि संभव नहीं हो तो घर में ही एक खाली बाल्टी में गंगाजल डालकर उसे पानी से भरकर स्नान करें। ऐसे में गंगा स्नान का ही पुण्य प्राप्त होता है। इसके बाद घर के मंदिर में साफ-सफाई कर गंगाजल छिड़कें और सभी देवी-देवताओं का अभिषेक करें। ध्यान रहे सबसे पहले भगवान विष्णु का हल्दी से अभिषेक करें, उन्हें तुलसी अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करें, उनकी आरती करें। फिर भगवान को सात्विक चीजों का भोग लगाएं। पूर्णिमा की रात को चंद्रदेव की पूजा की जाती है। रात को चंद्र उदय होने के बाद उन्हें जल का अर्घ्य देने से शुभ फल की प्रप्ति होती है। उन्होंने यह भी बताया कि धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पूर्णिमा के दिन का बहुत ज्यादा महत्व होता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होता है, तो वहीं चंद्रदेव की पूजा करने से दोषों से छुटकारा मिलता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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