पेटलावद। ब्लास्ट के जिम्मेदार राजेंद्र शांतिलाल कांसवा की दुकान के बहीखाते घटनास्थल से निकले मलबे में बिखरे पड़े हैं। इनमें कई लोगों से लेनदेन का हिसाब है। पुलिस ये तो पता लगाने की कोशिश शुरू से कर रही है कि कांसवा माल किससे लेता था और उसने किस-किस को बेचा, लेकिन ये पता लगाने के लिए उसकी दुकान के दस्तावेजों को ढूंढने की कोशिश नहीं की गई। एसआईटी ने एक भी बार कॉलेज के सामने रखे गए मलबे की जांच नहीं की।

घटना के 18 दिन बाद भी खाते और अन्य दस्तावेज मलबे के बीच पड़े हैं। हो सकता है कांक्रीट के मलबे के नीचे और कागज मिल जाएं, लेकिन पुलिस ने अभी तक इस दिशा में सोचा तक नहीं। पुलिस लगातार राजेंद्र कांसवा को विस्फोटक सप्लाय करने वाले धर्मेंद्रसिंह राठौर के दस्तावेज ढूंढने में समय लगाती रही। इतने दिनों में कांसवां के इन दस्तावेजों को काफी नुकसान भी हुआ। हालांकि अब भी पुलिस यही मान रही है कि इतने बड़े विस्फोट में दस्तावेज बचे ही नहीं होंगे।

लाखों का हिसाब

इन बहीखातों और सादे रजिस्टरों में राजेंद्र शांतिलाल कांसवा ने लाखों का हिसाब लिख रखा है। इसमें खाद और विस्फोटक दोनों के हिसाब-किताब लिखे गए। 2015 में ही कांसवा ने दर्जनों लोगों को उधार दिया या उधार में सामान दिया। इन सबकी इंट्री इन रजिस्टरों में है। पिछले कुछ वर्षों का भी हिसाब है, लेकिन इस साल के उधार में से लाखों रुपए अभी लेना बाकी थे। इसके अलावा कई ग्रामीणों को दिए खाद और विस्फोटकों का हिसाब भी रजिस्टर में लिखा है।

विक्रम का भी नाम

कांसवा के रजिस्टर में उसके नौकर विक्रम को भी सामान देने की इंट्री है। विक्रम दाड़िया के नाम से इंट्री की गई। दाड़िया गांव का नाम है। विक्रम वही नौकर है, जिसकी बाइक पर बैठकर ब्लास्ट के पहले कांसवा दुकान पर गया था। घटना में विक्रम की मौत की पुष्टि हो चुकी है। -निप्र

अब क्या मिलेगा

इस बारे में एसआईटी ही बता सकती है। अब वहां से दस्तावेज जैसी कोई चीज मिलना मुश्किल है। सबकुछ तो खत्म हो गया वहां पर।

-जीजी पांडे, एसपी, झाबुआ